ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण के साथ जब हम आरती की यह पंक्तियां गुनगुनाते हैं – ” ऊँ जय जगदीश हरे , भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे ………….”, तो प्रार्थना की पूर्णता इन पंक्तियों के साथ होती है – ”  तन-मन-धन , सब है तेरा……….  तेरा तुझको अर्पण ….क्या  लागे मेरा…..।”