मेरा बिलासपुर

बच्ची को पाते ही मां ने कहा..अब दुनिया से कोई हसरत नहीं..वकील ने कहा..अब कलेक्टर और CWC को देना होगा जवाब

कलेक्टर और जिला बाल संरक्षण समिति को जवाब पेश करने को कहा

बिलासपुर— राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के सदस्य से कड़ी फटकार और नोटिस के बाद आज बाल संरक्षण गृह में बन्दी बनाकर रखी गयी 8 साल की बच्ची पीड़ित मां को मिल ही गयी। मां ने कहा..बच्ची को पाने के बाद अब दुनिया में कुछ बचा ही नहीं। मुझे अब कुछ नहीं चाहिए। पीड़िता के वकील रमाकांत शर्मा ने बताया कि मामला इतना पेचीदा नहीं था। लेकिन रसूखदार रेपिस्ट ने बखेड़ा किया। जिसके कारण मामला यहां तक पहुंचा है। देखते हैं कि कलेक्टर और बाल संरक्षण समिति के सदस्य अब क्या जवाब देते हैं।

                     पिछले चार दिनों से कलेक्टर कार्यालय के सामने पीड़ित बच्ची को पाने के लिए असहाय मां दिन रात धरना प्रदर्शन कर शासन को झुकने के लिए मजबूर किया। अन्ततः जिला प्रशासन को आदेश देना पड़ा कि बाल संरक्षण गृह में रखी गयी पीड़ित बच्ची को उसके मां के हवाले किया जाए। जिला ईकाई सीडब्लूसी ने आज दोपहर करीब डेढ़ बजे बच्ची को मां वर्षा अग्रवाल के हवाले कर दिया है।

जानकारी देते चलें कि करीब दो मरीने पहले मामला प्रकाश में आया कि रायगढ़ निवासी एक पिता ने अपनी ही 8 साल की बच्ची के साथ बिलासपुर में अनाचार किया। मामले की जानकारी बच्ची की मां को मिली। घटना के समय बच्ची की मां कुछ घंटे के लिए घर से बाहर गयी थी। लौटने पर बच्ची  मां के सामने फूट फूट कर रोने लगी। सारे घटनाक्रम को सामने रखा। इसके बाद मां ने सिविल लाइन पहुंचकर पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराया।

तत्काल बच्ची का मुलायहिजा कराया गया। इस दौारन पुलिस से बचने बच्ची का करोड़पति पिता फरार हो गया। घटना के बाद मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने पर मां और बच्ची को सखी केन्द्र में रखा गया। नियमों का हवाला देकर बच्ची को बाल संरक्षण गृह भेजा गया। मानसिक स्थिति सुधरने के बाद सखी से बाहर आते ही मां ने अपनी बच्ची को मांगा। लेकिन बाल संरक्षण समिति के सदस्यों ने बच्ची को देने से इंकार कर दिया। मां ने बच्ची को पाने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बावजूद इसके बाल संरक्षण समिति ने बच्ची को देने से इंकार कर दिया।

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          इस दौरान कोर्ट के आदेश पर मां का धारा 164 के तहत बयान लिया गया। लेकिन बच्ची को देना तो दूर बल्कि बाल संरक्षण समिति के सदस्य आरती सिंह और बनर्जी ने बयान को बदलने का दबाव बनाया। मामला कलेक्टर कोर्ट तक पहुंचा। लेकिन पांच और 12 को सुनवाई नहीं हुई।

     अन्ततः बच्ची की मां ने कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया्। धरना को दिन के उजाले में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने समर्थन किया। साथ ही आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी दिन रात तीन दिन धरना प्रदर्शन किया। सोमवार की रात्रि पुलिस ने आम आदमी पार्टी को धारा 151 के तहत जेल दाखिल कराया। साथ ही धरना पर बैठी पीड़ित बच्ची की मां को उसके भाई के हवाले किया। 

      पीड़ित मां की तरफ से वकील राजीव दुबे ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखा। लगातार बिगड़ती स्थिति को संज्ञान में लेकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ने कलेक्टर को एक पत्र लिखकर बच्ची को तत्काल मां के हवाले करने को कहा। साथ ही कलेक्टर और जिला बाल संरक्षण समिति को जवाब पेश करने को कहा।

रसूखदार करोड़पति ने किया बखेड़ा

 पीड़िता के वकील राजीव दुबे ने बताया कि लोगों के समर्थन और जनप्रतिनिधियों के दबाव मे बच्ची को मां के हवाले कर दिया गया है। न्याय की जीत हुई है। राष्ट्रीय आयोग ने मामले में कलेक्टर को पत्र लिकखर बच्ची को सुपुर्द करने को कहा। तब कही जाकर बच्ची, मां के पास पहुंची है। रमाकांत शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण गृह में केवल अनाथ बच्चों को ही रखा जाता है। जिनका कोई नहीं होता है। यहां मामला अलग है..बच्ची की मां है। चूंकि आरोपी रसूखदार और करोड़पति है और फरार भी है। कार्रवाई से बचने के लिए ही उसी ने बखेड़ा किया है।

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  वकील के अनुसार अब कलेक्टर और सीडब्लूसी को पत्र का जवाब देना होगा। कोर्ट का अवमानना हुआ है। उसका भी सामना करना पड़ेगा।

मुझे अब कुछ नहीं चाहिए

बच्ची पाने के बाद मां ने कहा कि अब जिन्दगी में कोई हसरत नहीं रही। मुझे मेरी बच्ची मिल गयी है। अब दुनिया से मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस पुलिस से इतना जरूर मांग करती हूं। आरोपी पिता को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर पुलिस उसको उसकी गुनाहों की सजा दिला।

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