“द टीचर एप” से बेहतर शिक्षा में मिलेगी मदद

Mobile_aadhar.pngरायपुर।छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के बेहतर प्रदर्शन के लिए ‘द टीचर एप्प‘ नाम से एक नवीनतम एप बनाया गया है। यह एप्प विभिन्न ऑन लाइन पाठ्यक्रमों में पंजीयन के लिए बहुत बड़ी संख्या में शिक्षकों से प्राप्त हो रहे आवेदनों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।‘द टीचर एप्प‘ राज्य के शिक्षकों के लिए निःशुल्क है और शिक्षक कुछ प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कार भी जीत सकते है। शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा इस महत्वपूर्ण एप्प का शुभारंभ किया गया है। ‘द टीचर एप्प‘ का निर्माण दिल्ली के एक गैर सरकारी संस्था द्वारा बनाया गया है। इस एप्प के माध्यम से इस प्रकार लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

                              विभिन्न विषयों एवं अवधारणाओं की समझ बनाने बहुत सारे दिलचस्प कोर्सेस कर सकते हैं। कोई भी कोर्स लगभग एक घंटे में अपने फोन पर पूरा कर सकते हैं। इन्हें डाउनलोड कर ऑफलाइन मोड में बिना इंटरनेट के भी देख सकते हैं और पूरा होने पर डिलीट कर अपने मोबाइल के जगह को खाली कर सकते हैं।

                          इसमें शिक्षा से जुड़े विभिन्न सम-सामयिक मुददों पर चैट-शाला कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के विचार सुन सकते हैं और क्रिटिकल थिंकिंग का विकास कर सकते हैं। टीचर टूलकिट में कक्षा के लिए उपयोगी वीडियो एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस एप्प के माध्यम से राज्य के लगभग सौ सक्रिय शिक्षकों को चुना जाएगा जिनकी कहानी तैयार कर ह्यूमन्स आफ इंडिया स्कूल्स नामक ब्लॉग में प्रकाशित की जाएगी।

                          ये कहानियां देश भर के शिक्षकों के लिए प्रेरणा के स्रोत बनेंगी। एप्प में शिक्षकों को एक सामग्री निर्माण प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता में जिस शिक्षक के विचार या सामग्री सबसे श्रेष्ठ या लोकप्रिय होगी अर्थात जिन्हें सबसे अधिक वोट या लाइक मिलेंगे, उन्हें उपहार स्वरूप एक स्मार्ट फोन भेंट में दिया जाएगा। इस एप्प से अपनी क्षमता विकास का यह मौका देश में सबसे पहले छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। इस एप्प में अधिक से अधिक शिक्षक, शिक्षक प्रशिक्षक, प्रशिक्षार्थी सभी जुड़कर इस सुविधा का लाभ लेकर अपनी कक्षा अध्यापन को और बेहतर कर सकेंगे।

Comments

  1. By Shambhu ratna verma

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  2. By dinesh kumar dhruw

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