शिक्षकों के बीच वायरल आदेश का सच…!MP में नियमित शिक्षकों को मिलेगा क्रमोन्नति का लाभ, संविलियन के बाद नियमित हुए शिक्षा कर्मियों को नहीं होगा फायदा

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बिलासपुर/भोपाल।छत्तीसगढ़ के शिक्षको के बीच वायरल हुआ मध्य प्रदेश शासन का एक आदेश जिसमे क्रमोन्नति वेतन लाभ स्वीकृत किये गए है । उस आदेश के अनुसार  12 वर्ष में प्रथम वरिष्ठ वेतनमान, 24 वर्ष में द्बितीय क्रमोन्नत वेतनमान और 30 वर्ष में तृतीय क्रमोन्नत वेतनमान  सहायक शिक्षक एलटीडी और शिक्षक यूटीडी को दिये जाने का आदेश शर्तो व प्रवधानों को।स्वीकृत किया गया है। इस वायरल हुए आदेश से  छत्तीसगढ़ के शिक्षा कर्मीयो के शिक्षक व  सहायक शिक्षको नेताओ के बीच  बयानबाजी शुरू हो गई है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए

सीजीवालडॉटकॉम ने इस विषय की गहराई से पड़ताल की तो जो तथ्य सामने है वे चौकाने वाले थे।  संचालनालय कोष एवं लेखा मध्यप्रदेश से  जारी हुआ क्रमोन्नति वेतन लाभ से जुड़ा आदेश जो 18 नवंबर 2019 जारी हुआ है।वह आदेश मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षक संवर्ग के लिए है……!

संविलियन के बाद नियमित हुए  राज्य शिक्षा सेवा के अध्यापक संवर्गीय शिक्षको को इसका लाभ नही मिलेगा क्योंकि राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्ति 01 जुलाई 2018 से मानी जाएगी और पूर्व सेवा का लाभ क्रमोन्नति-पदोन्नति में अधिकतम 10 वर्ष का दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के अध्यापक नेताओ से सीजीवालडॉटकॉम  ने चर्चा की तो शिक्षक नेताओ ने बताया कि मध्यप्रदेश में अध्यापको की मुख्य मांगों का वनवास अभी खत्म नही हुआ है।  सरकार ने अपने वचनपत्र में वादा किया गया था कि  पूर्व प्रचलित पदनाम सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता पद को पुनर्जीवित कर शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया जाएगा ……. लेकिन कर दिया गया राज्य शिक्षा में ….. 01 जुलाई 2018 से नियुक्ति और पदनाम दिए गये प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और उच्च माध्यमिक शिक्षक…..! 

अध्यापक नेताओ ने बताया कि वर्तमान मध्यप्रदेश सरकार पूर्व सरकार के नक्शेकदम पर चल पडी है।पूर्व सरकार द्वारा घोषित राज्य शिक्षा सेवा का अध्यापक घोर विरोधी रहा है और कुछ जाबांज अध्यापक साथी इस योजना में व्याप्त घोर कर्मचारी विरोधी प्रावधान को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की शरण भी ले चुके है।

नई नियुक्ति घाटे का सौदा-मध्यप्रदेश के अध्यापकों को संविलियन के बाद सबसे बडा नुकसान यह है कि एक प्रकार से नई नियुक्ति हो रही है…… जिसके कारण पूर्व में की गई सेवा की गणना आर्थिक लाभ में नही होगी।केवल क्रमोन्नति और पदोन्नति में पूर्व सेवा के अधिकतम दस वर्ष का लाभ देने की बात की गई है।जबकि सर्वविदित है कि क्रमोन्नति-पदोन्नति में आर्थिक लाभ नही के बराबर होता है।

वचनपत्र के अनुसार ना शिक्षा विभाग मिला, ना विभाग में संविलियन हुआ –चर्चा में शिक्षको ने बताया कि अपनी पीठ थप थप्पा रहे  नेता प्रदेश के अध्यापकों  के शिक्षा विभाग में संविलियन के रूप में मीडिया में प्रचारित करते रहते है, जो पूरी तरह झूठ का पुलिंदा है।अध्यापक संघो के अधिकांश नेतृत्व जिन्हे व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध करना है।

और अपनी नेतागिरी की लम्बी पारी खेलने की चाह है इन्होंने राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्ति को शिक्षा विभाग में संविलियन के प्रचार का सघन अभियान चलाकर प्रदेश के 98% अध्यापको को इस योजना को स्वीकारने के लिए विवश कर दिया।

आंदोलन का हिस्सा रहे शिक्षक बताते है कि राज्य शिक्षा सेवा  में नियुक्त शैक्षणिक कर्मचारियो को बगैर सेवा-शर्ते बताए वचनपत्र भी भरवा लिए गए है ताकि वह अपने द्वारा की गई पूर्व  सेवा के बदले आर्थिक लाभ की मांग न कर सके………! 

सेवा की गणना सबसे महत्वपूर्ण–अध्यापक बताते है कि उनके तनाव का सबसे बडा कारण पूर्व सेवा को शून्य घोषित करना भी है। उसकी अब भी मांग है कि नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि मान्य की जाए एवं भविष्यलक्षी लाभ के लिए पूर्व सेवा अवधि की गणना की जाए…….! शैक्षणिक कर्मचारी को बडा आर्थिक लाभ सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी से होता है !

लेकिन ग्रेच्युटी की गणना कब से होगी और मिलेगी भी या नही इस पर राज्य शिक्षा सेवा में मौन बरता गया है।ग्रेच्युटी की पात्रता लिए वर्तमान में न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा होना जरूरी है।यदि ग्रेच्युटी देय भी हुई तो बहुत से शैक्षणिक कर्मचारी ग्रेच्युटी के लाभ से वंचित हो जाएगे क्योकि 01 जुलाई 2018 से सेवा के 5 वर्ष की सेवा की पात्रता को पूरा कर नही पायेंगे।उसके पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएगे।

पुरानी पेंशन की आशा में सेवा की गणना–अध्यापक नेताओ से चर्चा में बताया कि पुरानी पेंशन की लड़ाई  सरकार से जारी है। संविलियन में हुए झोल झाल से यह भी खतरा मंडरा रहा है कि यदि कभी पुरानी पेंशन बहाली का विचार सरकार करती भी है तो बहुसंख्यक शैक्षणिक कर्मचारी इस लाभ से वंचित हो जाएगे क्योंकि परिवार पेंशन की पात्रता के लिए 20 वर्ष की सेवा होना जरूरी है।…पूर्व सेवा की गणना नही होने के कारण इस लाभ से शिक्षक वंचित हो जाएगा।शैक्षणिक कर्मचारियो के बुढापे और सेवानिवृत्ति भविष्य के सामाजिक सुरक्षा की मध्यप्रदेश सरकार ने ग्यारंटी लेने की कोई ईच्छाशक्ति राज्य शिक्षा सेवा में नही दिखाई है।

कमलनाथ सरकार से उमीदें पर सरकार मामले में गंभीर नही–अध्यापक नेताओ ने बताया कि वर्तमान सरकार ने अध्यापको से अपने वचनपत्र में प्रचलित पदनाम सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता को पुनर्जीवित कर शिक्षा विभाग में संविलियन, उदार अनुकंपा नियुक्ति और 1 जनवरी 2005 से बंद परिवार पेंशन को बहाल करने का वचन दिया था ।लेकिन अपने वचनो पर वह गंभीर नजर नही आ रही है ,बल्कि पूर्व सरकार की मंशानुसार योजनाओ को धडल्ले से लागू किया जा रहा है।

अध्यापको की सबसे बडी चिंता शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की मान्यता और गणना, ग्रेच्युटी के लाभ के लिए गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से करने और परिवार पेंशन बहाली को लेकर है ताकि सेवानिवृत्ति भविष्य और बूढापा सुरक्षित हो सके।कमलनाथ  की सरकार से अध्यापको को बहुत अपेक्षाए है और उनका व्यक्तित्व और छबि बगैर प्रचार-प्रसार के काम करने की रही है।

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