दंतेवाड़ा।अभी पिता और पत्नी की आंख के आंसू सूखे भी नहीं थे। रोने के अलावा परिजनों के गले से कोई शब्द भी अभी तक नहीं निकला था। कल ही परिवार ने अपने लाड़ले जवान बेटे का अंतिम संस्कार किया था। फिर भी वह परिवार मतदान करने पहुंच गया और लाइन में लगकर लोकतंत्र के पर्व