भूख से हूई लंबू की मौत–खतरे में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र…. भूपेश

IMG-20151021-WA0005बिलासपुर—जशपुर जिले के सन्नापाट में पहाड़ी कोरवा की मौत अब तूल पकड़ता जा रहा है। भूपेश बघेल ने आज बिलासपुर में एलान किया है कि इस मामले को पहले राजभवन फिर राष्ट्रपति भवन तक ले जाँएगे। जशपुर सन्नापाट से लौटन के बाद भूपेश ने बताया कि पहाड़ी कोरवा की स्थिति अच्छी नहीं है। यदि उन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो एक दिन प्रदेश से पहाड़ी कोरवा विलुप्त हो जाएंगा।

                 जशपुर सन्नापाट में पहाड़ी कोरवा जनजाति के लंबूराम की मौत अब राजनीति का मुद्दा बन गया है। भूपेश बघेल ने आज पत्रकारों से बताया कि मृतक लंबूराम के मामले को प्रशासन ने छिपाने का प्रयास किया। लेकिन वे लोग अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पाए। पत्रकारों को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने बताया कि लंबूराम की मौत भूख से हुई है। वह चार दिन से खाना नहीं खाया था। बघेल ने सवालों के जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र का अस्तित्व संकट में है। पूरे के पूरे गांव में पहाड़ी कोरवा जनजाति के पास  स्मार्ट कार्ड तो दूर राशन कार्ड नहीं है। पहाड़ी कोरवा अपना जीवन जंगली कंदमूल  खाकर गुजारा करते हैं।

IMG-20151021-WA0007               पत्रकारों को पीसीसी अध्यक्ष ने बताया कि लंबूराम के घर में पिछले एक महीने से एक दाना नहीं है। सन्नापाट और आसपास रहने वाले सभी पहाड़ी कोरवा कंदमूल खाकर गुजारा करते हैं। घर की हालत भी ठीक नहीं है। शरीर पर जो कपड़ा है वही उनकी पूंजी है। घर को घर नहीं कहा जा सकता..यदि है भी तो उस पर छानी नहीं है। उन्होंने बताया कि मृतक लंबूराम अपनी पत्नी को अस्पताल में इलाज करवा रहा था। जिसके चलते वह चार दिन जंगल नहीं गया। यदि जाता तो कंदमूल से अपना पेट भर लेता। चार दिन से पेट में एक दाना नहीं होने के कारण अंत में उसने दम तोड़ दिया।

                     भूपेश ने कहा कि सरकार दावा करती है कि प्रदेश के एक-एक गरीब और आदिवासी परिवार के घर में दो रूपए किलो का चावल पहुंच रहा है। लेकिन हमने देखा कि जशपुर के सन्नापाट, लेदरागढ्हा के पहाड़ी कोरवा के पास राशन कार्ड तक नहीं है। घर में दाना नहीं है। सभी पहाड़ी कोरवाओं को जीवन जंगल के भरोसे चल रहा है।

IMG-20151021-WA0009                    भूपेश ने बताया कि प्रदेश में विशेष संरक्षित जातियों की जब यह हालत है तो अन्य जनजातियों की क्या हालत की कल्पना की जा सकती है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए भूपेश ने कहा कि मैं बिलासपुर से रवाना होने के बाद पहले राजपाल के सामने पहाड़ी कोरवा की दुर्दशा को रखुंगा। इसके बाद राष्ट्रपति से मिलकर छत्तीसगढ़ में दाने दाने को मोहताल उनके दत्तक पुत्र की जानकारी दूंगा।

                                                                    प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि स्थानीय व्यापारियों ने पहाड़ी कोरवा को कमिया बना लिया है। एक तरफ प्रदेश सरकार कहती है कि प्रदेश में कोई भूख से नहीं मरेगा। दूसरी तरफ विशेष संरक्षित जाति पहाड़ी कोरवा की संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है। भूपेश ने पत्रकारों को कंदमूल दिखाते हुए कहा कि एक तरफ घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र दाने दाने को मोहताज है। पीडीएस सिस्टम फेल है।

                   उन्होंने कहा कि लंबूराम की मौत को अब सामान्य दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। भूपेश ने कहा कि स्मार्ट कार्ड तो दूर पहाड़ी कोरवा के पास शासन की कोई भी योजना अभी तक नहीं पहुंची है। उनके जिन्दगी दड़बे में गुजर रही है। मृतक लंबूराम की पत्नी सगुनी बाई की आंख से मवाद निकल रहा है लेकिन डाक्टरों ने उसका इलाज नहीं किया । यदि ध्यान नहीं दिया गया तो वह भी एक दिन मौत की शिकार हो जाएगी।

                       भूपेश ने बताया कि पहाड़ी का कोरवा का संरक्षक राष्ट्रपति होते हैं। पहाड़ी कोरवा के लिए केन्द्र से विशेष संरक्षण और सुविधा हासिल है। बावजूद इसके सन्नापाट,लेदरागढहा और आसपास के गांवों में पहाड़ी कोरवा के जनजीवन देखने के बाद ऐसा लगता है कि हम अब भी आदिमकाल से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उन्होंने कहा कि आखिर इन आदिवासियों के लिए भेजा गया पैसा कहां जा रहा है। हम जांच की मांग राजपाल और राष्ट्रपति से करेंगे।

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