एक मुलाकात Archive

भयावह होगी बिलासपुर की हालत—आनंद

बिलासपुर—(भास्कर मिश्र) कम से कम मेरे ज़हन में इस प्रकार की विकास की परिकल्पना बिलासपुर के लिए नहीं थी। मेरा बचपन अनगढ़े कस्बाई संस्कृति वाले बिलासपुर शहर में बीता। तब बिलासपुर बहुत मीठा था। लोग स्वार्थी नहीं थे। एक-दूसरे के दुख सुख की परिभाषा समझते थे। समय के साथ बाजारवादी नेतृत्व ने बिलासपुर को खिचड़ी

समग्र भारत का अहसास कराता है बिलासपुर— डॉ.भूरे

बिलासपुर—(भास्कर मिश्र)–बिलासपुर विविधताओं से भरा जिला है। मुझे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिला है। बिलासपुर को मिनी छत्तीसगढ़ कहें तो ज्यादा ठीक होगा। नक्शा भी कुछ छत्तीसगढ़ जैसा ही है। बिलासपुर मानव विविधता में कुछ हिन्दुस्तान जैसा है। यहां छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि भारत का समग्र दर्शन होता है।

विकास की दौड़ में पीछे छूटा अपनापन-एस.पी.

बिलासपुर— आईएफएस सत्यप्रकाश मसीह देश का ऐसा…चेहरा जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पावर लिफ्टिंग का बेताज बादशाह कहा जाता है। कम लोगों को मालूम है कि सरल, सहज स्वभाव के सत्यप्रकाश ने कई बार एशियन और कामनवेल्थ पावर लिफ्टिंग खेल में ना केवल देश का नेतृत्व किया बल्कि सोने और चांदी का बरसात भी किया। खेल

समस्याएं नहीं रोक सकती विकास का रथ–रानू

बिलासपुर– ( भास्कर मिश्र )   -कमिश्नर रानू साहू कहती हैं कि प्रसिद्ध पश्चिमी चिंतक हीकल का मानना है कि कमी की चेतना सभी इंसान में होती है। जिस इंसान में कमी की चेतना नहीं होती उसके विकास में ठहराव आ जाता है। कमी की चेतना विकास का मार्ग देता है। बेहतर करने का रास्ता

हर एक युवा को रोजगार  देने की कुंजी है उच्च शिक्षा के पास-शैलेष

                   छत्तीसगढ़ तेजी से तरक्की की ओर बढ़ता हुआ राज्य है। जहां चारों तरफ तरक्की की संभावनाए हैं। लेकिन इस तरक्की में स्थानीय लोगों की भी हिस्सेदारी हो इसके लिए जरूरी है कि हम नई पीढ़ी को कुछ इस तरह से कुशल बनाएं कि हर एक क्षेत्र

आने वाला समय बिलासपुर का…

 (भास्कर मिश्र)- बिलासपुर बहुत सुन्दर शहर है..सुन्दरता यहां के लोगों के जन्मजात स्वभाव के कारण हासिल हुई है। यहां के छात्र बहुत ऊर्जावान हैं..इनकी ऊर्जा का उपयोग अभी तक समुचित तरीके से नहीं हुआ है। लेकिन धीरे-धीरे होगा। बिलासपुर न्यायधानी का दर्जा रखता है..यहां की धरती रत्नगर्भा है..उससे कहीं ज्यादा यहां के लोगों का आचार-व्यवहार प्रभावित

अंतःसलिला अरपा के तट पर विदेशी सीखते हैं संस्कृत

(भास्कर मिश्र)बेकार का प्रश्न है कि बिलासपुर में पाणिनी व्याकरण और शोध संस्थान की उपयोगिता क्या है। फिर प्रश्न होगा कि महानगरों के लोग पाणिनी और संस्कृत को क्यों पढ़ें। शायद फिर एक प्रश्न और भी खड़ा हो जाएगा कि अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पैनिश, पुर्तगीज, हिब्रू, अरबी और अन्य भाषा भाषी देश संस्कृत को क्यों पढ़े।

कम नहीं था जो पृथ्वीराज कपूर को मिला ……..

(रुद्र अवस्थी) थियेटर, रंगमंच और हिन्दी के जाने-माने कवियों की रचनाओँ को लयबद्ध करने में अपना जीवन समर्पित कर घर – बार …सब कुछ छोड़ देने के बाद भी मनीष दत्त अकेले नहीं हैं…….। उनका रचना कर्म करीब दो हजार साहित्यिक गीतों के रूप में आज भी उनके साथ है……। यह प्यारा शहर उनके साथ है

पुलिस के सीने में भी है दिल…..

  (भास्कर मिश्र)बिलासपुर—- जब पता चला कि मै बिलासपुर का पुलिस कप्तान बनकर आने वाला हूं। बहुत खुशी हुई। उस खुशी को बयान करने के लिए मेरे पास अभी शब्द नहीं हैं। पास आउट होने के बाद मै प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में पहली बार बिलासपुर ही आया था। इस शहर से मेरा बहुत गहरा

नई पीढ़ी के लिए कैसा बिलासपुर बना रहे हैं हम ….?

नई पीढ़ी के लिए कैसा बिलासपुर बना रहे हैं हम ….?बिलासपुर शहर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहाँ जो भी आता है, उसे यह शहर स्वीकार कर लेता है…। बिलासपुर के लोग सहज, सरल और मिलनसार हॆ….। शहर शांतिप्रिय और अमनचैन पसंद है…। लेकिन शहर और आगे बढ़े इसके लिए जो आक्रोश होना चाहिए

‘ बदला नहीं – बिगड़ गया ‘ मेरा बिलासपुर…

 ‘ बदला नहीं –  बिगड़ गया ‘ मेरा बिलासपुर… गरीबों के लिए इस शहर में जगह नहीं है। बचपन में मैने ऐसे बिलासपुर की कल्पना नहीं की थी। जैसा की अब है। 1947 में जन्में साहित्यकार द्वारिका प्रसाद अग्रवाल कहते हैं महानगर बनने के साथ ही मेरा बिलासपुर बहुत पीछे छूट गया। महानगर बिलासपुर में