VIDEO-बिलासपुर के किस मुद्दे पर BJP को मिला निशानेबाज़ी का मौक़ा,कांग्रेसियों के आपसी झगड़े में राख़ के ढेर से रह – रह कर उठ रहा धुआँ

(रुद्र अवस्थी)अब यह खबर काफी पुरानी हो चुकी है कि सीएम भूपेश बघेल जब भी दौरे पर आते हैं ,तब – तब बिलासपुर में कोई न कोई झगड़ा खड़ा हो जाता है। और सीएम के वापस जाने के बाद उनके कार्यक्रम -भाषण -घोषणाओं की बजाय कांग्रेस के  झगड़े की खबर मीडिया में सुर्खियां बन जाती हैं। भूपेश बघेल के पिछले दौरे में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। वैसे तो बात आई – गई ख़तम हो चुकी है ।उसके बाद से अब तक  सीएम बिलासपुर नहीं आए हैं। लेकिन सीएम की मौजूदगी में हुए झगड़े की चिंगारी अभी तक पूरी तरह से नहीं बुझी है। और समय – समय पर कोई ना कोई इस चिंगारी में  दो चम्मच घी टपका देता है। जिससे राख के ढेर से भी हल्का-हल्का धुँआ उठता हुआ दिखाई देता है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस संगठन ने बिलासपुर में कांग्रेसियों के इस झगड़े की पूरी जांच कराई और कमेटी की रिपोर्ट पर एक ओहदेदार को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। लेकिन यह मामला फिर सुलग गया , जब प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में बीजेपी के लोगों ने यह मुद्दा उठा दिया। प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति पर बहस के दौरान बीजेपी के लोगों का कहना था कि  कोई भी कॉलर पकड़ लेता है और छत्तीसगढ़ में जब सत्ता पक्ष का विधायक ही सुरक्षित नहीं है तो फिर आम आदमी की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। विपक्ष के लोगों ने इसके पहले थानों में रेट लिस्ट के मुद्दे पर भी चुटकी ली थी। कांग्रेसियों के बीच झगड़े के साथ ही प्रदेश की कानून व्यवस्था के  मुद्दे पर गरमा – गरम बहस हुई और विपक्ष ने वाकआउट भी कर दिया। हालांकि जवाब में यह बात कही जा सकती थी कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और पार्टी ने जांच पड़ताल कर एक पदाधिकारी को हटा भी दिया है। पलटवार के लिए पूर्व मंत्री और बीजेपी के एक संगठन पदाधिकारी के बीच हाल ही में वायरल हुए वीडियो का भी जिक्र हो सकता था। लेकिन मजेदार बात यह भी है कि जिस घटना को लेकर हंगामा मचा उसका ज़वाब भी ढंग से नहीं दिया गया ।लगता है कि हाउस के अंदर एयर कंडीशन की ठंडी हवाओं के साथ उन्हें सहानुभूति की लहर अधिक सुकून  देती रही। साथ ही हेड लाइन मैनेजमेंट के लिए भी एक मसाला मिल गया। जो भी हो कांग्रेस के भीतर की इस लड़ाई में एक पक्ष के साथ खड़े होकर बीजेपी के लोगों को निशानेबाज़ी का मौक़ा भी मिल गया ।अब देखना यह है कि क्या विपक्ष को सत्ता पक्ष के ऐसे झगड़ों की वजह से आगे भी मुद्दे मिलते रहेंगे …. ?

हवाई सुविधाः बिलासपुर के जनसंघर्ष की एक और मिसाल

पिछले गुरुवार को एलाइंस एयर का हवाई जहाज जब बिलासपुर के बिलासा दाई एयरपोर्ट से टेस्ट लैंडिंग कर वापस लौटा तो केंद्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट किया कि –  “ मैंने बिलासपुर के सांसद अरुण साव से एयर कनेक्टिविटी को लेकर चर्चा की। मुझे बहुत खुशी है कि लंबे समय से लंबित मुद्दा अब सुलझ गया है और जल्दी ही उड़ानें जबलपुर और प्रयागराज के माध्यम से बिलासपुर को दिल्ली से जोड़ेंगी…..।” केंद्रीय मंत्री के इस ट्वीट के बाद बिलासपुर में नियमित हवाई सेवा की शुरुआत को लेकर कोई सवाल बाकी नहीं रह गया। लेकिन इसके साथ ही यह जवाब भी सामने आ गया कि बिलासपुर हवाई सेवा की मांग बहुत दिनों से अटकी हुई थी। इसके लिए बिलासपुर शहर के लोगों को लंबा संघर्ष करना पड़ा। आने वाली पीढ़ी बिलासपुर शहर की मौज़ूदा पीढ़ी को इस वजह से भी याद करेगी कि यहां के लोगों ने अपनी सहूलियत और मांगों को लेकर खुद अपनी लंबी लड़ाई लड़ी। इस लड़ाई के दम पर अपने ही वोट से चुने हुए नुमाइंदों को एहसास कराया कि उनकी जिम्मेदारी क्या है…. और शहर की जरूरतें कैसे पूरी हो सकती हैं……? हवाई सेवा के लिए शुरू हुई इस लड़ाई में हासिल हुई जीत के बाद एक बार फिर रेलवे जोन ,हाई कोर्ट, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज जैसी मांगों को लेकर बिलासपुर वासियों की पुरानी लड़ाई की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। इस बीच यह बात भी देखने में आई थी कि बिलासपुर में जन आंदोलन सुप्त सा हो गया था। एक अंतराल के बाद एक बार फिर लोग खड़े हुए। और हवाई सेवा जनसंघर्ष समिति के बैनर तले 275 दिन से अधिक दिनों तक धरना देकर हवाई सेवा की लड़ाई में भी जीत हासिल की।इस लड़ाई में यह ख़ासियत बनी रही कि यह पूरी तरह से गैरराज़नैतिक आंदोलन था और इसमें सैकड़ों की तादात में सामाजिक- व्यावसायिक- युवा-छात्र संगठनों ने अपनी सक्रिय हिस्सेदारी निभाई ।जिससे शांतिपूर्ण ढंग से लड़ाई अपने अंज़ाम तक पहुंच सकी । अब 1 मार्च से बिलासपुर के लोग भी अपने आसमान पर भी रोज़ हवाई जहाज उड़ते हुए देखेंगे। वर्षों पुरानी इस लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए हवाई सेवा जनसंघर्ष समिति की असरदार मोर्चेबंदी – केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ ही सांसद अरुण साव की भूमिका भी याद की जाती रहेगी। लेकिन हवाई सफर की सुविधा हासिल करने के साथ ही इस उपलब्धि का एक संदेश यह भी है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और और कई मोर्चों पर बिलासपुर को उसका हक दिलाने के लिए इस तरह का संघर्ष जारी रखना पड़ेगा।

कांग्रेस भवन का वास्तुदोष सुधारने की कव़ायद

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 15 साल इंतजार करने के बाद सत्ता हासिल हुई है। अपनी इस कामयाबी के बाद कांग्रेस अब अपने दफ्तरों का वास्तुदोष ठीक करने में जुट गई है। पार्टी के लोग मानते हैं कि वास्तु के अनुरूप राजधानी रायपुर में राजीव भवन बनाए जाने के बाद इसका सुफ़ल सत्ता के रूप में सामने आया। लिहाजा प्रदेश भर में कांग्रेस भवनों का वास्तु ठीक करने की पहल की जा रही है। इसी सिलसिले में बिलासपुर में भी नया कांग्रेस भवन बनाने की कवायद चल रही है। इसके लिए पार्टी ने पुराने बस स्टैंड के पास जमीन की तलाश कर ली है। यह जमीन हासिल करने के लिए पार्टी ने आवेदन भी किया है और इश्तहार भी जारी हो गया है। जिस पर कुछ आपत्तियां भी लगाई गई हैं। पार्टी  संगठन के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इन आपत्तियों का निराकरण कर कांग्रेस भवन के लिए जमीन मिल जाएगी । खबर यह भी है कि वास्तु विद की सलाह पर ही कांग्रेस ने इस जमीन का चयन किया है। लेकिन इसी कवायद के बीच यह खबर भी सुर्खियों में रही की कांग्रेस के पूर्व सांसद के पोते ने अपनी ओर से कांग्रेस भवन बनाने के लिए अपनी ओर से एक हज़ार फीट जमीन देने की पेशकश की है ।हालांकि जिस तरह पुराने बस स्टैंड के करीब की जमीन को ही अंतिम मानकर कांग्रेस के लोग तैयारी कर रहे हैं, उससे लगता है कि अब पार्टी किसी नई जमीन पर विचार मंथन नहीं करेगी। लेकिन  कांग्रेस भवन के लिए जमीन दान में देने की पेशकश की तारीफ के साथ ही आपसी चर्चाओं के बीच यह सवाल भी घुमड़ता रहा कि क्या इस एक्सरसाइज़ के ज़रिए कांग्रेस भवन के वास्तुदोष के साथ बाक़ी सभी ज़गह का वास्तु सुधर ज़ाएगा……. ?

यूथ कांग्रेस में फिर नामज़दगी की तैयारी

कांग्रेस की राजनीति में युवक कांग्रेस में पदाधिकारियों के मनोनयन को लेकर बड़े नेताओं के बीच खींचतान पहले भी होती रही है। अक्सर युवा कांग्रेस की बागडोर संभालने वाले चेहरे को देखकर लोग अनुमान लगाते रहे हैं कि  कांग्रेस के बड़े नेताओं में वजन किसका अधिक है। लेकिन कुछ साल पहले राहुल गांधी ने जब पार्टी की कमान संभाली ,तो उन्होंने युवक कांग्रेस में मनोनयन की जगह चुनाव की प्रक्रिया को नए सिरे से स्थापित किया। जिससे ब्लॉक से लेकर जिले और प्रदेश तक संगठन के चुनाव होते रहे। इसके जरिए खासकर छात्र राजनीति में सक्रिय नौजवानों को आगे आने का मौका मिला और यूथ कांग्रेस फिर से खड़ी हो गई। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि युवक कांग्रेस में मनोनयन की प्रक्रिया फिर से अपनाई जाएगी। जिसे देखते हुए दावेदारों की सक्रियता फिर से शुरू हो गई है। प्रदेश युवक कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष कोको पाढ़ीं और देवेंद्र यादव के हाल के बिलासपुर दौरे को इस नजरिए से भी देखा जा रहा है। कोको पाढ़ीं अपने इस पद पर दोबारा आने के लिए स्वाभाविक रूप से जोर लगा रहे हैं। जबकि देवेंद्र यादव की भी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। यूथ कांग्रेस की इस खेमेबंदी और जोर आजमाइश में बिलासपुर एक बार फिर एपिक सेंटर बनता हुआ दिखाई दे रहा है। पहले भी अजीत जोगी के कांग्रेस में रहते हुए यूथ कांग्रेस की राजनीति को लेकर भूपेश बघेल और अजीत जोगी खेमे के बीच बिलासपुर में ही रस्साकशी होती रही है । प्रदेश में कांग्रेस की मौजूदा राजनीति में बड़े नेताओं के बीच खेमे बंदी जाहिर तौर पर नजर आती है। इस बार फिर युवक कांग्रेस में मनोनयन को लेकर यदि प्रदेश के दोनों बड़े खेमों के बीच हार जीत का अनुमान लगाने का मौका मिल जाए तो हैरत की बात नहीं होगी।

सबक लेते भी हैं….. और सबक देते भी हैं…

कानून व्यवस्था की स्थिति कायम रखने में पुलिस की भूमिका अहम होती है। पुलिस से लोग मदद भी करते हैं और समय-समय पर पुलिस को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन बिलासपुर पुलिस को इस बार सम्मानित करने का मौका मिला है। हाल की दो बड़ी घटनाओं में अपराधियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल करने पर शहर की संस्था सबक और स्व. विनोद चौबे चैरिटेबल ट्रस्ट ने पुलिस अफसरों और कर्मियों का सम्मान किया। ग्रीन पार्क कॉलोनी में डकैती और उसलापुर गोली कांड के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर यह सम्मान इन संस्थाओँ की ओर से किया गया। सबक  और स्व. विनोद चौबे चैरिटेबल ट्रस्ट संस्था में शहर के सक्रिय युवा शामिल है। ये संस्थाएँ लगातार अलग-अलग मौकों पर पुलिस की मदद करती रहती है। हाल ही में एक पुलिसकर्मी के परिवार को बच्चे की पढ़ाई के लिए पचीस हज़ार रुपए  भी संस्था की ओर से दिए गए थे। यह संस्था जनसहयोग से अपना काम करती है। कुछ समय पहले बच्चे के अपहरण की घटना से शहर में सनसनी फैल गई थी। पुलिस की तत्परता से बच्चे को सकुशल घर पहुंचाया गया था ।  इससे प्रभावित होकर बच्चे के पिता ने पुलिस को राशि भेंट की थी। उस समय के जिला पुलिस कप्तान अभिषेक मीणा ने यह राशि विनोद चौबे चैरिटेबल ट्रस्ट को सौंप दी थी। इसके बाद कई और स्थानों से सहायता राशि मिली। जिसके जरिए यह संस्था पुलिस कर्मियों को सहयोग करती रहती है। सबक की अगुवाई हाल ही में चर्चित रहे कांग्रेस के एक नेता करते हैं। यही वजह है कि पुलिसकर्मियों के सम्मान के दौरान यह बात भी चर्चा में रही की भाई जान सबक लेते भी हैं और सबक देते भी हैं।।

ऑफलाइन परीक्षा का विरोध

कोरोना की वजह से पिछले करीब 1 साल से स्कूल कॉलेज की पढ़ाई भी प्रभावित रही है। करीब करीब सभी शैक्षणिक संस्थाओं में ऑनलाइन पढ़ाई होती रही। सामान्य दिनों की तरह कक्षाएं नहीं लगी। बच्चे अपने घरों पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करते रहे  । कैलेंडर के हिसाब से अब परीक्षा का समय आ गया है। ऐसे समय में ऑफ लाइन परीक्षा लेने की व्यवस्था का बड़ा विरोध हो रहा है। न्यायधानी में करीब सभी शिक्षण संस्थाओं में छात्र संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं कि परीक्षा ऑनलाइन ही आयोजित की जाए। सीधी सी बात है कि जब पढ़ाई ऑनलाइन हुई है तो परीक्षा भी ऑनलाइन क्यों नहीं ली जा रही है…..? स्कूल – कॉलेज के बच्चों के साथ ही उनके पेरेंट्स भी यह उम्मीद कर रहे हैं कि व्यवस्था के जिम्मेदार लोग इस ओर जरूर सोचेंगे। और हाल के दिनों में जिस तरह फिर से कोरोना बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं उसके मद्देनजर ऑफलाइन परीक्षाएं ही आयोजित की जाएगी।

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