फरिश्ते मितानिनों जैसे ही होंगे..विधायक ने कहा कोरोना काल में खुद को जोखिम में डाला..दुनिया कर रही सलाम

बिलासपुर—मितानिनों ने कोरोना संक्रमण के दौरान अभेद किला की तरह अपनी भूमिका का निर्वहन किया है। खुद को जोखिम में डालकर दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया है। उन्होने संक्रमण काल ही नहीं बल्कि सामान्य और दैनिक कामकाज के दौरान अपनी भूमिका को पूरी संजीदगी के साथ निर्वहन किया है। यह बातें मितानिन दिवस पर सिम्स में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नगर विधायक शैलेष पाण्डेय ने कही। उन्होने बताया कि लोगों ने फरिश्ता को शायद ही कभी देखा हो। यदि फरिश्तो को देखना है तो कोरोना काल के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा करने वाली मितानिनों को जरूर देखें।
 
           मितानिन दिवस के अवसर पर सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित मितानिन सम्मान समारोह में नगर विधायक शैलेष पांडेय बतौर मुख्य अतिथि शिरकत किए। नगर विधायक ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होने  कहा कि कोरोना जैसी महामारी का सामना अब दुनिया को कभी नहीं करना पड़े। ताकि फिर आम इंसान फरिश्तों की परीक्षा ना ले। विधायक ने बताया कि कोरोना काल में मितानिन माताएं और बहनों ने जो किया..उसे पूरी दुनिया हमेशा याद रखेगी। परिवार को पीछे छोड़ खुद को जोखिम में डालकर जिस तरह मरीजों सेवा मितानिनों ने कही है। शायद ऐसी सेवा फरिश्ते ही करते होंगे। मितानिनों की सेवा अनमोल है। जाहिर सी बात है कि उसे कभी ना तो भुलाया जा सकता है। और ना ही रूपयों से आकलन ही किया जा सकता है। 
 
         पाण्डेय ने बताया कि बिलासपुर जिले में 2659 समेत 422 मितानिन बिलासपुर शहर में अपनी सेवाएं दे रही है। इस दौरान विधायक ने मितानिन भवन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध होने के बाद विधायक निधि से 10 लाख रुपए देने का एलान किया। शैलेष ने कहा कि पोषण, स्वास्थ्य एवं जागरूकता के क्षेत्र में मितानिनों ने उल्लेखनीय काम किया है। मितानिन हमारे प्रदेश की गौरव हैं। छत्तीसगढ़ की जनता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में हमारी 72 हजार मितानिन बहनों की मेहनत को हमेशा सम्मान की नजर से देखा जाता है। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो प्रगति हासिल की हैं। उसके केन्द्र में मितानिनों का ही प्रयास है। 
 
                  पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा मितानिन बहनों ने मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य और पोषण के विषयों से अपना कार्य शुरू किया। धीरे धीरे मलेरिया, दस्त, टी.बी. और कुष्ठ जैसे रोगों से लड़ने में बड़ी भूमिका में अपना सहयोग देना शुरू किया। आज  मितानिन बहने मानसिक स्वास्थ्य, बी.पी., शुगर समेत अन्य बीमारों की सेवा कर रही है।
 
           इतना ही नहीं..मितानिन बहनें स्वास्थ्य समस्याओं पर समुदाय की जागरूकता बढ़ाने, उचित सलाह देने और सामान्य बीमारियों के लिए प्राथमिक इलाज देने का काम कर रही हैं। स्वास्थ्य के अधिकार के साथ-साथ मितानिन बहनें महिला सशक्तीकरण जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी बेहतर कार्य कर रही हैं। शासन की अनेक कल्याणकारी योजनाओं के अधिकार से समुदाय को जोड़ रही हैं।
 
                   नगर विधायक ने बताया कि छत्तीसगढ़ के मितानिन कार्यक्रम से सीख लेकर देश भर में ‘आशा’ कार्यक्रम को सामने लाया गया है। 10 लाख महिलाएं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। मितानिनें छत्तीसगढ़ की गौरव हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस साल वैश्विक स्तर पर उनके योगदान को सराहा है। 
 
                         कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी, शहर अध्यक्ष विजय पांडेय, नगर निगम अध्यक्ष शेख नजीरूद्दीन, जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा, एआईसीसी सदस्य एवं पार्षद विष्णु यादव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनिल श्रीवास्तव, डॉ विजय सिंह, मितानिन शाखा प्रभारी उमेश पांडेय, पियोली मजूमदार, ब्लॉक अध्यक्ष मोती थावरानी, जहूर अली, करम गोरख, रेहान रजा, सुदेश दुबे, शाश्वत तिवारी, लल्ला सोनी, आयुष ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में मितानिन माताएं बहने एवं लोग शामिल हुए।

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