आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं – सहायिकाओं को बड़ी राहत, पोषण ट्रेकर एप को लेकर अब नहीं रोका जाएगा मानदेय का भुगतान, संघ को मिली जीत

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में महिला बाल विकास विभाग में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को बड़ी राहत मिली है। अब पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड ना होने और डाटा नहीं भेजने पर उनके मानदेय का भुगतान नहीं रोका जाएगा। यह छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की बड़ी जीत मानी जा रही है। संघ की ओर से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इसे लेकर याचिका लगाई गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किया गया है कि पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड ना होने और डाटा प्रेषण ना होने पर मानदेय का भुगतान आगामी आदेश तक नहीं रोका जाएगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 22 जून की तारीख पर जारी आदेश में कहा गया है कि विभाग ने के 6 मार्च के आदेश के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ बिलासपुर जिला शाख़ा अध्यक्ष श्रीमती भारती मिश्रा द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा 19 मई 2021 को पारित आदेश का पालन करते हुए नया आदेश जारी किया गया है । जिसके तहत पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड ना होने एवं डाटा प्रेषण ना होने पर मानदेय का भुगतान आगामी आदेश तक नहीं रोका जाएगा। छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ जिला शाखा बिलासपुर की अध्यक्ष श्रीमती भारती शर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग सचिव को इस संबंध में एक पत्र लिखा था। जिसमें बताया गया था कि पोषण अभियान के तहत पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड करने के संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में संघ की ओर से आवेदन दिया गया था लेकिन न तो कोई निर्णय लिया गया और ना ही इस बारे में किसी तरह की कार्यवाही की जानकारी दी गई। जिससे मजबूर होकर छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की ओर से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर हाई कोर्ट में एक याचिका पेश की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने विभाग को निर्णय लेने का आदेश दिया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को ऐप डाउनलोड करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। बलरामपुर , सूरजपुर ,अंबिकापुर ,जसपुर , दंतेवाड़ा, सुकमा ,कोंडागांव ,जगदलपुर, बीजापुर जैसे जिलों में हमेशा नेटवर्क की समस्या रहती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल 6000 से 7000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। जिसमें वे नेटवर्क की उपलब्धता के लिए चॉइस सेंटर जाएंगे तो उन्हें आने वाले खर्च पर विचार करना होगा । सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास स्मार्टफोन नहीं है। जिसकी वजह से 6 मार्च को विभाग की ओर से जारी आदेश का पालन करने में दिक्कत हो रही है।

विभाग ने ऐप डाउनलोड ना होने और डाटा ना भेजे जाने की स्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में कटौती किए जाने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को आदेश दिया था कि वह 2 महीने के भीतर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं कार्यकर्ताओं की समस्या का निराकरण करें। इस आदेश के आधार पर महिला बाल विकास विभाग ने 22 जून को नया आदेश जारी किया है। जिससे छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहायिकाओं को बड़ी राहत मिली है।

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