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दो समुदायों को जनजाति का दर्जा देने वाला विधेयक लोस में पारित

नयी दिल्ली- कर्नाटक की काडूकुरबा और बेटाकुरबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश 1950 में संशोधन करने वाला संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (चौथे संशोधन) विधेयक 2022 आज लोकसभा में पारित हो गया।जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा ने सदन में विधेयक पर करीब दो घंटे चली चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि अलग अलग राज्यों के लिए अलग अलग समुदायों को अनुसूचित जन जाति में जोड़ने के लिए सरकार पृथक पृथक विधेयक ला रही है ताकि अलग अलग राज्यों में इसे क्रियान्वित करने में आसानी हो। बाद में सभी समुदायों की राष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र सूची तैयार की जाएगी।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आदिवासी समुदाय के छात्रों के हितों पर विशेष ध्यान दे रही है। उनके लिए जो प्रीमैट्रिक छात्रवृत्ति है उसके लिए सरकार ने आठ हजार करोड रुपए का प्रावधान किया है जबकि 2014 में यह महज चार हजार करोड़ रुपये हुआ करता था।

मुंडा ने कहा कि आदिवासियों को सीधा उनका लाभ दिया जा रहा है और इसमें कहीं भी वोटबैंक की राजनीति नहीं हो रही है। मोदी सरकार आदिवासियों के हितों के लिए बराबर काम कर रही है और उनके सामने जो भी चुनौतियां होती हैं उनके समाधान का सरकारी स्तर पर प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में विकास की गतिविधियों को बढाया जा रहा है। सरकार परसमुदाय की सूची बढाने और उस हिसाब से बजट आवंटन नहीं होने और बजट को कम करने संबंधी आरोप पर उन्होंने कहा कि आदिवासियों के कल्याण के लिए मोदी सरकार आने के बाद बजट में करीब पांच गुना बढोतरी हुई है। उनका कहना था कि जहां 2014 में 19 हजार करोड का प्रावधान आदिवासी समुदायों के विकास के लिए होता था वह बढकर अब 87 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है।

उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों का हितैषी नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जब एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के लिए उम्मीदवार बनाई गई तो कांग्रेस ने उसका विरोध किया और उन्हें टक्कर दी। यदि कांग्रेस चाहती तो अपने उम्मीदवार को बिठा सकती थी।

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