ज़मीन पर बैठकर अभी भी कवि सम्मेलन सुनता है बिलासपुर … कोरोना काल के बाद पहली दफ़ा लगे ख़ुलकर ठहाके

( गिरिजेय ) “मंच पर देश के जानेमाने धुरंधर कवियों का जमावड़ा लगा है… शब्दों के चुटीले तीर चल रहे हैं…. व्यंग की बौछार हो रही है…और तरन्नुम में पढ़े जा रहे गीतों की स्वरलहरियां गूँज़ रही हैं…। मंच के सामने लगी कुर्सियों के साथ ही लोग ज़मीन पर बिछे गद्दों में गोल तकियों पर टिककर बैठे वाह—वाह करते हुए ठहाके लगा रहे हैं…. हर एक चेहरे पर मुस्कान ख़िली हुई है और हर कोई इस सुनहरे पल को अपनी अँजुरी में हमेशा के लिए समेट लेना चाहता है…. ।” मंगलवार की शाम बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में यह सीन देखकर कोई भी याद कर सकता था कि यह वही बिलासपुर शहर है, जहां बरसों पहले भी इसी तरह कवि सम्मेलन हुआ करते थे । खपरगंज,गोलबाजार,लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान, राजा रघुराज सिंह स्टेडियम और इसी पुलिस ग्राउंड में होने वाले कवि सम्मेलनों में गोपाल दास नीरज,हरिओम पवार,जगदीश सोलंकी, शरद जोशी, संतोषानंद, एकता शबनम जैसे देश के नामचीन कवियों को सुनने के लिए ऐसे ही श्रोताओं का जमघट लगता था …। औऱ लोग कविताओं में इतना डूब जाते थे कि सुबह की पौ फटते तक अपनी ज़गह पर जमे रहते थे। चाय – समोसा लेकर वापस घर लौटते थे । बिलासपुर शहर की यह पुरानी रवायत एक बार फ़िर जी उठी और यह मैसेज़ भी दिया कि बिलासपुरिया आज भी ज़मीन पर बैठकर कविताओं का आनंद पुराने अँदाज़ में लेते हैं।

मंगलवार की रात पुलिस ग्राउंड का आयोजन इस मायने में भी यादगार रहा कि कोरोना काल के बाद बिलासपुर शहर के लोगों ने पहली दफ़ा ख़ुलकर ठहाके लगाए। पुलिस मैदान को वैसे भी बिलासपुर का दिल ( हृदय ) कहा जा सकता है। जहां एक तरफ़ राजेन्द्रनगर से लेकर जरहा भाठा, सत्यम टाकीज़, इमलीपारा, ईदगाह चौक़, मिशन अस्पताल, बृस्पतिबाज़ार तक कितनी सड़कें आकर मिलती हैं । और जैसे इंसान के दिल में पूरे ज़िस्म के ख़ून की नलियां आकर मिलती हैं, वैसे ही शहर भर को ज़ोड़ने वाली डगर पुलिस मैदान में आकर मिल जाती हैं। ऐसे ठिकाने पर मंगलवार की रात शहर के कविता प्रेमी जुटे तो हास्य-व्यंग-गीत – चुटीली फ़ुलझड़ियों का संगम नज़र आने लगा।

मंच का संचालन कर रहे थे देश के जाने माने हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी…। व्यंग विधा की अपनी गद्य रचनाओं के साथ के पी सक्सेना,शरद जोशी, हरिशंकर परसाईं की परंपरा को शानदार ठंग से आगे बढ़ा रहे संपत सरल ने अपनी पहचान के अनुरूप तीख़े तेवर के साथ अपनी रचनाएं सुनाईं।प्रयाग से आए कवि अख़लेश चंद्र द्विवेदी ने अपनी ताली के ख़ास अँदाज़ के साथ रचनाएं पेश कर लोगों को लोटपोट कर दिया । कवयित्री सपना सोनी, हिमांशु बवंडर और प्रियांशु गजेन्द्र ने भी समा बाँधा। कविता की धारा कुछ ऐसी बहती रही कि लोग कड़क ठंड में भी ख़ुले आसमान के नीचे अपनी ज़गह पर ज़मे रहे। रात आगे बढ़ती रही और माहौल बनता गया । इस सुहानी शाम ने हंसी और मुस्कान की ऐसी सौगात दी कि लोगों के बीच चाय परोसते- परोसते फेरी वाले भी अपनी हँसी नहीं रोक पा रहे थे और मीठी चाय के साथ उनकी हंसी की मिठास भी सर्द हवा में घुल रही थी। ख़ास बात यह भी नज़र आई कि पुरानी पीढ़ी के साथ किशोर- नौज़वान और महिलाओं ने भी इस आयोजन में अपनी हिस्सेदारी निभाई ।इस हास्य महोत्सव की लहरों  में बिलासपुर शहर के साथ ही इलाक़े के दूसरे स्थानों से भी लोग गोता लगाने पहुंचे थे। जिनमें तखतपुर के अधिवक्ता अशोक ठाकुर भी अपनी मित्र मंडली के साथ दिखाई दिए। मंच तो कवियों का था ही और उन्होने अपनी – अपनी पहचान से मेल ख़ाती हुई रचनाएं तो सुनाई हीं। रह-रहकर गूँज़ रही तालियों की गड़गड़ाहट बता रही थी कि लोगों ने उन्हे कितना पसंद किया है। लेकिन मंच के साथ ही बिलासपुरिया दर्शकों ने भी पुरानी पहचान के साथ अपनी छाप छोड़ी। साठ-सत्तर- अस्सी के दशक में कवि सम्मेलनों के आयोजन में गवाह बने लोगों को इससे तशल्ली मिल सकती है। ख़ासकर आज़ के समय में जब लोग यूट्यूब पर सब कुछ देख लेने के बाद किसी ऐसे सामूहिक आयोजन का हिस्सा बनने में गुरेज़ करते हों, तब कवि सम्मेलन सुनने के लिए पुलिस मैदान मे ज़ुटी भीड़ को देखकर कवि- कविता और मंच के प्रति लोगों के रुझान का जीता – जागता सब़ूत इकट्ठा किया जा सकता है।जो यह मैसेज़ भी देता है कि अगर आज़ भी ऐसे आयोज़न होंगे तो बिलासपुर के लोग ख़ुद भी हिस्सेदारी निभाने से पीछे नहीं रहेंगे। यानी यह सब होते रहना चाहिए।

बहरहाल ऐसे सफ़ल आयोज़न के लिए श्रेय का बड़ा हिस्सा कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ पर्य़टन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव के ख़ाते में ही ज़मा ( डिपॉज़िट) हुआ है। ज़िनकी अगुवाई में शहीद विनोद चौबे चेरिटेबल ट्रस्ट की टीम ने यह आयोजन किया । विनोद चौबे जी की शहादत को नमन् करते हुए सभी ने उन्हे याद किया । कार्यक्रम में संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशिष सिंह,विधायक धरमजीत सिंह, महापौर रामशरण यादव, क्रेडाई के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव,सभापति शेख नज़रुद्दीन,अरपा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभयनारायण राय, सदस्य महेश दुब़े , बबला खान,अरविंद शुक्ला, तैय्यब हुसैन सहित बड़ी तादात में लोग शामिल हुए । ….. और सभी अपने – अपने हिस्से की  मुस्कान लेकर लौटे…।

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