समर्थकों और परिजनों ने दी प्रो.खेरा को अंतिम विदाई…गम में डूबा वनांचल…अधिकारी और नेताओं ने दिया कंधा

बिलासपुर— अचानक मार क्षेत्र के लमनी मुंंगेली में समाजसेवक प्रो.खेरो को अंतिम विदाई दी गयी। इस दौरान पूरा वनांचल गमगीन नजर आया। कमोबेश जिले और जिले के बाहर के आलाधिकारियों ने प्रो.खेरा को कांधा दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने समाजसेवी प्रभुदत्त खेरा के आदिवासियों को दिए गए योगदान को याद किया। सभी ने नमों आखों से खेरा का अंतिम दर्शन किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि उनके यादों और योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

                                         लमनी में प्रोफेसर खेरा को नम आखों से अंतिम विदाई दी गयी। प्रोफेसर खेरा का लम्बे समय से अपोलो में इलाज चल रहा था। 23 सितम्बर को सुबह 11 बजे उन्होने अपोलो में ही अंतिम सांस ली। खबर बिजली की तरह प्रदेश में फैल गयी। मामले की जानकारी प्रोफेसर खेरा के परिजनों को दिल्ली तक भेजी गयी। आज प्रोफेसर खेरा के पार्थिव शरीर को विधि विधान के साथ अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया।

            लमनी में आयोजित गमगीन कार्यक्रम में सभी लोगों ने खेरा के योगदान को याद किया। खेरा की पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। अंतिम विदाई के समय प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव, लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह, पूर्व विधायक चन्द्रप्रकाश वाजपेयी,कलेक्टर मुंगेली डॉ.सर्वेश नरेन्द्र भूरे, कांग्रेस नेता अरविन्द शुक्ला,सांसद अरूण साव समेत कई गणमान्य लोगों ने कांधा दिया।

                    अटल,धरमजीत,अरूण साव,कलेक्टर मुंगेली डॉ.भूरे,अरविन्द समेत सभी लोगों ने अपने संस्मरण को साझा किया। नेता और अधिकारियों ने बताया कि प्रो खेरा समाज सेवा के क्षेत्र में एक मिसाल हैं। उन्होने अपना जीवन आदिवासी बच्चों के विकास के लिए अर्पित कर दिया। 35 साल पहले उन्होने दिल्ली छोड़कर लमनी को ठिकाना बनाया। आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित किया। आदिवासी बच्चों को अशिक्षा के अन्धेरे से निकालकर शिक्षा के प्रकाश में लाया। उनके प्रयास से आज आदिवासी बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन कर रहे हैं।

                                   स्वभाव से जिन्दादिल और बच्चों के भविष्य को लेकर सजग प्रो.खेरा दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक थे। 1982 में टूर पर छात्रों के साथ अचानक मार क्षेत्र आए। यहां की स्थिति को देखने के बाद उन्होने एलान किया कि यहीं का होकर रहेंगे। इसके बाद उन्होने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।

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