टूटेगा सिटी सेन्टर..? निगम का कोर्ट में जवाब..शर्तों की हुई अनदेखी..संचालकों ने किया अवैध निर्माण

बिलासपुर— नगर निगम जिला न्यायालय और हाईकोर्ट को बताया कि सिटी सेन्टर व्यवसायिक काम्पलेक्स का निर्माण अनुज्ञा के खिलाफ हुआ है। निगम ने अतिरिक्त निर्माण तोड़ने का आदेश भी दिया था। इस दौरान कोर्ट के निर्देश पर राजीनामा का प्रयास किया गया। लेकिन तकनीकि कारणों से राजीनामा मुश्किल है। कोर्ट से सिटी सेन्टर के खिलाफ जो भी आदेश मिलेगा निगम प्रशासन पालन करेगा।

                              निगम प्रशासन ने सिटी सेन्टर विवाद मामले में हाईकोर्ट और जिला न्यायालय में लिखित जवाब पेश किया है। निगम के अनुसार सिटी सेन्टर व्यावसायिक काम्पलेक्स अनुज्ञा के खिलाफ अतिरिक्त जमीन में बनाया गया है। राजीनामा नहीं होने की सूरत में निगम ने सिटी सेन्टर के अतिरिक्त निर्माण को तोड़ने का भी आदेश दिया है।

                                 निगम के अनुसार सिटी सेंटर निर्माण के समय बिलासपुर इन्फ्रास्ट्रक्सचर्स प्रायवेट लिमिटेड ने आवेदन में फर्जी सीमांकन रिपोर्ट पेश किया था। सिटी सेंटर की एक जमीन पर तीन अलग अलग सीमांकन रिपोर्ट दिए गए। नक्शा पास करवाते समय बिलासपुर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने शपथ पत्र में 40 फीट चौड़ी पहुंच मार्ग बताया था। लेकिन निगम ने सीमांकन के दौरान शपथ पत्र झूठा पाया। सिटी सेन्टर संचालक अशोक अग्रवाल ने भी अदालत में स्वीकार किया है शपथ पत्र कूट रचित है।

                                    निगम प्रशासन ने जबाव में बताया कि सिटी सेंटर की कुछ दुकानें और सीढी का टावर खसरा नम्बर 488 सरकारी जमीन में बनाया गया है। बिलासपुर इन्फ्रास्ट्रक्सचर्स प्रायवेट लिमिटेड संचालक अशोक अग्रवाल ने जानबूझकर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण किया है। सिटी सेंटर दिनेश वर्मा और विनय सलूजा की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाया गया है। मामले में भू संबंधी विवाद कलेक्टर कोर्ट में लंबित है।

                      निगम प्रशासन ने बताया कि सिटी सेंटर निर्माण स्वीकृत नक्शे से अधिक क्षेत्र में हुआ है। दो ब्लॉकों के बीच सीढ़ियां रखी गई थी। दोनों को मिलाकर दुकान बना दिया गया ।14507 वर्ग फीट दुकानों का अतिरिक्त निर्माण किया गया है। दुकानों की अनुमानित लागत 5 करोड़ रुपए से अधिक है।

                                  नक्शे के अनुसार 2 ब्लॉकों के बीच कामन सीढ़ियों का प्रावधान था। सीढियों को मिलाने के बाद किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भवन पूरी तरह से असुरक्षित है। निर्माण स्वीकृत नक्शे से अधिक क्षेत्र में हुआ है। व्यवसायिक काम्पलेक्स तक पहुंच मार्ग की चौड़ाई न्यूनतम 40 फीट होना चाहिेए। अशोक अग्रवाल ने झूठा शपथ पत्र देकर पहुंच मार्ग 40 फिट बताया था। सीमांकन के बाद पहुंच मार्ग की चौड़ाई मुश्किल से 30 फिट निकली। सीमांकन का विवादित होना, झूठा शपथ पत्र देकर नक्शा पास करवाना ,भू-स्वामित्व संबंधी विवाद होना, शासकीय भूमि 488 पर कब्जा कर निर्माण करना नगर पालिक निगम और टाउन प्लानिंग अनुज्ञा शर्तों का उल्लंघन है।

                   निर्माण में दो फ्लैटों के बीच कामन सीढ़ियां सुरक्षा की दृष्टि से रखी गई थी। समायोजन से आपदा की स्थिति में भवन असुरक्षित है । निगम ने बताया कि तमाम विसंगतियों के बाद नक्शे को नियमित कराना नामुमकिन है।

                                       निगम प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि सिटी सेन्टर संचालक अशोक अग्रवाल को खसरा नम्बर 235,236 और 237 कुल रकबा 89704 वर्गफुट जमीन पर ऊपर और नीचे अलग-अलग 26520 वर्गफुट आवासीय भवन निर्माण की अनुमति थी। निर्माण नक्शे के खिलाफ सरकारी जमीन खसरा नम्बर 488 पर बेजाकब्जा कर किया गया है।

                        प्रशासन ने बताया कि हाईकोर्ट में बिलासपुर इन्फ्रास्ट्रक्सचर्स प्रायवेट लिमिटेड ने राजीनामा के लिए कहा था। चूंकि अतिरिक्त निर्माण कार्य 14 प्रतिशत से अधिक है। अधिनियम के अनुसार केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण कार्य में राजीनामा हो सकता है।इसलिए राजीनामा संभव नहीं हो सका।

                      जवाब पेश करते हुए कोर्ट को निगम ने बताया कि न्यायालय बिलासपुर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रायवेट लिमिटेड , सिटी सेन्टर निर्माण के खिलाफ दिए गए आदेश का पालन करेगा।

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