मेरा बिलासपुर

करीब 6 करोड की सम्पत्ति पर समिति का कब्जा…अलग अलग मद से किया गया निर्माण…विवाद और तनाव के बीच आज चुनाव

तीन करोड़ में बना बाल श्रमिकों के लिए सामुदायिक भवन..उद्यान में खर्च हुए 2 करोड़ 75 लाख

बिलासपुर—पाटलीपुत्र संस्कृति विकास मंच का आज चुनाव है। कार्यकारिणी के लिए हर तीन साल बाद होने वाले चुनाव में समिति के सदस्य मतदान करते हैं। इसी क्रम में 22 जनवरी यानि आज समिति के सदस्य नई कार्यकारिणी के लिए मतदान करेंगे। नामांकन प्रक्रिया के बाद दोपहर साढ़े तीन बजे से साढे चार बजे के बीच मतदान होगा। इसके बाद मत गिनती का काम काम होगा। देश शाम नई कार्यकारिणी के लिए चुने गए पदाधिकारियों के नाम का एलान किया जाएगा।

चुनाव प्रक्रिया के साथ ही एक बार फिर छठ घाट को लेकर नई नई जानकारी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि समिति के एक गुट छठघाट निर्माण और विकास को लेकर निजी सम्पत्ति के रूप में मानता है। वही एक गुट ऐसा भी है जो पहले गुट की मोनोपली को लेकर खासा नाराज है। जानकारी के अनुसार दोनों गुट के अलावा एक अन्य गुट भी मैदान में है। एक दूसरे पर ना केवल कीचड़ उछाल रहे हैं। बल्कि सरकारी सम्पत्ति पर बेजा कब्जा का भी आरोप लगा रहे हैं।

जानकारी देते चलें कि करीब 20 साल पहले साल 2003 के आसपास कुछ लोग छठघाट निर्माण की संकल्पना के साथ आगे आए। तत्कालीन प्रशासन के विशेष सहयोग से सांस्कृतिक मूल्यो को बढ़ावा देने अरपा तट स्थित छोटे बड़े पेड़ पौधों को काटकर छटघाठ का निर्माण शुरू हुआ। धीरे धीरे अरपा स्थित छठघाट को एशिया का सबसे बड़ा घाट का दर्जा हासिल हो गया। इसी के साथ एक विशेष गुट के लोगों ने छठगाट पर कुण्डली मार लिया। लगातार दावा किया गया कि निजी प्रयास से घाट का निर्माण किया गया है। जबकि वस्तुस्थिति कुछ अलग ही है। जो कुछ अलग है..उसकी जानकारी समय समय पर गुटीय राजनीति के चलते सामने आती रही और आज भी आ रही है।

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जानकारी देते चलें कि जिस छठ घाट को निजी धन के प्रयास से बनाया जाना बताया जा रहा है। दरअसल ऐसा कुछ नहीं है। सच्चाई तो यह है कि छठघाट स्थित सामुदायिक भवन का निर्माण केन्द्रीय सरकार की निधि से हुआ है। सामुदायिक भवन का निर्माण ग्रामीण विकास मंत्रालय बाल श्रमिक के कोष से किया गया है। कम लोगों को ही पता होगा कि तीन करोड़ की लागत से सामुदायिक भवन का निर्मआम बाल श्रमिकों के रिहैबलिटेशन से बना है। लेकिन उस पर आज किसी और का कब्जा है।

इसके अलावा बिलासा उद्यान निर्माण और हरियाली विकास के लिए एसईसीएल ने दो करोड़ 75 लाख रूपया दिया। उद्यान तो नहीं बना लेकिन अरपा तट स्थित पेड़ पौधों को काटकर लम्बा चौड़ा एक प्लेटफार्म जरूर बन गया। जिसे हम छठघाट कहते हैं। यद्यपि मामले में समिति का कोई सदस्य कुछ नहीं बताता है। सच से इंकार नहीं किया जा सकता कि सरकारी सम्मत्ति का दुरूपयोग किया गया है। मतलब रूपया दूसरे मद का और उपयोग कही दूसरे मद में किया गया है। जबकि ऐसा किया जाना ना सरासर गलत है। बाल श्रमिकों के लिए बनाया गया भवन अब समिति के कब्जे में है। बिलासा उद्यान का कहीं अता पता नहीं है।

बहरहाल आज पाटलीपुत्र विकास मंच नई कार्यकारिणी गठन को लेकर आज चुनाव होगा। देर शाम परिणाम भी सामने आ जाएगा। समिति के पास पर्याप्त धन है। यदि चुनाव के दौरान तनाव की स्थिति बनती है तो कोई आश्चर्य  की बात नहीं होगी।

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