सहायक शिक्षकों को क्यों हो रहा है हर महीने पन्द्रह से बीस हजार रुपए का नुक़सान…? नए आंदोलन का आगाज

बिलासपुर।शिक्षक के समतुल्य वेतनमान पाने के बाद वेतन विसंगति के मार से जूझ रहे सहायक शिक्षक एलबी साथ ही संविलियन के बाद 10 वर्ष की सेवा अवधि बीत जाने के बाद भी बिना पदोन्नति और बिना क्रमोन्नति के हर माह 12 से 15 हजार की आर्थिक मार झेल रहे यह वर्ग अब एक नया आंदोलन का आगाज कर दिया है वो है।समयमान के आधार पर LPC जारी करने के लिए पँचायत सचिव को अभ्यावेदन देकर 15 दिवस के अंदर निराकरण करने तथा समय सीमा में सन्तोषजनक निराकरण नही करने पर हाईकोर्ट में रिट याचिका लगाने का सिलसिला जारी हो गया है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्स्स्एप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए

उसी प्रकार 10 वर्ष की सेवा उपरांत पदोन्नति से वंचित सहायक शिक्षको को 10 वर्ष में अनिवार्य आर्थिक लाभ क्रमोन्नति दिए जाने का माँग पत्र सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी को सौपकर निराकरण करने का आवेदन लगाएँगे।

इसके लिए सहायक शिक्षक नेता शिव सारथी ने बाकायदा एक आवेदन पत्र का पीडीएफ जारी किया है जिसमें उन्होंने शिक्षा सचिव के क्रमोन्नति आदेश जो उन्होंने 07/03/2019 तथा 06/04/2019 को जारी क्रमोन्नति सम्बन्धी आदेश को आधार बनाया है। इस सम्बंध में शिव सारथी का कथन है कि शिक्षा सचिव ने अपने दोनों आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया है कि पदोन्नति के स्थान पर क्रमोन्नति देने का आदेश दिया है।

साथ ही अगर एलबी संवर्ग के शिक्षको का पुराना एरियर्स मात्र पँचायत विभाग को देने बाकी सुविधा शिक्षा विभाग से देय होने का उल्लेख किया है इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारियो के द्वारा शिक्षा सचिव के आदेशो की अवेहलना किये जाने तथा सहायक शिक्षको को क्रमोन्नति के लाभ से वंचित किये जाने का आरोप जिला शिक्षा अधिकारियों पर सहायक शिक्षको ने लगाया है।

शिक्षक नेता का यह भी कहना है कि जब सहायक क्रमोन्नति सम्बन्धी मांग करते है तो जिला शिक्षा अधिकारियो द्वारा यह गुमराह किया जाता है कि एलबी संवर्गो का संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ है इसलिए क्रमोन्नति का लाभ 2018 से 10 वर्ष बाद दिया जाएगा।

जबकि यह गुमराह करने वाली बात है क्योंकि सहायक शिक्षको की संविलियन वरिष्टता सूची उनकी प्रथम पदस्थापना दिनाँक से जारी हुआ है वह भी शिक्षा विभाग से ही साथ ही वर्तमान में पदोन्नति सम्बन्धी वरिष्टता सूची भी उनके प्रथम कार्यभार तिथि से जारी हो रहा है तो पदोन्नति विरुद्ध क्रमोन्नति के लिए दोहरा व्यवहार क्यो 2018 से सेवा गणना हास्यपद और नियम विरुद्ध है।

वेतन विसंगति दूर होने और क्रमोन्नति मिलने का आधार अनेक है जैसे संविलियन मार्ग दर्शन जिसमें 1 जुलाई 2018 से समस्त सेवा देय के विरुद्ध मार्च 2019 में शिक्षको के राजपत्र का प्रकाशन जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि 1/नियमित और एलबी शिक्षको के लिए समान नियम। 2/समयमान मार्गदर्शन वित्त विभाग का नियम 2009 का बिंदु 3 स्पष्ट कहता है कि एक समान पद पर एक विभाग से दूसरे विभाग में संविलियन हुए कर्मचारियो के लिए समयमान दिए जाने हेतु प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि का गणना किया जाएगा।

3/सन 2003 में निगम मण्डल राज्य परिवहन मण्डल के कर्मचारियो का संविलियन/समायोजन अन्य विभाग में उनके प्रथम नियुक्ति तिथि का गणना करते हए किया गया।
4/ सन 1961 में पँचायत शिक्षको का संविलियन शिक्षा विभाग में करते समय उनकी भी प्रथम नियुक्ति तिथि को सेवा गणना में शामिल किया गया था।

5/ मध्यप्रदेश में 2018-19 में संविलियन किये गए पँचायत के सहायक प्रध्यापको का भी सेवा गणना उनके प्रथम नियुक्ति तिथि से किया गया है जो कि न्यायालय में याचिका लगाकर केस जितने का पर्याप्त आधार है।

Comments

  1. By Surendra kumar Khuntey

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