कृषि मंत्री ने कसा तंज..आय तो नहीं..लागत मूल्य जरूर दो गुना हुआ..बताया..फर्टिलाइजर कमी के लिए केन्द्र की नीतियां जिम्मेदार..किसान परेशान

बिलासपुर— हम 39 लाख हैक्टेयर में धान की खेती करते हैं। किसानों को फर्टिलाइजर की कमी है। बावजूद इसके हमारे पास पर्याप्त व्यवस्था है। लेकिन डीएपी की भारी कमी है। इस कमी के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। हम मांग से बहुत कम खाद मिला है। यदि सरकार की नीतियां सही होती तो किसानों को खाद की कमी नहीं होती। यह बाते कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने बिलासपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से कही। 
               एक  दिनी अल्प प्रवास पर प्रदेश के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे बिलासपुर पहुंचे। उन्होने पूर्व मंत्री बीआर यादव की पुण्यतिथि कार्यक्रम में शिरकत किया। इसके पहले उन्होने पत्रकारों से बातचीत कर देश प्रदेश की वस्तुस्थिति से अवगत कराया।
       सवाल जवाब के दौरान रविन्द्र चौबे ने कहा कि बीआर यादव का व्यक्तित्व बहुत बड़ा था। उनके साथ विधानसभा से लेकर क्षेत्र तक काम करने का अवसर मिला। उन्हें समझने के साथ व्यक्तित्व से परिचित होने का भी मौका मिला। लोगों को पुण्यतिथि कार्यक्रम को राजनीति के चश्मे नहीं देखना चाहिए। यदि देखते हैं तो इसमें कोई हर्ज भी नही है। हम राजनीति से जुड़े हैं तो इस बात से इंकार भी नहीं करते। रविन्द्र चौबे ने बताया कि बीआर यादव ने अपने जीवन काल में बहुत बडा आयाम स्थापित किया है। बिलासपुर के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 
             एक सवाल के जवा्ब में कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढड में 39 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। प्रदेश में बीज की कमी नहीं है। सोसायटी के माध्यम से किसानों की खाद बीज की जरूरतों को बेहतर सुविधा के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।
        चौबे ने बताया कि इस बार किसानों को बैंक के माध्यम से अल्पकालिक ऋण दिया जाता है। पिछले साल की तुलना में इस साल अल्पकालिक ऋण 800 करोड़ बढ़ाया गया है। इस साल हम 5 हजार 8 सौ करोड़ रूपया किसानों को अल्पअवधि ऋण के रूप में दिया जाएगा। आज की तारीख में 3 हजार 5 सौ करोड़ बट भी चुका है। यह पिछले साल की तुलना में बहुत ज्यादा है।
             सवाल जवाब के दौरान मंत्री ने बताया कि फर्टिलाइजर की समस्या पूरे हिन्दुस्तान में है। डीएपी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। राज्य को  केन्द्र  को जितनी खाद चाहिए उसकी आपूर्ति नहीं हुई है। छत्तीसगढ़ को सवा लाख मिट्रिक टन कम खाद मिला है। यही कारण है कि मांग के अनुसा्र खाद की आपूर्ति हम नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए केवल और केवल केन्द्र सरकार की नीतिया जिम्मेदार हैं।
                             जबकि केन्द्र सरकार को खरीफ की सप्लाई प्लान के अनुसार खाद देना चाहिए। हमारे पास यूरिया और सुपर फास्फेट उपलब्ध है। लेकिन डीएपी की भारी कमी है। रविन्द्र चौबे ने प्रधानमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने एलान किया था कि किसानों की आय दो गुनी होगी। दुर्भाग्य है कि उन्होने लागत मूल्य को दो गुना कर दिया है। डीजल की कीमत दो गुनी हो गयी है। फर्टिलाइजर की कीमत चालिस प्रतिशत बढ़ गयी है। किसानों को इनपुट कास्ट से तकलीफ है। लेकिन हमारे पास जितना फर्टिलाइजर है। किसानो को दिया जा रहा है। लेकिन डीएपी की सख्त जरूरत है। 

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