बिना परामर्श एन्टीबायोटिक से बचें ..क्योंकि वायरल रोगो में नहीं होता उपयोग..डॉक्टरों ने कहा..खतरनाक है परिणाम

बिलासपुर— सिम्स के आडिटोरियम में विश्व एन्टीबायोटिक संज्ञान सप्ताह के तारत्मय में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सक वक्ताओं ने एन्टीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंट अ ग्लोबल विषय पर अपनी बातों को गंभीरता के साथ पेश किया। वक्ताओं ने बताया कि वायरस जनित रोग में एन्टीबायोटिक दवाइयों की जरूरत नहीं होती है। यदि इसका उपयोग किया गया तो भविष्य में परिणाम नकारात्मक मिलते हैं।

                   सिम्स आडिटोरियम में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। एन्टीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंट अ ग्लोबल विषय पर नामचीन विशेषज्ञों ने प्रकाश डाला। कार्यशाला को विशेष वक्ता डॉ.सागरिका प्रधान,डॉ सबा सिद्धिकी, डॉ.पद्मा दास,डॉ, सबा जावेद ने एन्टीबायोटिक रोग प्रतिरोधी क्षमता पर अपनी बातों को तर्क संगत तरीके से उपस्थित लोगों के सामने रखा।

              कार्यक्रम को सिम्स के डीन पी.के.पात्रा ने संबोधित किया। पात्रा ने एन्टीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग विषय प्रकाश डाला।

                विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि ज्यादातर होने वाली बीमारियों जैसे सामान्य सर्दी, बुखार,उल्टी दस्त समेत अन्य कई प्रकार की बीमारियों का कारण वायरस है। ऐसे वायरस जनित बीमारियों में एन्टीबायोटिक दवाईयों की जरूरत नहीं होती है। यदि प्रयोग किया जाता है तो परिणाम विपरीत ही मिलता है। लम्बे समय बाद रेसिस्टेंट के वैक्टीरिया बनने लगते हैं। इसके बाद एन्टीबायोटिक का कोई असर नहीं होता है। वक्ताओं ने कहा कि एन्टीबायोटिक दवाइयों का उपयोग हमेशा चिकित्सकों के परामर्श के बाद ही किया जाए।

                 कार्यशाला में माइक्रोबायोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ.सागरिका प्रधान, डॉ.रेखा बारापात्रे, डॉ.एकता अग्रवाल, डॉ.विनोद टण्डन,डॉ.स्निग्ध आकांक्षा लाल, डॉ.पल्लवी मिश्रा समेत अन्य सम्मानित डॉक्टर और छात्र छात्राएं विशेष रूप से मौजूद थीं।

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