सहायक शिक्षक फेडरेशन का हल्लाबोल, सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर दिया धरना, 13 को विधानसभा घेराव, फ़िर बेमुद्दत हड़ताल की चेतावनी

बिलासपुर(मनीष जायसवाल)छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने प्रदेश के सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति को लेकर शानिवार को छत्तीसगढ़ के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोल शुरू कर दिया है । जो रविवार को भी प्रदेश के लगभग सभी ब्लॉक मुख्यालयो में चलता रहा है। इसके बाद कल 13 तारीख से रायपुर में विधानसभा घेराव और अनिश्चित कालीन आंदोलन शुरू होगा। जहां सहायक शिक्षक अपनी एकता अपनी ताकत का लोकतांत्रिक तरीके से शक्ति प्रदर्शन करेंगे। जिससे राजधानी रायपुर की हवा बात रही है कि शिक्षकों के हल्ला बोल की गूंज विधानसभा के शीत सत्र के मौसम के मिजाज को बदल सकती है।

तीन महीने का वादा टूटा

आंदोलन और सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति पर फेडरेशन के संचालक मंडल का कहना है कि छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने प्रदेश के 109000 सहायक शिक्षक संवर्ग के वेतन विसंगति दूर करने के लिये 4 सितम्बर को तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर तीन महीने के भीतर निराकरण करने का वादा किया था लेकिन तीन महीने का समय गुजर जाने के बाद भी सहायक शिक्षक संवर्ग के वेतन विसंगति दूर नहीं किया जा सका हैं। जिसके कारण हर महीने सभी सहायक शिक्षक संवर्ग को दस हजार रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर आंदोलन वापिस लिया

फेडरेशन के नेताओं ने बताया कि हमने 4 सितंबर के राजधानी रायपुर के प्रदेश स्तरीय आंदोलन के ठीक 1 दिन पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अनुरोध पर आंदोलन स्थगित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी उसी के आधार पर हम सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति के मामले को सुलझा देंगे लेकिन ऐसा हो न सका इस बार हम अपने हक के लिए आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए 13 दिसंबर को राजधानी रायपुर कुच करने वाले हैं।

11 दिसम्बर से नई उम्मीद

शिक्षक नेताओं का कहना है कि हम को नहीं पता कि हम को पेंशन मिलेगी या नहीं मिलेगी हमें यह भी नहीं पता है कि हम इतनी कम तनख्वाह में अपना खुद का घर कभी बना पाएंगे हमको यह भी नहीं पता है कि हम कब तक अपने और अपने परिवार की आर्थिक इच्छाओं टालते रहेंगे लेकिन हमें यह पता है 11 दिसंबर से शुरू हुई यह सरकार से आर पार की लड़ाई हमारे जीवन की आर्थिक तंगी ओं को हमारे हक को दिलाने वाले साबित होगी इसलिए हम तन मन धन से धरना आंदोलन के महासंग्राम में कूद पड़े अब परिणाम जो भी हो हम अपना हक सरकार से लेकर रहेगे।

सोशल मीडिया एक्टिव हुआ

प्रदेश भर के सोशल मीडिया उससे मिली तस्वीरें और वीडियो बयां कर रहे हैं कि सहायक शिक्षकों का आक्रोश कितना है।मुख्यमंत्री के लाइव कार्यक्रमों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी शिक्षक छाए हुए है। शिक्षको से सम्बंधित प्रदेश भर के सोशल मीडिया प्लेटफार्म वेतन विसंगति, वादा खिलाफी , प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना, क्रमोन्नति समय मान वेतनमान जैसे नारे पटे हुए है।

प्राथमिक शालाओं में तालाबंदी

मिली जानकारी के मुताबिक भारी संख्या में प्रदेश के सभी मुख्यालयों में सहायक शिक्षक इकट्ठा हुए हैं सहायक शिक्षकों के आंदोलन में जाने के फैसले से स्कूल की व्यवस्था बिगड़ गई है । जिसका असर सोमवार को दिखाएं देगा। स्कूल शिक्षा विभाग को मालूम है कि बड़ी संख्या में सहायक शिक्षक हड़ताल पर जा रहे है। जिसकी वजह से सहायक शिक्षक के भरोसे का स्कूल तालाबंदी की स्थिति में है। उसके लिए कोई इंतजाम नही किये गए है शनिवार को ऐसी ही जानकारियां सामने आई है। अब देखना होगा सोमवार को जब राजधानी रायपुर में सहायक शिक्षक स्कूल छोड़ आंदोलन के लिए इकट्ठा होंगे तब स्कूलों की स्थिति क्या होगी और कैसे स्कूलों का संचालन होगा ।

मिला साथ शिक्षक संघो का

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन को छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ का साथ मिल गया है संघ ने सहायक शिक्षकों के हित को देखते हुए अपना आंदोलन स्थगित कर 13 तारीख से फेडरेशन के आंदोलन को समर्थन दे दिया है इसके अलावा कई शिक्षक संघ फेडरेशन के समर्थन में खड़े हुए।

कहानी घूम कर फिर वही

पूर्व की भाजपा सरकार के समय शिक्षाकर्मियों को कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों का भरपूर समर्थन मिलता था। वक्त का पहिया घूमा है सरकार अब कांग्रेसी है । मांगने वाले भी वही है शिक्षाकर्मी है । संविलियन के बावजूद भी समस्याएं वही है । बस दिलासा देने वालो कि कुर्सियां बदल गई है। कहानी धूम कर फिर आ गई है सहायक शिक्षकों का आक्रोश और अनिश्चितकालीन आंदोलन कहां तक जाता है और सहायक शिक्षकों के लिए क्या परिणाम लाता है।

प्रशासन का दबाव और आत्मविश्वास

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक शिक्षकों के इस आंदोलन की वजह से पुलिस और खुफिया तंत्र एक्टिव हो चुका है ब्लॉक से लेकर प्रथम पंक्ति के शिक्षक नेताओं तक सभी दबी जुबान में प्रशासनिक व पुलिसिया दबाव को स्वीकर करते है। लेकिन यह भी कहते है कि शिक्षक संवर्ग के लिए यह सब नया नही है। अब हमें आदत हो गई है। क्योंकि अब तक शिक्षकों ने जो पाया है लड़कर ही पाया वह भी सड़क से संघर्ष के रास्ते ही पाया है। हम पर हुए आत्याचार को न्यायालय ने न्याय दिलवाया है। हमारा यही आत्मविश्वास हमको हर परिस्थिति में खड़ा होना सिखाता है। हक की लड़ाई हर परिस्थितियों में जारी रहेगी।

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