न बैंक डूबेगा- ना ही खाताधारकों की पूंंजी..अफवाहों में दम नहीं…ललित ने बताया…बेल इन का अर्थ गलत निकाला

PNBबिलासपुर— इन दिनों देश और प्रदेश में बैंक खाताधारकों में एफआरडीआई को लेकर जमकर चर्चा है। बुद्धिजीवी लोगों एफआरडीआई को लेकर भ्रम की स्थिति में है। भ्रम और चर्चा की मुख्य वजह बेल आउट का जिक्र होना है। बिलासपुर बैंकर्स क्लब संयोजक ललित अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार ने एफआरडीआई के नए बिल से बेल आउट के प्रावधान को खत्म कर दिया है। लेकिन आम जनता को बेल आउट को लेकर दिए जा रहे तर्क और वितर्क को समझने की जरूरत है।

                 बिलासपुर बैंकर्स क्लब संयोजक ललित अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार के एफआरडीआई बिल में बेल आउट का जिक्र है। लेकिन नए बिला से इसे हटा दिया गया है। लेकिन बेल आउट को समझने की जरूरत है। ललित अग्रवाल ने बताया कि जब कोई बैंक डूब रही हो तो सरकार अपनी तरफ से पैसा देकर डूबते बैंक को बचाने का प्रयास करती है। इसे ही बेल आउट कहते है। जब बैंक डूब रही हो तो सरकार इस बात के लिए बाध्य करती है कि बैंक अपने असेट बेच कर पैसा खड़ा करे और खुद को डूबने से बचाये। इसे बेल इन कहा जाता है।

              ललित ने बताया कि सरकार ने नए FRDI बिल में बेल आउट का प्रावधान समाप्त कर बेल इन का प्रावधान किया है। इसका गलत मतलब निकाला जा रहा है। यहां तक की अफवाह फैलाने में जिम्मेदार पत्र पत्रिकाएं और बुद्धीजीवी लोग शामिल है। इसकी मुख्य वजह बेल आउट और बेल इन को ठीक से समझा नहीं गया है। अफवाह फैलाया जा रहा है कि बैंक बेल इन करने के लिए लोगो की FD, RD में जमा रकम को निकाल सकती है। इसके बाद बैंक जमा रकम को वापस भी नहीं करेगी ऐसा सुना और पढ़ा जा रहा है। ललित ने बताया कि जबकि इस बात में कोई सच्चाई नहीं है।

                               बैंकर्स क्लब संयोजक ललित ने बताया कि बेल इन शब्द को समझने की जरूरत है। प्रस्तावित एक्ट में कहीं नहीं लिखा है कि बैंक बेल इन प्रावधान में खाताधारकों के RD- FD या सेविंग अकाउंट से पैसे निकाल सकती है.

                         ललित अग्रवाल ने बताया कि प्रस्तावित एक्ट के अनुसार बैंक बेल इन करने के लिए उधारी को चुकाने से मना कर सकती है। बैंक कोलेटरल और मार्जिन कम कर सकती है। नए शेयर जारी कर मार्किट से पैसा उठा सकती है। बेल इन करते समय असेट के साथ छेड छाड़ नही कर सकती  है। जैसे  जमाकर्ता का पैसा सेविंग.आरडी,एफडी लॉकर में पड़ी संपत्ति, मॉडगेज में रखे हुए चल अचल संपत्ति को बैंक छू भी नहीं सकती है। एक्ट में बताया गया है कि बैंक की जिम्मेदारी है कि जमाकर्ता के धन और असेट को सुरक्षित रखे। .

बैंक डूबे या बचे जमाकर्ता का पैसा सुरक्षित

       ललित अग्रवाल ने बताया कि बैंक चाहे डूबे या बचे…लेकिन खाताधारकों की पूंजी को हाथ भी नहीं लगा सकती है। लेकिन अपरिहार्य स्थिति में भी बैंकों को सरकार से बेलआउट पैकेज नही मिलेगा। बैंक को घाटे को अपने संसाधनों से बेलइन से पूरा करना पड़ेगा। ललित अग्रवाल के अनुसार बेल इन को ठीक से समझा नहीं गया। बेल इन को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश हो रही है। कि बैंक डूबने की स्थिति में खाताधारकों का पैसा भी डूब जाएगा। जबकि अफवाह सिर्फ अफवाह है। सच्चाई नाम मात्र की भी नहीं है। पहली बात तो कोई बैंक डूबेगी ही नही। यदि बैंक डूब भी गयी तो खाताधारकों का पैसा नही डूबेगा,। चाहे इसके लिए बैंक को अपनी संपत्ती ही क्यो न बेचना पड़े।

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