भारत सरकार से तय होता है फसल का समर्थन मूल्य,बृजमोहन के सवाल पर मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया-बैंक ऋण लेने में असुविधा की कोई शिकायत नहीं

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रायपुर।किसी भी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य का राज्य शासन द्वारा नहीं बल्कि निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य,आयोग भारत सरकार द्वारा किया जाता है।कृषि लागत और मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा 2019-20 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य श्रेणी के लिए 1815रु प्रति क्विंटल और ग्रेड श्रेणी के लिए 1835 रु प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। यह जानकारी कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने यहां क्लिक करे

भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने जानना चाहा कि राज्य में कृषि खाता धारक किसानों समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के मूल्य निर्धारण किस की श्रेणी के धान के लिए कितना कितना किया गया है?किसानों के किस किस वर्ष के कितने कितने खाते में कितनी ऋण राशि माफ की गई?कितने किसान ऋण माफी से वंचित रह गए? ऋण माफी के खाता धारक किसानों को किन-किन बैंकों से किस वर्ष ऋण लेने में असुविधा हुई?किसानों की शिकायतों पर राज्य शासन ने क्या कार्रवाई की?

जिसके जवाब में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि किसी भी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य का राज्य शासन द्वारा नहीं अपितु निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा किया जाता है।कृषि लागत और मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा जारी वर्ष 2019 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य श्रेणी के लिए 1815 प्रति क्विंटल,ग्रेड श्रेणी के लिए 1835 रु प्रति क्विंटल घोषित किया गया है।

शासन की अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना 2018 और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसायिक बैंकों के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना 2019 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसायिक बैंक से 30 नवंबर 2018 की स्थिति में प्राप्त सभी पात्र किसानों के अनुसार राशि की माफी की गई है।जिसके आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के प्राप्त सभी 4,55,148 किसानों की ऋण राशि 3313.38 करोड़ की माफी की गई है।

साल 2018-19 और 2019-20 में कुल राशी 2570.19 करोड़ की ऋण राशि विमुक्ति उपरांत शेष राशि 743.19करोड़ के भुगतान की कार्यवाही प्रक्रिया प्रक्रियाधीन है।उपरोक्त योजनाओं के अंतर्गत पात्र किसानों के दावे में किसी भी किसान को ऋण माफी से वंचित नहीं किया गया है।किसानों को बैंक ऋण लेने में असुविधा सम्बंधी कोई भी शिकायत संज्ञान में नहीं आई है।

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