रेत माफियों की दस्तक..दुर्घटना के बाद खुली पोल..प्रतिबंधित घाट से निकाला जा रहा रेत..ग्रामीणों ने सरपंच को पीटा

बिलासपुर—- जिले में पिछले एक साल के अन्दर रेत माफियों ने जबरदस्त दस्तक दे रहे हैं। कानून को ढेंगा दिखाकर रसूखदार नेताओं के साए में रेत माफिया मनमानी से बाज नहीं आ रहे है। हर दुर्घटना के बाद जानकारी मिलती है कि रेत का उत्खनन प्रतिबंधित खदान से किया जा रहा है। बावजूद इसके माफियों के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी। यदि कार्रवाई होती तो शायद लोफंदी में मोहम्मद सलमान आज अपने परिवार के साथ नया साल मनाता       

                                   एक दिन पहले लोफंदी में रेत भरे ट्रक की चपेट में 22 साल का नौजवान मोहम्मद सलमान आ गया। ग्रामीणों ने घेराव किया..प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गयी। यद्यपि तनाव भरे माहौल को समय पर नियंत्रित कर लिया गया। बावजूद इसके भी ग्रामीणों की गुस्सा कायम है। ग्रामीणों ने बताया कि मामले में कई बार ऊपर तक शिकायत की गयी। लेकिन  रसूखदार रेत माफिया के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हई। 

                 ग्रामीणों ने बताया कि हम लोफंदी ही नहीं अब आस पास के क्षेत्र में रेत खदान ही नहीं चलने देंगे। काश यदि हम ऐसा पहले कर लिए होते तो शायद सलमान आज हमारे बीच में होता।

प्रतिबंधित खदान से उत्खनन 

                  खनिज अधिकारी ने बताया कि लोफंदी में शासन की तरफ से किसी को भी खदान स्वीकृत नहीं किया गया है। यहां पहले रेत जरूर निकाला जाता था। लेकिन इस बार एनओसी नहीं दिया गया है। खनिज अधिकारी ने कहा कि विभाग की तरफ से रेत का अवैध परिवहन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। लेकिन उन्होने अपने कामकाज का तरीका मानिटरिंग के आधार निश्चित कर लिया है। नजर हटते ही रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन शुरू कर देते हैं।

                   खनिज अधिकारी ने जानकारी दी कि लोफंदी,निरतुस कछार और सेन्दरी में शासन की तरफ से रेत खदान स्वीकृत नहीं है। यद्यपि यहां से लगातार रेत उत्खनन की शिकायत मिलती है। कार्रवाई भी होती है। लेकिन आारोपी अपनी आदतों से बाज नहीं आते है।

सरपंच और जनपद सदस्य की पिटाई

                बताते चलें कि लोफंदी हादसा के बाद नाराज ग्रामीणों ने सरपंच को जमकर पीटा है। ग्रामीणों ने बताया कि रेत माफियों से सरपंच की मिलीभगत है। मना करने पर रसूखदार नेताओं के नाम की देता है। ग्रामीणों ने कई बार रेत उत्खनन को लेकर शिकायत की । लेकिन सरपंच लोगों को जेल भेजने की धमकी देता रहा। इसी तरह जनपद सदस्य ने भी रेत खदान बन्द किए जाने को लेकर कोई सहयोग नहीं किया। सलमान की मौत के लिए दोनों जिम्मेदार है। 

आबंटित खदान सुरक्षित

                खनिज विभाग के अनुसार इस बार शासन की तरफ से केवल घुटकू, मंगला और ळछनपुर रेत खदान में उत्खनन की अनुमति दी गयी है। 

                जानकारी देते चलें  चलें कि इन खदानों से आज भी रेत उत्खनन नहीं किया जा रहा है। बल्कि रसूखदार नेता रेत माफिया के इशारे पर प्रतिबंधित खदानों निरतु, लोफंदी, कछार और सेन्दरी से रेत उत्खनन किा जा रहा है। 

              मजेदार बात है कि मुफ्त में निकाली गयी रेत लोरमी,पंडरिया, पंडातराई और कवर्धा तक भारी भरकम राशि के एवज में भेजा जाता है। और शहर में नेता के इशारे में रेत की आपूर्ति दो से तीन गुने दाम में किया जाता है।

 मुरूम खदान नहीं..फिर भी बड़ा कारोबार 

                  खनिज विभाग से हासिल जानकारी के अनुसार जिले में एक भी मुरूम खदान की स्वीकृत नहीं है। सीजी वाल को मिली जानकारी के अनुसार इस समय शक्तिशाली नेता के इशारे पर आधा दर्जन से अधिक मुरूम खदान का संचालन किया जाता है। इस बात की जानकारी खनिज अधिकारी को भी है। लेकिन नौकरी पर खतरा देखते हुए कुछ भी बोलने से बच रहे है। जानकारी तो यहा तक है कि कभी मुरूम परिवहन करते ट्रक और हाइवा पकड़ में आ भी गया तो एक फोन पर अधिकारियों को गाड़ी छोड़ना पड़ता है।

सड़कों की हालत खराब

          अधाधुंध अवैध रेत उत्खनन की प्रक्रिया से जहां रसूखदार खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़को गिट्टियां भी भारी भरकम हाइवा और ट्रक के चलते उड़ रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गयी सड़कें गाड़ी तो दूर पैदल चलने लायक नहीं रह गयी है

माफिया कल्चर की दस्तक 

              पिछले दस महीने में रेत से भरे ट्रक के नीचे आने से लोफंदी के सलमान को मिलाकर कुल 11 लोगों की मौत हो चुकी है। विभाग रसूखदार के दबाव में असहाय है। यदि अब भी रसूखदार नेताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब बिलासपुर भी भिण्ड मुरैना दतिया की तरह रेतमाफियों का गढ़ बन जाएगा।

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