गांधी विचार पदयात्रा….प्रशासन और पार्टी नेताओं ने बताया…गांधी मानवधर्म के सबसे बड़े आइकन…हमेशा रहेंगे प्रासांगिक

मुंगेली—महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता ही नहीं..बल्कि मानव धर्म के सबसे बड़े आइकन हैं। थे इसलिए नहीं कहूंगा क्योंकि गांधी और गांधी के विचारधारा को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है। जब जब मानवधर्मिता की बात होगी..तब तब हमारे सामने गांधी का चित्र उभरकर आएगा। गांधी कल भी प्रासंगिक थे..आज भी हैं..और कल भी रहेंगे। क्योंकि  गांधी का दूसरा नाम मानवधर्म और मानवता है। यह बातें जिला मुंगेली कलेक्टर डॉ सर्वेश नरेन्द्र भूरे ने लोरमी में गांधी विचार पदयात्रा के मंच से कही। मंच से लोरमी नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल दास और जिला पंचायत उपाध्यक्ष सोनू चन्द्राकर के अलावा जिला कांग्रेस अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्री ने भी संबोधित किया।

                           मुंगेली जिला के लोरमी तहसील में जिला प्रशासन और जिला कांग्रेस की टीम ने गांधी विचार पदयात्रा कर जन जन तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का शांति,स्वच्छता और मानवधर्म का संदेश पहुंचाया। पदयात्रा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्री, मुंगेली जिला पंचायत उपाध्यक्ष सोनू चन्द्राकर,लोरमी नगर पंचायत अध्यक्ष अनिलदास की अगुवाई में कांग्रेसियों ने बढ़चढकर हिस्सा लिया। पदयात्रा में जिला कलेक्टर डॉ.सर्वेश नरेन्द्र भूरे की अगुवाई में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, लोरमी एसडीएम,नगर पंचायत मुख्यकार्यपालन अधिकारी समेत जिले के आलाधिकारियों ने शिरकत किया।

           जिला कांग्रेस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम को गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ आस्था जाहिर करने के बाद हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। टीम ने आम जन के साथ वार्ड क्रमांक एक से पदयात्रा शुरू कर पन्द्रह वार्डों का भ्रमण किया। गांधी विचार पदयात्रा के दौरान लोगों ने गांधी के प्रति अपनी भावनाओं के विभिन्न तरीके से पेश किया। सभी ने आजादी के महानायक के प्रति नायाब तरीके से श्रद्धासुमन भेंट किया। छात्र छात्राओं और बच्चों ने चित्रकारी के माध्यम से तो युवाओं ने गांधी के विचारों स्लोगन के माध्यम से पेश कर राष्ट्रपिता के प्रति अपने प्यार को जाहिर किया।  गांधी विचार पदयात्रा गांधी प्रतिमा से शुरू होकर नगर पंचायत के 15 वार्डों के भ्रमण के बाद गाधी के चरणों में खत्म हुई।

गांधी हमेशा से प्रासंगिक

                 जिला कांग्रेस अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्री ने कहा कि  स्कूल के पाठ्यक्रमों में गांधी को पढाया जाना बहुत ही जरूरी है। आज की परिस्थितियों में जब धर्म और जाति को लेकर समाज को बांटने की कोशिश हो रही है। ऐसे में गांधी और उनके दर्शन की प्रांसगिकता बढ़ जाती है। राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देता हूं कि प्रशासन और शासन स्तर से लेकर पार्टी स्तर पर गांधी विचार यात्रा के लिए प्रेरित किया। अब जनता के बीच हम गढबों नवा छत्तीसगढ नारे के वजाय गढबों गांधी के सपनो का छत्तीसगढ के साथ जायेगे।

जीवन मानव धर्म को समर्पित

                      जिला पंचायत उपाध्यक्ष सोनू चन्द्राकर ने कहा कि गांधी हमेशा गांव गरीबों, महिलाओं और अछूतों के उद्दधार के लिए काम किया। उन्होने ऊंच नीच की खाई को पाटा। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी ही प्रेरणा से राजा और रंक एक साथ आजादी का बिगुल फूंका। गांधी ने अपना जीवन मानवधर्म को स्थापित करने में खर्च किया।

मजबूरी नहीं मजबूत इरादों के पर्याय

                  नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल दास ने कहा कि गांधी मजबूरी का नाम नहीं बल्कि मजबूती का नाम है। हां कुछ विघ्न संतोषियों ने जिन्होने गांधी को नहीं समझा उन्होने मजबूती को मजबूर समझ लिया। सच्चाई तो यह है कि गांधी के अंहिसा आंदोलन से ही अंग्रेजों को मजबूर होकर भारत को आजाद करना पड़ा। गांधी आत्मबल के पर्याय थे। आज उनकी सबसे ज्यादा हमें कमी महसूस हो रही है। लेकिन वह सशरी हमालेसाथ बेशक ना हो लेकिन उनका संदेश आज भी सर्वसमाज में मजबूती के साथ काम खड़ा है।

मानवधर्म के बड़े आइकन–डॉ.भूरे

                          जिलाधीश डाॅ. सर्वेश भूरे ने स्वागत भाषण में कहा कि महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता ही नहीं..बल्कि मानव धर्म के सबसे बड़े आइकन हैं। थे इसलिए नहीं कहूंगा क्योंकि गांधी और गांधी के विचारधारा को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है। जब जब मानवधर्म की चर्चा होगी…तब तब गांधी को याद किया जाएगा। भूरे ने कहा कि गांधी कल भी प्रासंगिक थे..आज भी हैं..और कल भी रहेंगे। क्योंकि  गांधी का दूसरा नाम मानवधर्म और मानवता है। देश का ऐसा कोई परिवार नहीं होगा यहां तीसरा सबसे बड़ा चेहरा गांधी ना हो। बच्चा घर से निकलते ही माता पिता के बाद सबसे पहले राष्ट्रपिता से परिचित होता है। दरअसल गांधी समग्र धर्म और जाति के पर्याय हैं। आज विश्व में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले शख्सियत में पढ़े जाने वालो में गांधी जी का नाम है। सोचकर अच्छा लगता है कि मार्टिन लूथर किंग से लेकर नेल्सन मंडेला तक…अल्बल्ट आंइस्टिन से लेकर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम तक सब के आराध्य गांधी थे। हमें नाज है के गांधी हमारे देश के राष्ट्रपिता है। और विश्व में भारत की दूसरी पहचना महात्मा गाधी के देश से है। हम सबको मिलकर देश और प्रदेश को गांधी के विचारों के अनुकूल बनाना है।

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