हमार छ्त्तीसगढ़

Transfer Policy :स्कूल शिक्षा विभाग में तबादले की हलचल अब ठंडे बस्ते में…..?

Transfer Policy :बिलासपुर ।प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भारी मतों से रायपुर लोक सभा चुनाव जीत गए है। इससे उनकी विधानसभा से विदाई तय है। संभवतः 6 जून को आचार संहिता खत्म होने के बाद 18 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है।अब नए शिक्षा सत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री कोई नया ही होगा..! सुनाई पड़ रहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग में अब तबादले नए स्कूल शिक्षा मंत्री के सलाह से होंगे.. ताकि व्यवस्था में कसावट बनी रहे..।

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कायदे से देखा जाए तो विभाग को नए शिक्षा मंत्री को चलाना है। ऐसी स्थिति में अभी तबादले (Transfer Policy) उचित भी दिखाई नही देते है। प्रदेश में मोदी की गारंटी में सत्ता भाजपा के पास आई है इसलिए इस परिवेश में तबादले प्रदेश भाजपा की नीति और रीति के विपरित लग सकते है..। यही वजह है कि शिक्षा विभाग में तबादले को लेकर नए पूर्णकालिक स्कूल शिक्षा मंत्री के पद भार ग्रहण करने तक तबादले पर खामोशी दिखाई दे सकती है।इससे गुणा भाग करने वालों का गणित बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर भी गर्म था कि पिछली सरकार में हुई नियमित शिक्षक भर्ती में दूर दराज सेवा दे रहे कुछ शिक्षक और इनके नातेदार तबादले के लिए खूब हाथ मार रहे थे। खबरें आई थी कि लंबी चौड़ी लिस्ट बन गई थी। जिसमे बहुत से शिक्षक, विभाग के संयुक्त संचालक, संचालक, कुछ जिला के जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी से लेकर बीआरसीसी तक की जंबो लिस्ट बनी हुई थी। जो अब नए शिक्षा मंत्री के लिए अटका दी गई है..।

चर्चाएं यह भी है कि ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री के समन्वय से तबादले हो सकते है।जिसमे व्यवस्था के संचालन के लिए कई अधिकारियों के नाम भी शामिल हो सकते है। शिक्षको के मामले में समन्वय से तबादले (Transfer Policy) किए जा सकते है।

यदि मानवीय आधार पर गंभीर रूप से बीमार और पीड़ित पच्चीस पचास शिक्षको के तबादले हुए तो अधिक समस्या नहीं आएगी लेकिन यदि शिक्षको के तबादले (transfer policy) थोक के भाव में मुख्यमंत्री के समन्वय से हुए तो फिर एक बार स्कूल शिक्षा विभाग सुर्खियों में आ जाएगा..! सवाल खड़ा होगा कि आखिर समन्वय से शिक्षको के तबादले का आधार क्या है..? शिक्षा मंत्री के हटते ही तबादले क्यों जरूरी हो गए ..? यदि किंतु परंतु करते हुए समन्वय से बड़ी संख्या में तबादले हो गए तब की स्थिति में विपक्ष के लिए आने वाले साढ़े चार साल आरोप लगाने के लिए ये तबादले.. सिस्टम पर गोल पोस्ट का काम करेंगे ..!

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मालूम हो कि विष्णु देव साय सरकार ने अभी तबादला नीति घोषित नहीं की है। अभी प्रचलन में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तबदला नीति चल रही है। इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग में सिर्फ व्यवस्था के संचालन में कुछ तबादले हो सकते है। बाकि शिक्षको के तबादले कैसे और किस आधार पर होंगे।

इस पर मामले में शिक्षक संघ आचार संहिता हटने के बाद जोर शोर से उठा सकता है।शिक्षक संघ का मानना है की तबादले का अधिकार सभी आम शिक्षकों को मिलना चाहिए और यह पारदर्शी भी होना चाहिए..!

                   

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