सरकार ने जीता विश्वास मत,CM भूपेश बोले- मैं नहीं, दिल्ली वाले करते हैं बदले की राजनीति

रायपुर। राज्य सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार की देर रात 13 घंटे से भी ज्यादा देर चर्चा और नोकझोंक के बाद ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया। विपक्ष की ओर से भाजपा के साथ साथ जोगी कांग्रेस और बसपा के विधायकों ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर हिस्सा लिया। विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों का सीएम भूपेश बघेल ने आक्रामक ढंग से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे बदले की राजनीति नहीं करते, बल्कि केंद्र सरकार बदले की राजनीति करती है। नेशनल हेराल्ड में मनी लांड्रिंग नहीं हुई। यह सिर्फ बदनाम करने की साजिश है। सेंट्रल एजेंसी सिर्फ परेशान करने का काम करती है। इसलिए हमने कहा था कि मां का दूध पिया है तो ईडी में केस दर्ज है, फिर सीएम मैडम और सीएम सर कौन हैं, इस पर पूछताछ क्यों नहीं करते।

सीएम भूपेश ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक विज्ञापन के 218 करोड़ का भुगतान किया। इसमें से 100 करोड़ रुपए पूर्व सरकार के विज्ञापन की देनदारी थी। कहा गया कि गौधन न्याय योजना में विज्ञापन पर 120 करोड़ रुपए खर्च किए गए जबकि वास्तविकता यह है कि वर्ष 2020-21 में 7.44 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 2.66 करोड़ अर्थात् दोनों वर्षों के व्यय को मिलाकर केवल कुल 10 करोड़ 10 लाख रुपए खर्च किए गए ।

हमारी सरकार गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का स्लोगन लेकर चल रही है। हमने किसानों , राज्य के लोगों का भला करने के लिए कर्ज लिया। हम व्यक्ति को केंद्र में रखकर योजना बना रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सुपोषण को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। दो वर्ष कोरोना के बावजूद शिक्षा, रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराए। हर घर को नल से जल देने की योजना है। हम पहले जल की व्यवस्था कर रहे हैं। नरवा प्रोजेक्ट के जरिए जल संरक्षण कर रहे हैं ताकि सतही जल का उपयोग हो सके ।

हमने हाट बाज़ार क्लीनिक योजना शुरू की और शहर में स्लम स्वास्थ्य योजना बनाई। आज पूरे प्रदेश में आत्मानंद स्कूल की मांग है। मैंने 27 विधानसभा का दौरा किया है। आदिवासी क्षेत्रों में बैंक की मांग है। आम जनता की मांग है बैंक खोलने के लिए, क्योंकि अब लोगों को पैसा मिल रहा है। आदिवासी अंचल की समूह की महिलाएं सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रख रही हैं। काम भी मिल रहा है और सम्मान भी मिल रहा है।

विकास, विश्वास और सुरक्षा का मंत्र लेकर सरकार काम कर रही है। राजनांदगांव से राजहरा, अंतगढ़, नारायणपुर तक सड़के बन रही हैं। नक्सली अब पलायन कर रहे हैं। नक्सली 14 ज़िले में थे। नक्सल समस्या हमको विरासत में मिली थी। आज किसानो के बारे में कह रहे हैं। हमने कहा कि हम किसानों का पूरा धान ख़रीदेंगे, चाहे केंद्र से राशि मिले या न मिले। चावल खरीदे या नहीं खरीदे, हम किसानों से धान समर्थन मूल्य में खरीदेंगे। हमने जो वादा किया वह निभाया है। विपरीत परिस्थितियों के बाद भी रकबा में वृद्धि हुई। किसानों की संख्या में वृद्धि हुई। बड़े-बड़े किसान खेती छोड़ चुके थे, वे खेती की ओर फिर से मुड़ गए हैं। 30 लाख हेक्टेयर का पंजीयन हो रहा है। हमारी कोशिश है कि यहां के किसानों और मज़दूरों के जीवन में बदलाव आए।

सीएम ने कहा कि जब से हमने खेती को लाभकारी बनाया है, रिवर्स मायग्रेशन होने लगा है। आज हमारे गांव बौद्धिक सम्पदा से भरपूर हो रहा है। आज आम जनता अपने मुख्यमंत्री से सीधे बात कर सकती है। हमने छत्तीसगढ़िया का आत्मबल बढ़ाया है। राज्य कि 58 में से 52 कोयला खदानें SECL के पास है। अनियमितता का पता चलते ही हमने कार्यवाही की है। काम करते समय त्रुटि हो सकती है, लेकिन हमारी नीयत में कोई खोट नहीं है। आदिवासी कला व संस्कृति सभी को हम सुरक्षित और संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं।

सरकार पर उनके मंत्री को ही विश्वास नहीं: कौशिक

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सरकार पर आरोपों की बौछार करते हुए कहा कि केवल शराब में छत्तीसगढ़ देश में पहले नंबर है। प्रदेश में जो कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाए उस पर कारवाई हो जाती है। चाहे आम जनता हो या फिर विधायक हो या लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हो। सभी के खिलाफ कारवाई हो रही है। सौ से ज्यादा पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए गए। एक को गिरफ्तार करने तो दिल्ली तक चले गए। छत्तीसगढ़ में अभिव्यक्ति की आजादी लगभग समाप्त हो हो गई है। सरकार पर उनके मंत्री का ही विश्वास नहीं है। आखिर सरकार को दिल्ली परेड करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। कोल वाशरियों पर छापा पड़ा। ये छापा कार्रवाई के लिए नहीं वसूली के लिए डाला गया। हम बापू के रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन कांग्रेस भटक गई है। मॉडल गौठान के दस पांच की सूची भेजने की स्थिति में सरकार नहीं है, जिसे हम जा कर देख सकें। सड़कों की खराब स्थिति के कारण अभी हाईकोर्ट को फटकार लगाना पड़ा है। कौशिक ने कहा कि सरकार बनाने और चलाने के लिए व्यवस्था भी बनाई जाती है। केवल हमारा नहीं जनता का भी विश्वास इस सरकार ने खो दिया है। घोषणा पत्र को देखकर ही जनता वोट देती है। जिन घोषणाओं के बल पर यह सरकार आई है। मुश्किल से आधे-अधूरे घोषणाओं को ये पूरा किए हैं। दुर्भाग्यजनक है कि जो घोषणापत्र बनाए हैं, वे सदन में नहीं है, जो क्रियान्वयन समिति बनी है, उसमें भी वे नहीं हैं। युवा हमारे उपेक्षित हैं। जिस प्रकार से महिलाओं के वोट लिए गए, लेकिन शराब के कारण प्रदेश की क्या स्थिति है, किसी से छुपी नहीं है। जो चार पन्ने के आरोप में तथ्य दिए गए उसे काटने की स्थिति में नहीं हैं। जब सरकार के मंत्री का मुख्यमंत्री में विश्वास नहीं है। यदि विधायक मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, विधायक मंत्री पर हत्या करवाने के आरोप लगाए, विधायक मंत्री पर प्रश्नचिन्ह लगाए तो सरकार में विश्वास कहां है। जब विधायक ही सरकार पर विश्वास नहीं कर रहे हैं तो जनता क्या विश्वास करेगी।

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