शिक्षकों की एक और तबादला सूची अब रहस्य के घेरे में….! सवाल तैर रहा – गणित के किस फार्मूले पर चल रही जोड़ तोड़

बिलासपुर।स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षक संवर्ग के तबादले की तीसरी सूची जारी होने पर अब रहस्य बन गया है। स्कुलो के स्टाफ रूम की चर्चा में तुक्के, परिजनों के आशाएं, मंत्रालय के करीबियों के इनपुट, नेताओ के दिलासे, लेनदेन वालो के ढांढस और सूत्रों के हवाले से निकलने वाली खबरे  सब फेल हो गए है। स्कूल शिक्षा विभाग के रणनीतिकार गणितज्ञ…. शिक्षको के स्थानान्तरण के लिए अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित या कलन….पता नही कौन सी  गणित की शाखा का प्रयोग करने वाले है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

स्कूल शिक्षा विभाग की प्रयोगशाला पहली से आठवीं तक तिमाही परीक्षा की जगह  रचनात्मक, सावधिक औऱ योगात्मक आकलन को टीम्स एप से आन लाइन करने के दिशा निर्देश जारी हो चुके है। नए पैटर्न को लेकर शिक्षको पर भी दबाव है। वही विभाग में भी तबादलो को लेकर  यह दबाव है कि प्रयोग के लिए शिक्षको तबादला कही व्यवधान पैदा न कर दे।

शिक्षक चर्चा में बताते है कि हर शिक्षक को अपने स्कूली  बच्चों से लगाव होता है, इसलिए अब चिंता है कि यदि अधूरे सत्र में तबादला हुआ तो बच्चों का रिजल्ट खराब न हो जाये, जो शिक्षक अंतर जिला में स्थानान्तरण चाहते है। वे दोहरे दबाव में है। स्कूल के बच्चों के साथ अपने बच्चों के अधूरे सत्र में उनके एडमिशन, घर के पास के स्कूल और उनकी पढ़ाई को लेकर चिंतित है।

आधे सत्र के करीब पहुच गए शिक्षण सत्र में राजनीतिक रासकस्सी का शिकार हो गए शिक्षको को स्थानान्तरण की नीति….विभाग की रीति…  समझ से परे है। शिक्षको को अब इस नीति से लाभ की बजाय नुकसान दिखाई देने लगा है। शिक्षक नेता कुछ शिक्षको को लाभ मिलेगा यह सोच कर तबादले के गणित ज्ञान पर अपना मत खुल कर  जाहिर करने से बचते है।

27 जून को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण के दिशा निर्देशो का पालन स्कूल शिक्षा विभाग किस तरह करेगा इसका अंदाज बलौदाबाजार जिले के जिला स्तरीय स्थानांतरण सूची में की एक ही दिन दो अलग अलग अधिकारियों के नाम से जारी होने के बाद भी  विभाग ने सुध तक नही ली  और मामला रफा दफा हो गया।

सोशल मीडिया में चर्चा आम है कि इस सरकार में सब कुछ हो सकता है। चर्चा यह भी है कि शिक्षको के स्थानांतरण की फाइल मुख्यमंत्री के टेबल में है।यदि ऐसा हुआ तो यह स्थानांतरण साल भर के लिए विराम भी ले सकता है क्योंकि मुख्यमंत्री कड़े फैसले लेते है।

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