लोहर्सी सहकारी बैंक के चिल्हाटी सोसायटी में फसल बीमा घोटाला.. प्रबंधकों का बड़ा कारनामा..फर्जी रकबा पर लाखों का बीमा भुगतान..ट्रस्ट और सरकारी जमीन को भी नहीं छोड़ा.. CEO चन्द्राकर ने कहा..कराएंगे जांच

बिलासपुर—-जिला सहकारी बैंक के लोहर्सी ब्रांच मैनेजर और चिल्हाटी सहकारी समिति प्रबंधक ने मिलकर शासन को पांच साल में करोडों का फसल बीमा घोटाला को अजाम दिया है। जानकारी के अनुसार चिल्हाटी सोसायटी प्रबंधक ने एक साल में  शासन को फर्जी तरीके से फसल बीमा में करी ब25 लाख से अधिक का चूना लगाया है। जानकारी के अनुसार तात्कालीन समय मामले में जांच भी हुई। लेकिन सोसायटी प्रबंधक झाडूराम वर्मा और लोहर्सी प्रबंधक ने मिलकर मामले को दबा दिया।  रिपोर्ट को दबाने लाखों रूपए की बंदरबांट जमकर हुई। 

                 जिला सहकारी बैंक के लोहर्सी शाखा से जुड़े चिल्हाटी सोसायटी में लाखों करोड़ों रूपए का फसल बीमा घोटाला उजागर हुआ है। हासिल दस्तावेज के अनुसार सोसायटी प्रबंधक झाडूराम वर्मा और लोहर्सी सहकारी बैंक प्रबंधक ने मिलकर फसल बीमा योजना में शासन के खजाने से करोड़ों का वारा न्यारा किया है। 

सोसायटी को बनाया जागीर

              जानकारी देते चलें कि चिल्हाटी सोसायटी में झाडूराम वर्मा लम्बे समय से प्रबंधक के पद पर काबिज हैं। उन्होने इस दौरान अपने भाई भतीजा और बेटे को सोसायटी में अलग अलग पदों पर नियुक्त करवाया है। पूरा परिवार मिलकर सोसायटी को घर की जागीर समझ लिया है। और सभी ने मिलकर घोटाले को अंजाम दिया है।

फसल बीमा में पांच साल चला मैन्यूल दस्तावेज

                बताते चलें कि साल 2018-2019 के पहले तक फसल बीमा का राजस्व रिकार्ड मैन्यूल तैय़ार किया जाता था। यानि साल 2014 से  2018 तक मस्तूरी क्षेत्र में ज्यादातर किसानों का जमीन रिकार्ड आनलाइन नहीं था। इसका फायदा उठाकर सहकारी बैंक लोहर्सी प्रबंधक और चिल्हाटी सोसायटी प्रबंधक झा़डूराम ने रकबा बढ़ाने का जमकर खेल खेला। खेल में भोले भाले किसानों ने भी जाने अन्जाने में खिलाड़ी बने। फसल नुकसान का रकबा वास्तविक रकबा से दो से तीन गुना कर दिया गया। इसके एवज में किसानों को शासन की तरफ से बीमा राशि का भुगतान बैंक को किया गया। 

मिलीभगत का चला खेल

                   सारी कार्रवाई के बाद बैंक प्रबंधक और सोसायटी प्रबंधक ने मिलीभगत कर किसानों को आनलाइन और व्यक्तिगत रूप से राशि का भुगतान किया ।बाद में बढ़ी हुई राशि को किसानों से वापस लिया गया। इसके एवज में किसानों को कुछ रूपए भी दिए गए।

                  फसल बीमा की अतिरिक्त राशि को दोनों प्रबंधकों ने मिलकर बंदरबांट किया। मामले की जानकारी बाद में उच्चअधिकारियों तक पहुंची। जांच के दौरान फसल बीमा में भारी भरकम गड़बड़ी का होना पाया गया। घोटालेबाज दोनों प्रबंधकों ने मामले को दबाने में एड़ी चोटी का जोर लगाया। और प्रयास में सफल भी रहे।

क्या है फसल बीमा योजना

                 फसल बीमा योजना केन्द्र सरकार की महती योजना है। योजना का संचालन साल 2014 में शुरू हुआ। योजना का संचालन राज्य सरकार के सहयोग से किया जाता है। योजना के अनुसार बुआई के समय किसानों की फसल का कुछ राशि लेकर बीमा कराया जाता है। सूखा या आकाल अथवा प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होने पर शासन बीमा राशि का भुगतान किसानों को किया जाता है।  इसी क्रम में चिल्हाटी समेत लोहर्सी सहकारी बैंक शाखा समेत जिले के अन्य किसानों की फसल का हर साल बीमा किया जाता है। 

 रकबा बढ़ाकर किया फसल बीमा घोटाला

                  सीजी वाल को हासिल दस्तावेज के अनुसार साल 2017-2018 में चिल्हाटी सोसायटी की रिपोर्ट पर शासन ने सहकारी बैंक शाखा लोहर्सी से फसल बीमा राशि का भुगतान किया गया। कुछ समय बाद जानकारी मिली कि चिल्हाटी सोसायटी प्रबंधक ने फसल बीमा राशि के लिए किसानों के रकबा को बढ़ाकर पेश किया। इसके चलते शासन ने जिला सहकारी बैंक को बीमा राशि का ज्यादा भुगतान किया। सीजी वाल को हासिल दस्तावेज के अनुसार कई जमीनों का रकबा तीन से चार गुना किया गया। जाहिर सी बात है कि शासन को बीमा राशि का भुगतान तीन से चार गुना करना पड़ा। 

सोसायटी प्रबंधक ने उठाया आफ लाइन का फायदा

          बताते चलें कि तात्कालीन समय राजस्व का रिकार्ड आनलाइन नहीं था। इसका फायदा उठाते हुए झाडूराम ने बीमा राशि ज्यादा पाने के लिए किसानों को जानकारी दिए बिना रकबा बढ़ा दिया। लेकिन राशि खुद हड़प लिया।

अपने परिवार को कई गुना कराया बीमा भुगतान      

             चिल्हाटी सोसायटी प्रबंधक झाडूराम ने अपने परिवार के कई सदस्यों को कई गुना बीमा राशि का भुगतान कराया। जबकि परिवार के सदस्यों के पास जितनी जमीन नहीं उससे कही ज्यादा फसल बीमा राशि शासन से लिया गया। परिवार के कई सदस्यों के पास जमीन भी नहीं है। बावजूद इसके उन्हें लाखों रूपए बीमा राशि का भुगतान किया गया। 

बीमा राशि के लिए सरकारी और ट्रस्ट की जमीन को बताया अपना 

               चिल्हाटी सहकारी सोसायटी प्रबंधक वर्मा ने बीमा राशि पाने के लिए सरकारी जमीन को भी नहीं छोड़ा। सरकारी जमीन को अपना बताकर लाखों रूपए बीमा लिया। इसके अलावा लोहर्सी बैंक प्रबंधक से मिलकर मंदिर ट्रस्ट जमीन को अपना बताकर बीमा राशि की वसूली की।

प्रबंधक हटाने के बाद जांच..दब गयी रिपोर्ट

             तात्कालीन समय जिला सहकारी सहकारी केन्द्रीय बैंक के उच्च अधिकारियों को घोटाले के मामले की जानकारी मिली। आनन फानन में लोहर्सी सहकारी बैंक शाखा प्रबंधक को हटाकर मस्तूरी भेजा गया। लोहर्सी में नया प्रबंधक लाया गया। नए प्रबंधक ने फसल बीमा घोटाला का एक प्रारंभिक रिपोर्ट बनाकर पेश किया। लेकिन किन्ही कारणों से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। बाद में पुराना प्रबंधक फिर से लोहर्सी का पदभार ले लिया।

रिपोर्ट पेश किया…फिर क्या हुआ नहीं मालूम

                 वर्तमान में जिला सहकारी केन्द्रीय मर्यादित बैंक के मुख्य प्रबंधक विरेन्द्र टण्डन ने बताया कि कुछ महीने तक लोहर्सी ब्रांच का प्रबंधक रहने का मौका मिला। फसल बीमा  घोटाला को एक रिपोर्ट दिया था। फिर क्या हुआ इसकी उन्हें जानकारी नही है।

 माले की करेंगे गंभीर जांच

                 मामले में जिला सहकारी केन्द्रीय मर्यादित बैंक के सीईओ श्रीकांत चन्द्राकर ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। इसकी जानकारी प्रशासक कलेक्टर महोदय को भी देंगे। मामला गंभीर है। जानकारी मिल रही है कि घोटाला 2017-2018 का है। लेकिन हम फसल बीमा योजना के लागू होने से लेकर साल 2018 तक दिए गये बीमा राशि भुगतान की जांच कराएंगे। रकबा की भी जांच करेंगे। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे।

     अगली कड़ी..पढ़ेगें फसल बीमा घोटाला के साथ  बैंक और सोसायटी में फर्जी नियुक्ति का खेल

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