आत्मानन्द स्कूल को भी लगा सरकारी रोग..झाडूं ना पोछा..अंशदायी सफाईकर्मी ने बताया मजबूरी.. व्यवस्था पीड़ित भृत्य ने भी सुनायी आप-बीती

बिलासपुर—गरीब अभिभावकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिए जाने को लेकर मुख्यमंत्री किसान पुत्र भूपेश ने एक सपना देखा। सपना देखा कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को महंगे इंगलिश मीडियम स्कूल का वातावरण दिया जाए। ताकि आने वाले समय में प्रदेश में मेधावी छात्रों की पीढी को तैयार करने में मदद मिले। गरीब बच्चों के अभिभावकों को शिकायतों को भी दूर किया जा सके कि गरीबी के चलते बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में वंचित हो गए । सपनों को साकार करने माटीपुत्र भूपेश बघेल ने प्रदेश के साथ बिलासपुर में चार इंग्लीश मीडियम स्कूल का एलान किया। और देखते ही देखते स्कूल ने रूप भी लिया। इसके बाद गरीब बच्चों का भविष्य संवारने का काम शुरू हुआ।  
 
                            जानकारी देते चलें कि बिलासपुर में मंगला, लालपत राय और तारबाहर हायर सेकन्डरी स्कूल में इंगलिश मीडियम स्कूल खोला  गया है। स्कूल को आधुनिक बनाने में शासन ने पानी की तरह पैसे बहाया। इंगलिश टीचर भी रखे गए। स्कूल में एडमिशन के लिए जहां आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भर्ती किया गया। कई बच्चे ऐसे भी सामने आये जिन्हें स्थान नहीं मिलने के कारण निराश होना पड़ा। वहीं अधिकारियों ने भी व्यस्था को चुस्त दुरुस्त बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। 
 
             सभी स्कूलों को स्थान विशेष के साथ जाने माने संत आत्मानन्द दिया गया। जानकारी देते चलें कि संत आत्मानन्द देश दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान हैं। आत्मानन्द की ख्याति पूरी दुनिया में गरीबों की सेवा भाव के लिए जाना  जाता है। उन्ही के नाम पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी स्कूलों को सेवा भाव और त्याग तपस्या को याद दिलाने स्कूल का नाम आत्मानन्द दिया।
   
            लेकिन साल भर बाद ही मुख्यमंत्री के सपने को व्यवस्थापकों ने मोतियाबिन्द का परत चढ़ा दिया । मतलब स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल अब्यवस्था का शिकार होने लगा है। स्कूल के फर्नीचर पर कई परत धूल जम गए हैं। कमरे और कांफ्रेन्स हाल में महीनों से झाड़ू नही लगा है। कुल मिलाकर सीएम के सपनों का स्कूल अब सरकारी व्यवस्था का शिकार हो गया है।
 
                      यद्यपि स्कूल में अब भी फर्नीचर, प्रोजेक्टर, लाइब्रेरी और LCD टीवी , सब कुछ है। लेकिन देखरेख के अभाव में और अधिकारियों की उदासीनता के कारण मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के साथ लाखों गरीबों का सपना धूमित हो रहा है। धीरे-धीरे चमचमाती बिल्डिंग, फर्नीचर, प्रोजेक्टर, लाइब्रेरी और LCD टीवी पर समुचित रख रखाव नहीं होने के कारण गंदगी और धूल की परत जम गयी है। 
 
   व्यवस्था से पीड़ित भृत्य की परेशानी
 
                   आत्मानन्द हायर सेकेन्डरी स्कूल लालपत राय का संचालन दो शिफ्ट में होता है। दोनो शिफ्ट में एक एक भृत्य को नियुक्त किया गया है। दोनों व्यवस्था से ज्यादा अपने स्वास्थ्य से पीड़ित है। एक भृत्य मटियारी से तो दूसरा कड़ार से आता है। कड़ार निवासी भृत्य ने बताया कि वह सीढ़ी नहीं चढ़ सकता। पैर में राड लगा है। काम करने में परेशानी होती है। वह कड़ार से कुछ दिनों के लिए व्यवस्था दुरूस्त होने तक लाया गया था। इसके बाद यहां नए भृत्य की नियुक्ति होना था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वह अपने स्वास्थ्य को लेकर परेशान है। कई बार विभाग के सामने अपनी  परेशानियों को रखा। बावजूद इसके कड़ार नहीं भेजा गया। काम नहीं होता है। और अब मैं कर भी क्या सकता हूं। यहां मुझे यानि संतोष और नागेश को मिलाकर दो भृत्य है। नागेश मटियारी स्कूल का भृत्य है।
 
अंशदायी कर्मचारी का शोषण
 
       साफ सफाई के लिए नियुक्त अंशदायी कर्मचारी ने बताया कि पूरे स्कूल की सफाई अकेले करना मुश्किल है। पूरे दिन लग जाते हैं। महीने में केवल 19 सौ रुपए वेतन मिलता है। शिक्षा विभाग के अनुसार यहां केवल दो घंटे काम करना है। लेकिन दूसरे काम भी करवाए जाते हैं। जिसके चलते पूरा दिन स्कूल में कट जाता है। हमारा वेतन बहुत कम है। हम लोग शासन से लगातार प्रदर्शन कर वेतन बढ़ाने के साथ नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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