शहर-शहर क्यों बदल जाते हैं CNG के दाम,किस टैक्स के चलते इतनी महंगी हो रही गैस

आप सोच रहे होंगे कि काश सीएनजी (CNG Price) पर भी एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT) का नियम लागू हो जाता और टैक्स में कटौती का फायदा मिल जाता. 75 रुपये प्रति किलो पहुंची गैस की कीमत कुछ कम हो जाती. बड़ा सवाल ये है कि दिल्ली में 75 रुपये प्रति किलो बिकने वाली कंप्रेस्ड नेचुरल गैस या सीएनजी गुड़गांव में लगभग 84 रुपये क्यों है. फरीदाबाद में यही गैस 77 रुपये क्यों है. यही गैस महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 76 रुपये है जबकि नागपुर में 115 रुपये क्यों है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. ये भी जानेंगे कि पेट्रोल-डीजल की तरह सीएनजी पर टैक्स का नियम कैसे काम करता है.

पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी और वैट से हम वाकिफ हैं क्योंकि इन तेलों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. इस पर रोक लगाने के लिए सरकारें कभी-कभी टैक्स घटा देती हैं. लेकिन सीएनजी के मामले में हमें टैक्स की जानकारी कम होती है क्योंकि गैस के दाम कम हुआ करते हैं. मगर इसमें भी बहुत तेजी से बदलाव देखा जा रहा है. कभी 30-40 रुपये किलो बिकने वाली सीएनजी आज दोगुने-तिगुने रेट पर बिक रही है. इसकी वजह भी सरकारी टैक्स है. पेट्रोल और डीजल की तरह सीएनजी पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकार का वैट और सेंट्रल सेल्स टैक्स लगता है. इन तीन तरह के टैक्स स्ट्रक्चर के चलते कुछ रुपये में बिकने वाली गैस कई रुपये में बिकने लगी है.

दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र का हाल

सीएनजी के दाम में उतार-चढ़ाव का सबसे अधिक असर देश के तीन राज्यों दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में में देखा जाता है. इसकी वजह है कि देश के कुल 76 फीसद सीएनजी स्टेशन और 80-90 परसेंट पीएनजी कनेक्शन इन्हीं तीनों राज्यों में हैं. बाकी राज्यों में सीएनजी और पीएनजी की व्यवस्था छुटपुट है. अलग-अलग राज्यों में सीएनजी के दाम में इतना बड़ा अंतर इसलिए देखा जाता है क्योंकि वहां के टैक्स में भारी अंतर होता है. उदाहरण के लिए, दिल्ली में सीएनजी पर वैट बिल्कुल मुफ्त है जबकि यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात में यह क्रमशः 12.5 फीसद, 13.5 और 15 परसेंट है.

कुछ राज्यों में तो सीएनजी के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी जाती है. इसका असली कारण वहां के वैट रेट में तेज बढ़ोतरी है. आंध्र प्रदेश में यह रेट 24.5 परसेंट, गुजरात में 15 परसेंट और मध्य प्रदेश में 14 परसेंट है. यानी एक किलो गैस खरीदने पर आपको इसी रेट से राज्य सरकार को पैसा देना होता है. इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी है. सेंट्रल सेल्स टैक्स अलग है.

क्यों बढ़ रहे गैस के दाम

सीएनजी या पीएनजी लिक्विड नेचुरल गैस का हिस्सा हैं. इसे अंग्रेजी में एलएनजी कहा जाता है. भारत अपनी एलएनजी जरूरत को अधिकांशतः आयात से पूरा करता है. रूस से भी यह गैस भारत में आती है. यूक्रेन युद्ध के चलते इस सप्लाई पर बड़ा असर देखा जा रहा है. लिहाजा दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी है. सीएनजी के दाम देखें तो सात मार्च के बाद से शनिवार को 13वीं बढ़ोतरी की गई. इस दौरान कुल मिलाकर सीएनजी की कीमत 19.60 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है. इसका अर्थ हुआ कि मार्च से मई के बीच लगभग 20 रुपये एक किलो पर दाम बढ़े हैं. एक आंकड़ा बताता है कि पिछले एक साल में कीमतों में 32.21 रुपये प्रति किलो या 60 फीसद तक की वृद्धि हो चुकी है. आने वाले समय में भी कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है क्योंकि नेचुरल गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी उच्च स्तर पर हैं. महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) के अनुसार मुंबई में सीएनजी की कीमत 76 रुपये प्रति किलो है. सीएनजी की कीमतों में अलग-अलग शहरों में लगने वाले लोकल टैक्स के कारण अंतर होता है.

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