मेरा बिलासपुर

खुलेआम बिक रहा मिलावटी तिलकुट…भारी पड़ सकती है खाद्य विभाग की लापरवाही…मतलब दाल में काला नहीं..पूरी दाल काली है

धड़ल्ले से हो रहा मिलावटी तिल का व्यापार..यहां से हो रहा कारोबार..चांदी काट रहे मुनाफाखोर

रामानुजगंज–(पृथ्वीलाल केशरी)—त्योहारी सीजन आते ही रामानुजगंज में मिलावटी तिलकुट झारखंड बिहार प्रदेश से होकर प्रदेश में पहुंचने लगा है। तथाकथित थोक दुकानदारों ने  खुलेआम अन्य दुकानों को मिलावटी तिलकुट की सप्लाई कर रहे हैं। ताज्जुब की बात  है कि संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। शिकायत के बाद भी विभाग न तो सैंपल ले रहा है। और ना ही दुकानदारों को समझाइश ही दे रहा है।  जिसके कारण मुनाफा खोरो की हौसले बुलंद हैं। 
        पिछले एक महीन से रामानुज गंज समेत आस पास के जिलों में धड़ल्ल्ले के साथ मिलावटी तिलकुट का बाजार गर्म है। मुनाफा खोर थोक दुकानदार खुलेआम मिलावटी तिलकुट की सप्लाई कर रहे हैं। सामने मकर संक्रांति का त्योहार है।  घर-घर कई प्रकार के गुड़ के पकवान बनना शुरू भी हो गया है। यह जानते हुए भी कि त्योहार के समय सामान कम और मांग अधिक होने के कारण मिलावटखोरों की सक्रियता बढ़ जाती है। बावजूद इसके खाद्य विभाग कार्रवाई नहीं करते हुए हाथ पर हाथ रखकर बैठा है।
  जानकारी हो कि मकर संक्रांति के दौरान गुड़ और चीनी से बने हुए पकवानों की मांग क्षेत्र में बढ़ जाती है। मांग अधिक होने के कारण मुनाफा कमाने वाले मिलावटखोरों की संख्या बढ़ जाती है।  बड़ी मात्रा में नकली और अमानत तिलकुट को बिहार और  झारखंड प्रदेश से लाकर धड़ल्ले से सप्लाई करना शुरू कर देते हैं। बावजूद इसके अब तक  जांच या निरीक्षण को लेकर प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय है। ऐसे में संभावना बनी हुई है कि क्षेत्र के लोगों को अमानक और दूषित तिलकुट के उपयोग से स्वास्थ्य बिगड़ सकती है। बिहार एवं झारखंड से आने वाले मिलावटी तिलकुट बस स्टैंड के समीप किसी गोदाम में डंप किया जा रहा है। जहां से इसकी सप्लाई की जा रही है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
जिम्मेदार विभाग की तरफ से अब तक कोई कार्रवाई नही होने के कारण मिलावटखोरों के हौसले बुलन्द हैं। हॉटलों और दुकानों में कई तरह की खाद्य सामग्रियों में मिलावट देखी जा सकती है। यद्यपि त्योहार नजदीक आते ही खाद्य विभाग सक्रिय हो जाता है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजता है। जब तक सैम्पल की रिपोर्ट मिलती है त्योहार  के साथ सामान भी खत्म हो चुका होता है। मजेदार बात है कि इस बार खाद्य विभाग ने अभी तक मिलावटखोरों के खिलाफ ना तो निरीक्षण अभियान चलाया है। और ना ही किसी के खिलाफ कार्रवाई ही हुई है। कयास लगाया जा रहा है कि खाद्य विभाग शायद ही इस बार खानापूर्ति अभियान चलाए।
त्योहारो में खाद्य सामग्रियों में मिलावट का खेल शुरू
त्योहारी सीजन में मिलावटखोरों के तरफ से नियम और कानून को ताक में रखकर तिलकुट समेत कई खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति  बिहार और झारखंड प्रदेश से करते है। लेकिन खाद्य औषधि विभाग समय पर न तो जांच  करता है। और ना ही ऐसी कोई कार्रवाई ही करता है..जिससे मिलावटखोरों को नियंत्रित किया जा सके। यही कारण है कि तीज-त्योहार आते ही मिलावट खोरों की चांदी हो जाती है। जमकर खरीदारी होती है। इस बार भी मकर संक्रांति के 1 महीने पहले से घटिया खाद्य सामग्री बेचने का खेल शुरू हो गया है। लेकिन सबकुछ जानते हुए भी खाद्य विभाग मिलावट खोरों के खिलाफ अभियान चलाने को तैयार नजर नही आ रहा है। मतलब दाल नहीं पूरी दाल ही काली है।

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