पेंशनरों की आर्थिक एवं सामाजिक दुर्दशा के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जिम्मेदार- नामदेव , धारा 49 को हटाने तथा सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल को रायपुर लाने की जरूरत

बिलासपुर । राज्य के पेंशनरों की समस्याओं को लेकर गठित छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने प्रधानमंत्री कार्यालय , मुख्यमंत्री मंत्री कार्यालय मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को ट्यूट कर छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश के बीच 20 वर्षो से लंबित पेंशनरी दायित्वों का विभाजन करने तथा सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग केन्द्र की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य में करने की मांग की है।               

उन्होंने पेंशनरों की आर्थिक एवं सामाजिक दुर्दशा के लिये सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ निर्माण के 20 वर्षो बाद भी मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के विलोपित नही होने से दोनो राज्यो के पेंशनरी दायित्व का बंटवारा अब तक नही हुआ है।जिससे पेंशनरों को मिलनेवाली आर्थिक मामले मध्यप्रदेश के सहमति के बिना लटकी हुई है। चाहे महंगाई राहत का मामला हो या पाँचवे, छठवें और सातवें वेतनमानों का एरियर हो ये सब दोनो राज्यों के आपसी सहमति नही होने भुगतान नही हो रहा है। इसी तरह पेंशनरों प्रकरण पीपीओ जारी होने के बाद अंतिम जांच के सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल स्टेट बैंक गोविंदपुरा भोपाल शाखा को भेजा जाता है । जहाँ दोनो राज्यों के प्रकरणों की अधिकता होने के कारण कई महीनों के लम्बी प्रक्रिया के बाद जांच पूरी होती है और पेंशन नही मिलने बिलम्ब होने से पेन्शनर आर्थिक और सामाजिक शोषण के शिकार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनो की बेरुखी है, क्योंकि जब भाजपा की सरकार रही उन्हें बार बार अवगत कराने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया।अब लगभग ढाई साल से राज्य में सत्ता में काबिज कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री और जिम्मेदार अधिकारियों से लगातार चर्चा, ज्ञापन और धरना,प्रदर्शन आदि के माध्यम अवगत कराने बाद भी 20 वर्ष की स्थिति जस के तस बनी हुई है।  

जारी सँयुक्त विज्ञप्ति में पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव,छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा, एशोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान तथा भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ के प्रांताध्यक्ष जे पी मिश्रा आदि ने बताया है कि धारा 49 को हटाकर पेंशनरी दायित्व का बंटवारा आपस मे नही होने से पुनर्गठन अधिनियम के तहत 74 प्रतिशत राशि का भुगतान मध्यप्रदेश सरकार को और 26 प्रतिशत राशि का भुगतान छत्तीसगढ़ सरकार को करना होता है। मध्यप्रदेश के 06 लाख और छत्तीसगढ़ के 01.25 लाख पेंशनरों इसतरह लगभग 07.25 लाख से अधिक पेंशनर और परिवारिक पेंशनर्स इसके हितग्राही हैं परन्तु इसके लिये लिए दोनो राज्य सरकारों में आपसी सहमति नही होने पर कोई भी भुगतान करना सम्भव ही नही हैं।
छत्तीसगढ़ में सीपीपीसी की स्थापना की जरूरत  

इसी तरह सेन्ट्रल पेंशन प्रॉसेसिंग सेल का मामला भी छत्तीसगढ़ के पेंशनरो के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है। सीपीपीसी के स्टेट बैंक गोविदपुरा भोपाल में दोनो ही राज्य के पेंशन प्रकरणों का अंतिम निराकरण करने का काम भी मध्यप्रदेश में होता हैं और एक ही शाखा में दोनो राज्यों के काम निपटाने में अनावश्यक देरी होना स्वाभाविक है,इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य में पृथक सेल की स्थापना की बहुत जरूरत है।

छत्तीसगढ़ में सीपीपीसी की स्थापना हल्ला गलत निकला

हाल ही छत्तीसगढ़ में बैरनबाजार रायपुर स्थित स्टेट बैंक के रीजनल कार्यालय में सीपीपीसी शाखा खुलने का खूब शोर मचाया गया जो गलत साबित हो गया है। केवल दो नोडल आफिसर नियुक्त कर उनके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पेंशनरो के विवाद को सुलझाने में मदद करेंगे जो वे नहीं कर रहे है। उनका कहना है जब तक पूर्ण सीपीपीसी की स्थापना छत्तीसगढ़ में नही होगा छत्तीसगढ़ के प्रकरण भोपाल में ही निराकृत होते रहेंगे

छत्तीसगढ़ के सभी 90 विधायकों को ज्ञापन देंगे   

 मध्यप्रदेश राज्यपुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 को हटाने और सीपीपीसी की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य में करने के लिये सभी 90 विधायकों को विधानसभा में मुद्दे पर चर्चा कराने हेतु 2 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन देकर मुद्दे को सुलझाने में सहयोग का आग्रह करेंगे।

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