बजटःकांग्रेस नेता का दावा..भाजपा ने खत्म किया ..सीएम ने दिया कर्मचारियों को अधिकार..शैलू का सवाल..बताएं कब मिलेगा मातृभाषा का अधिकार

बिलासपुर— मुख्यमंत्री ने चौथी बार बुधवार को प्रदेश का आम बजट पेश किया। कांग्रेस नेताओं की माने तो माटी पुत्र ने एक बार फिर जनता से किए गए वादों को निभाया है। हमेशा की तरह सीएम ने अलग अंदाज में ना केवल बजट पेश किया। खासकर बजट में युवा, किसान और कर्मचारियों को जमकर प्यार दिया है। कांग्रेस नेता अरविन्द शुक्ला नेब ताया कि शानदार बजट पेश कर प्रदेश के मुखिया ने कर्मचारियों को पूरे 22 साल बाद अधिकार लौटाया है। ऐसा कर उन्होने भाजपा की गलतियों को सुधारा है। बल्कि लाखों कर्मचारियों को बुढ़ावा का सहारा भी दिया है। दूसरी तरफ बजट पर छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना ने तीखा बयान दिया है। शैलू ने कहा कि अब मातृभाषा के लिए सड़क पर उतर कर जंग करना पड़ेगा। 
 
                                       ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने बजट को सर्वहितकारी बताया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि बजट में सबका ध्यान रखा गया है। कर्मचारियों के प्रति जो गलती भाजपा सरकार ने 17 साल पहले किया था। भूपेश सरकार ने अपने चौथे बजट में सुधार करते हुए लाखों कर्मचारियों को बुढ़ापे में सेवा का तोहफा दिया है। बजट में पेंशन के एलान से कर्मचारियों में जश्न का माहौल है।
 
       बजट में विद्यार्थियों और युवाओं को विशेष तरजीह दी गयी है। पीएससी और व्यापम परीक्षाओं में आवेदन भरते समय मूल निवासियों से शुल्का नहीं लिया जाएगा। 32 नए स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल खोले जाएंगे। यह एलान मील का पत्थर साबिल होगा।
 
अब महाआंदोलन की तैयारी
 
                   वहीं छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के जिला संयोजक ठाकुर शैलू ने बहकाने वाला बताया है। अपनी प्रतिक्रिया ने शैलू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए मुख्यमंत्री को मातृभाषा के लिए कुछ कहना जरूरी था। छत्तीसगढ़ को राज्य बने 21 साल हो गए हैं। छत्तीसगढ़ी राजभाषा का गठन 14 साल पहले हुआ। फिर भी छत्तीसगढ़ी को काम काज की भाषा नहीं बनाया गया है। अब हम और बर्दास्त नही करेंगे। सरकार जल्द हमारी मांगो पर विचार नही करती है तो महाआंदोलन करेंगे।  यद्यपि सरकार से बहुत आशा है। बावजूद इसके 3 बजट मे निराशा ही हाथ लगी है ।
 
                छत्तीसगढ़ को छोड़कर हर राज्य के सरकारों में अपनी भाषा के प्रति प्रेम है। रोजगार कामकाज की भाषा बनाया गया है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार  में इसका नितांत अभाव है।

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