हेमूनगर में निगम तोड़फोड़ का विरोध…कांग्रेस के साथ महिलाओं का प्रदर्शन..वकीलों ने दी धमकी

IMG-20171214-WA0027 बिलासपुर—हेमनगर स्थित बस्ती को हटाने गये निगम का अतिक्रमण दस्ता खाली हाथ लौटा। स्थानीय लोगों के साथ कांग्रेसियों ने तोड़फोड़ का विरोध किया है। बस्ती की महिलाओं ने जेसीबी के सामने लेटकर तोड़फोड़ अभियान का विरोध किया। मौके पर वकील भी पहुंचे। निगम और तोरवा थाना प्रभारी पर विधि के विरूद्ध कार्यवाही करने पर क्रिमिनल केस करने की धमकी दी। निगम प्रशासन ने हेमूनगर चिन्हांकित बस्ती वालों को तीन दिन का समय दिया है। अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर तोड़फोड़ की करने की बात कही है।

                         हेमूनगर स्थित स्लम बस्ती को हटाने निगम का अतिक्रमण दस्ता पहुंचा। भारी विरोध के बीच अतिक्रमण दस्ते को खाली हाथ वापस लौटना हुआ है। स्थानीय प्रभावितों ने तोड़पोड़ करने पहुंचे अभियान दल का विरोध किया। सभी ने बताया कि शासन ने उन्हें स्थायी पट्टा दिया है। पट्टा को कब निरस्त किया गया इसकी जानकारी भी नहीं दी गयी। कांग्रेसियों ने भी बस्ती वालों के समर्थन में मौके पर पहुंचकर तोड़फोड़ अभियान का विरोध किया।

        हेमूनगर बस्ती निवासी महिलाओं ने जेसीबी के सामने लेटकर अतिक्रमण अभियान का विरोध किया। मौके पर पुलिस भी पहुंच गयी। खबर मिलते ही वकील भी पहुंचे गए। मौके पर मौजूद कांग्रेस नेताओं ने निगम पर तानाशाही और गरीबों के साथ अन्याय का आरोप लगाया। कांग्रेसियों ने कहा कि अतिक्रमण अभियान चुन चुनकर गरीबों की बस्तियों पर चलाया जा रहा है। जबकि शहर की नजूल जमीनों पर भाजपा के कई नेताओं के बंगले बने हैं। यदि अटल आवास बनाना ही है तो पहले भाजपा नेताओं के बंगलों को तोड़ा जाए।

                       स्थानीय लोगों के अलावा निगम अभियान का विरोध करने वालों में प्रमुख कांग्रेस नेता शेख गफ्फार,नरेन्द्र बोलर, तैय्यब हुसैन,विजय पाण्डेय,शेख नजरूद्दीन,शैलेन्द्र जायसवाल,जावेद मेमन समेत कई लोग विशेष रूप से मौजूद थे।

किसकी इजाजत से पट्टा निरस्त

          हेमूनगर में कार्रवाई के विरोध में शैेलेन्द्र ने बताया कि साल 2008 में बिना किसी सूचना के पट्टा निरस्त किया गया। साल 1998 में प्रभावितों को सरकार ने स्थायी पट्टा दिया। नियमानुसार साल 2008 में कुछ सौ रूपए देकर पट्टों का नवीनीकरण किया जाना था। IMG-20171214-WA0025लेकिन निगम अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से बिना किसी सूचना के पट्टों को निरस्त कर दिया। यह जानते हुए भी पट्टा खुदबखुद नवीनीकृत हो जाता है।

                      शैलेन्द्र ने बताया कि 1984 अधिनियम के बहुत जरूरी होने और बड़ी सरकारी योजनाओं अपरिहार्य स्थिति में ही शर्तों के अनुसार पट्टा निरस्त किया जा सकता है। लेकिन पट्टा निरस्त के पहले सूचना देना अनिवार्य है। इसके अलावा जमीन पर बसे लोगों के लिए प्रशासन को पुख्ता व्यवस्थापन की कार्रवाई को अंजाम देना होगा। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है।

क्रिमिनल केस का मामला

        बस्ती के वकील ने निगम कर्मचारी पी.के.पंचायती को बताया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई पर क्रिमिनल केस बनेगा। 1946 एक्ट के अनुसार विधि विरूद्ध बस्ती को हटाया नहीं जा सकता है। मामले में हाईकोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया था। फाइल अभी भी कलेक्टर कार्यालय में है। निर्णय भी नहीं लिया गया है। बावजूद इसके बस्ती को तोड़ने को तोड़ने का फैसला लिया गया। वकील ने तोरवा थाना और निगम पर कार्रवाई की सूरत में क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात कही ।

तीन दिन का अल्टीमेटम

       यद्यपि निगम प्रशासन मौके से खाली हाथ लौट आया। लेकिन तीन दिन के अन्दर बस्ती खाली करने का फरमान भी जारी किया। पंचायती ने बताया कि तीन दिन बाद बस्ती हटाने की कार्रवाई होगी। पंचायती के अनसुार विस्थापित लोगों को पहले से बने मकानों में शिफ्ट किया जाएगा। निगम प्रशासन के पास हाईकोर्ट से बस्ती को हटाने का आदेश है।

कांग्रेसियों ने मांगा आदेश

            कांग्रेसियों ने कहा कि बस्ती के लोग कहीं नहीं जाएंगे। जमीन का उपयोग किस तरह के काम में होगा। निगम प्रशासन को बताना चाहिए। बिना आदेश और शर्त के खिलाफ बस्ती को हटाया नहीं जा सकता है। यदि निगम के पास हाईकोर्ट आदेश की कापी हो तो दिखाए। अन्यथा बस्ती पर जेसीबी चलने नहीं देंगे। इस दौरान स्थानीय पार्षद सभापति अशोक विधानी कहीं नहीं दिखाई दिये। स्थानीय लोगों सभापति अशोक विधानी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है।

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