CGPSC सिविल जज परीक्षा परिणाम घोषित..सभी पदों पर अंग्रेजी माध्यम का कब्जा..हिन्दी के छात्रों में आक्रोश.. वेटिंग लिस्ट में भी नही मिला स्थान

बिलासपुर— राज्य न्यायिक सेवाओं के लिए लोक सेवा आयोग के माध्यम से व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 2 सिविल जज की भर्ती परीक्षा परिणाम का एलान पिछले दिनों किया गया। कुल 39 पदों के लिए सैकड़ों हजारों लोगों ने परीक्षा दी। लेकिन कमोबेश सभी पदों पर अंग्रेजी माध्यम के प्रतियोगी हिन्दी माध्यम पर भारी पड़े हैं। परिणाम प्रसारित होने के बाद मातृ भाषा के प्रतियोगियों में जमकर आक्रोष है।
 
सीजे परीक्षा परिणाम का एलान
 
              राज्य न्यायायिक सेवाओं के लिए कुल 39 पदों पर सफल  प्रतियोगियों के नाम का एलान लोक सेवा आयोगि ने पिछले दिनों कर दिया। टॉप टेन में केवल एक पुरुष प्रत्याशी को स्थान बनाने में सफलता मिली। 22 अक्टूबर को आयोजित मुख्य परीक्षा में चिन्हांकित  427 परीक्षार्थियों में से 127 का चयन साक्षात्कार लिया गया था। इसके पहले 7 मई को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में 20 से ज्यादा उत्तर की गड़बड़ी के कारण परिणाम रद्द कर दिया गया था। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दोबारा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन हुआ था। 
 
सभी पदों पर अंग्रेजी वालों का कब्जा
 
              बहरहाल सिविल जज परीक्षा का अंतिम परिणाम एलान के बाद एक बार फिर परिणाम को लेकर परीक्षार्थियों में आक्रोश सामने आ रही है। सिविल जज परीक्षा में शामिल प्रतियोगियो से बातचीत में पता चला कि सभी 39 पदों पर अंग्रेजी माध्यम के छात्रों का चयन हुआ है। हिंदी माध्यम से लॉ की पढ़ाई करने वाले किसी भी व्यक्ति का चयन सिविल जज के लिए नहीं हुआ है।
 
हिन्दी वाले ठगा महसूस कर रहे
 
             प्रतियोगियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्य में सिविल जज की  महत्वपूर्ण परीक्षा में केवल अंग्रेजी माध्यम के प्रतिभागियों के चयन होने से हिंदी माध्यम के प्रतियोगी छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा के उत्तर में भारी गड़बड़ी के बाद री रिजल्ट निकाला गया। आनन-फानन में कोरोना काल के बावजूद मुख्य परीक्षा अक्टूबर में आयोजित हुआ।  3 से 7 नवम्बर को साक्षात्कार आयोजित किया गया था।
 
वेटिंग लिस्ट में भी अंग्रेजी माध्यम का कब्जा
 
               प्रतियोगियों ने परिणाम को लेकर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि अंतिम चयन सूची आने पर  मालूम हुआ कि सिविल जज परीक्षा के सभी 39 पदों के लिए केवल अंग्रेजी माध्यम के ही प्रतियोगियों का चयन हुआ है। हिंदी माध्यम के किसी भी विद्यार्थी को अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं मिला है। वेटिंग लिस्ट में भी अंग्रेजी माध्यम वाले प्रतियोगियों का बोलबाला है। ऐसा लगता है कि परीक्षा का आयजोन केवल अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए ही  किया गया था।
 
अंग्रेजी माध्यम वालो पर नम्बर की बौछार
 
                       कुछ प्रतियोगी छात्राओं ने पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्य में  सिविल जज मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों को बड़ी दयालुता के साथ नंबर दिए गए हैं। जिसके चलते हिंदी माध्यम के सभी विद्यार्थी चयन प्रक्रिया में बहुत पीछे छूट गए। ऐसे परिणाम महज संयोग है या किसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि छत्तीसगढ़ में हिंदी भाषी लोगों को सिविल जज जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा के अंतिम चयन में मुंह की खानी पड़ी है। सारे पदों पर अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों का चयन हुआ है। 
 
            प्रतियोगियों ने आक्रोष जाहिर करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। कुछ प्रतियोगियों ने बताया कि विधि पेशे से संबंधित अनेक लोगो के नातेदारों को जबरदस्ती जज बना दिया गया है। कड़ी मेहनत बावजूद हिंदी माध्यम वाले खुद को ठगा महसूस कर रहे है। सिविल जज भर्ती के प्रथम चरण के उत्तर में गड़बड़ी से दोबारा परिणाम घोषित किये गए थे।
 
सीजीपीएससी में गड़बड़ी की परिपाटी
 
             सीजीपीएसी धांधली की कवायदे आए दिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसी प्रकार पिछले माह के राज्यसेवा प्राम्भिक परीक्षा 2020 के परिणामों को निरस्त करते हुए पुनः मेरिट जारी करने का फैसला हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दिया। जानकारी हो कि 2003 की पहली पीएससी भर्ती परीक्षा के अंतिम चयन को हाई कोर्ट ने निरस्त किया था। मामले को अब सुप्रीम कोर्ट में स्टे मिला हुआ है ।कई चयनित प्रतियोगी पदोन्नत होकर आईएएस अवार्ड प्राप्त करने वाले हैं। लेकिन न्याय में विलंब की प्रक्रिया से प्रभावितों को राहत मिलेगी..कहना मुश्किल है।  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में लापरवाही , गड़बड़ी नियमानुसार परिपाटी बन गयी है। जिसका परिणाम छत्तीसगढ़ के युवाओं को झेलना पड़ रहा है। बताते चले कि 10 नवम्बर को पुनः 32 पदों के लिये सिविल जज भर्ती परीक्षा 2020 का आयोजन होना है। जबकि विद्यार्थियों को तैयारियो के लिए समय भी नही मिल पाया है।

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