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कलेक्टर ने ओरछा पहुंच कर स्वास्थ्य- महिला बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों की ली बैठक

नारायणपुर-कलेक्टर अजीत वसंत आज नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड पहुंचकर स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने मैदानी अमले की कार्य पद्धति एवं कार्य के दौरान आने वाली दिक्कतों की जानकारी ली। आरएचओ और स्वास्थ्य साथी ने बताया कि ओरछा विकासखंड के ग्राम बाड़ापेंदा पहुंचने के लिए उन्हें 3 घंटे पैदल चलना पड़ता है, जिसके अंतर्गत 9 गांव और आते हैं। इन गांवों में वैक्सीनेशन, मलेरिया, टीबी परीक्षण और गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है। इस क्रम में कुडमेल, ढूठाखार की स्वास्थ्य साथी और आरएचओ संगीता ने बताया कि वह 4 साल से पदस्थ है, जो दूरस्थ क्षेत्रांें में जाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराती है। कलेक्टर वसंत ने आरएचओ और स्वास्थ्य साथियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की आस्था व परम्पराओं का सम्मान करते हुए गांव के गायता, सिरहा का सहयोग लेकर गांव वालों को स्वास्थ्य सुविधा अपनाने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करें। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री सदानंद कुमार, सीईओ जिला पंचायत श्री देवेश कुमार ध्रुव, एसडीएम ओरछा श्री प्रदीप वैद्य के अलावा अन्य अधिकारी-कर्मचारी व शिक्षक-शिक्षिकायें उपस्थित थी। 
कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा इस माह से स्वास्थ्य साथियों के मानदेय में वृद्धि की जा रही है। पूर्व में स्वास्थ्य साथियों को 7 हजार रूपये प्रतिमाह प्रदान किया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 11 हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है। बैठक में स्वास्थ्य साथियों ने बताया कि जिले की विशभ भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बार उन्हें गांव में ही रूकना पड़ता है, इस हेतु उन्हें पोर्टेबल मच्छरदानी और मैट प्रदान किया जाये, जिस पर कलेक्टर श्री वसंत ने सहमति दी। कलेक्टर ने स्वास्थ्य अमले से गांवों में हैंडपंप व सोलर लाईट की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने पीएचई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हैंडपंप 4 मैकेनिकों को ओरछा मुख्यालय में रखें और जहां से भी हैंडपंप खराब होने अथवा खराब पानी की सूचना मिले, उसकी तत्काल आवश्यक मरम्मत करायें।
इससे आगे कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीणों को उबला पानी और मच्छरदानी के उपयोग करने की समझाईश दें। उन्होंने कहा कि यहा सही है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी का मैदानी अमला विशम परिस्थितियों में कार्य कर रहा है, लेकिन इसे चुनौती के तौर पर लेते हुए अपनी सेवायें देने की जरूरत है। इसके लिए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा और जिस माहौल परिवेश में वे रहते हैं, उसे समझते हुए कार्य करें। 
इस दौरान कलेक्टर श्री वसंत ने महिला बाल विकास विभाग के मैदानी अमले से भी चर्चा की। बताया गया कि ओरछा विकासखंड में 181 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। उन्होंने सुपरवाईजर को निर्देशित किया कि 3 दिवस के भीतर 10 ऐसे गांवों की सूची दें, जिनमें आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित नहीं है। ताकि इन गांवों में आंगनबाड़ी बनायी जा सके। कलेक्टर ने 1 से 3 साल के सभी बच्चांे को आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से गर्म भोजन दिये जाने हेतु प्रस्ताव तैयार करने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जिले की विशम भौगोलिक परिस्थिति के चलते स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग का मैदानी अमला आपसी समंजस्य बनाकर स्वास्थ्य और पोशण सुविधा दूरस्थ ग्रामों तक पहुंचायें। 

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