दिग्विजय सिंह ने कैसे बढ़ाईं गांधी परिवार की मुश्किलें

दिल्ली/जयपुर।राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर उनसे चर्चा की। मुलाकात से पहले उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी का जो भी फैसला होगा, वह उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वह पार्टी के नए अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनेंगे, लेकिन यह भी साफ किया कि उनकी इच्छा है कि राहुल गांधी ही अध्यक्ष पद स्वीकार करें। इसके लिए वह कोच्चि जाकर उन्हें राजी करने का प्रयास करेंगे। अगर वह नहीं मानते हैं तब वह खुद उम्मीदवार बनेंगे। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत इन दिनों केरल में हैं। उधर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने की बात स्वीकारी है।

इस बीच कांग्रेस पार्टी ने संकेत दिया है कि अगर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनते हैं तो वह अपने “एक व्यक्ति, एक पद” नियम में थोड़ी रियायत दे सकती है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक गहलोत पार्टी अध्यक्ष तो बनना चाहते हैं, लेकिन वह राजस्थान के सीएम का पद नहीं छोड़ना चाहते हैं।

उन्हें चिंता है कि अध्यक्ष बनने पर उन पर एक व्यक्ति एक पद के तहत सीएम पद छोड़ने का दबाव बढ़ सकता है। बुधवार को सोनिया गांधी से मुलाकात के पीछे उनकी यह चिंता ही प्रमुख वजह बताई जा रही है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष पद की भूमिका के लिए अशोक गहलोत सोनिया गांधी की पसंदीदा उम्मीदवार हैं। राजस्थान की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में गहलोत को सबसे अधिक खतरा अपनी ही सहयोगी नेता सचिन पायलट से है। 2020 में वह अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर अपना विरोध जता चुके हैं।दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी साफ किया है कि अध्यक्ष पद की दौड़ में वह भी शामिल हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत अगर अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालते हैं तो उन्हें राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में “स्पष्ट रूप से इस्तीफा” देना होगा।

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