सीएम पर जनता को गुमराह करने का आरोप- कांग्रेस ने भी बांटा था किसानों को बोनसःसाहू

dhanendra sahuरायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने कहा है कि छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री डॅा. रमन सिंह द्वारा कांग्रेस शासन काल में बोनस नही दिए जाने का झुठा आरोप बार-बार लगाया जा रहा है जो कि निंदनीय है। तथा मुख्यमंत्री द्वारा छत्तीसगढ के किसानो को गलत आरोप लगााकर गुमराह किया जा रहा है।

संवाददाताओँ से बतचीत करते हुए उन्होने कहा कि जबकि सच्चाई यह है कि केन्द्र की यु.पी.ए. सरकार ने बिना किसी चुनावी वादा के धान उत्पादक किसानो को वर्ष 2002-03 में 20 रू. प्रति क्विंटल, वर्ष 2005-06 में 50 रू. प्रति क्विटल बोनस वर्ष 2006-07 में 40 रू. प्रति क्विंटल बोनस 2007-08 में 100 रू. प्रति क्विंटल का बोनस तथा 2008-09 से लेकर 2011-12 तक हर साल 50-50/ रू. प्रति क्ंविंटल का बोनस केन्द्र सरकार के यू.पी.ए. सरकार द्वारा किसानो को दिया गया। इसी तरह अपने आप को किसानो का हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार जब केन्द्र में गठबंधन एन.डी.ए. की सरकार थी और जब अटल बिहारी बाजपेयी प्रधान मंत्री थे, तब अपने 6-7 वर्षो के शासन काल में धान का समर्थन मूल्य में मात्र 50 रू. प्रति क्विंटल वृद्धि किये थे। जबकि केन्द्र में कांग्रेस गठबंधन की यू.पी.ए. सरकार के प्रधान मंत्री  ने अपने 10 वर्षो के शासन काल में धान समर्थन मूल्य में लगभग 800 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के कार्य काल में प्रारंभ में धान की जो मूल्य कामन धान 540 रू. प्रति क्विंटल और धान पतला 590 रू. प्रति क्विंटल था जिसे प्रति वर्ष संमर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करते हुए उन्होने 2013-14 में 10 वर्ष की शासन काल में धान कामन 1310रू. प्रति क्ंिवटल और धान पतला 1345 रू. प्रति क्विंटल तक पहुंचाये। इस तरह डॅा. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा धान के समर्थन मूल्य में काफी बड़ी बढ़ोतरी करके किसानो की माली हालत में सुधार लाया गया। वर्ष 2014 के लोक सभा के चुनाव में निर्वाचित प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2014 से लेकर 2017-18 तक के लिए जो घोषित किया जिसमें 4 साल में मात्र 240 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि की, धान का समर्थन मूल्य निर्धारित किये जाने में ही यह साबित होता है कि भाजपा ने 10 वर्षो में कुल 300 रू. की ही वृद्धि की है। जबकि कांग्रेस की सरकार ने 10 वर्षो में 800 रू. से अधिक प्रति क्विंटल की वृद्धि की है।
श्री साहू ने कहा कि इसी तरह बैंको में किसानो को दिये जा रहे अल्प कालिन ऋण में शुन्य प्रतिशत ब्याज दिये जाने का ढ़िढोरा पिटते हुए पूरा का पूरा श्रेय भाजपा के मुख्यमंत्री डॅा. रमन सिंह द्वारा स्वंय ही लिया जा रहा है। जबकि वास्तविक्ता यह है कि यू.पी.ए. सरकार के प्रधान मंत्री डॅा. मनमोहन सिंह  ने ही 14.5 प्रतिशत लगने वाली ब्याज को 9 प्रतिशत किया तथा बाद में इसे और भी कम करते हुए 7 प्रतिशत और अंन्त में 6 माह के पूर्व ऋण चुकता करने वाले किसानो को मात्र 4 प्रतिशत में ही ऋण दिया जा रहा है। केन्द्र शासन द्वारा एवं राज्य शासन द्वारा केन्द्रिय सहकारी बैंको को कृषि कार्यो के लिए दी जाने वाली ऋण पर ब्याज एवं सबसिडी के रूप में 5 प्रतिशत की राशि हर वर्ष दी जाती रही है। तथा राज्य शासन द्वारा नाबार्ड से सस्ते ब्याज में मात्र 4.5 प्रतिशत ब्याज दर पर राशि लेकर सहकारी बैंको को उपलब्ध कराती है। राज्य शासन द्वारा किसानो को दिये जा रहे फसल ऋण में कोई भी साहयता नही दी जा रही है। लेकिन किसानो को केन्द्र शासन एवं नाबार्ड द्वारा दी जा रही ब्याज अनुदान एवं सहायता की राशि दिये जाने की जानकारी को जनता से छिपाकर झुठा वाह वाही लेने में लगी है।
मुख्य मंत्री द्वारा कांग्रेस शासन पर एक भी पैसा बोनस नही दिये जाने की झुठी गलत ब्यान बाजी करना शोभा नही देता। छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस द्वारा चुनाव वर्ष 2008 में 250 रू. बोनस देने की घोषणा पत्र में वादा किया गया था। तथा 2013 के चुनाव में कुल 2000 रू. प्रति क्विंटल में धान खरीदी करने का वादा किया था। छत्तीसगढ़ राज्य में किसाानो को आर्थिक रूप से सुदृ्ढ़ बनाने के सोच के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी ने किया था। लेकिन भाजपा ने सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस की घोषणा पत्र का नकल करते हुए 2008 में बोनस 270 रू. प्रति क्विंटल और 2013 के चुनाव में 300 रू. प्रति क्विंटल बोनस और 2100 रू. प्रति क्विंटल समर्थन मुल्य देने का वादा किया। लेकिन सिर्फ चुनावी वर्ष में आधा अधुरा बोनस देकर किसानो के साथ धोखा धड़ी किया है, जिसका बदला चुनाव में प्रदेश के किसान लोग भाजपा को निस्तेनाबुद कर देगी।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि  मुख्य मंत्री डॅा. रमन सिंह द्वारा बार-बार अनेक सभाओं में यह वक्तव्य दिया जा रहा है कि बोनस दिये जाने से कांग्रेसीयो के पास अब कोई मुद्दा नही बचा है। तथा चेहरा फ्यूज बल्ब की तरह हो गया है। मैं उन्हे कहना चाहता हूॅं कि 5 वर्ष के बदले मात्र दो वर्ष को बोनस देने का निर्णय लेना 2100 समर्थन मूल्य नही दिया जाना किसानो को मुफ्त बिजली देने के बदले भारी भरकम विद्युत बिल वसुली किया जाना एक-एक दाना धान खरीदी किये जाने के बजाय सिर्फ आधा धान की ही खरीदी किया जाना। प्रदेश के कुल 37.50 लाख किसानो में से सिर्फ 13 लाख किसाानो को बोनस देकर शेष 24.50 लाख किसानो को बोनस नही देना कुल उत्पादित 130 लाख मी. टन धान का बोनस नही देकर सिर्फ 70 लाख मी.टन से कम धान का ही बोनस देना आदि ऐसे बडे़-बडे़ मुद्दे हैं जिसे लेकर कांग्र्रेस किसानो के पास जायेगी। किसानो को मात्र दो वर्ष का ही बोनस देने के निर्णय लेकर किसानो से अभी से चुनावी प्रचार करते हुए स्वंय मुख्य मंत्री  द्वारा किसानो से बोनस के बदले बटन दबाने की मांग करना ही यह साबित करता है कि मुख्य मंत्री को यह विश्वास हो गया है कि किसान सरकार से अभी भी काफी नाराज है। आधा-अधुरा बोनस देने से प्रदेश का कोई भी किसान खुश नहीं है।  सरकार एक तरफ‘‘ बोनस तिहार‘‘ मना रही है, वहीं राज्य के किसान अभी भी रोज आत्महत्या कर रहे है। आने वाले चूनाव में राज्य की जनता ऐसे भ्रष्ट एवं किसान विरोधी सरकार की बल्ब पूरी तरह फ्यूज करेगी। यदि इस सरकार में जरा भी नैतिक्ता बची है तो घोषणा पत्र में किसानो से किये गये सभी वादो को पूरा करे। वरना जनता प्रदेश की भाजपा सरकार को कभी माफ नही करेंगी ।

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