लोकअदालत में उमड़ी भीड़..10 हजार प्रकरणों का निराकरण..1 हजार मामले शासन ने लिया वापस.. मिनटों में खत्म हुआ 40 साल पुराना मामला

बिलासपुर—-राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार 10 जुलाई 2021 को हाईब्रीड नेशनल लोक अदालत का आयोजन छत्तीसगढ़ में ब्लाक स्तर से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक सभी न्यायालयों में किया गया। पक्षकारों की आपसी सुलह समझौता से पुराने से पुराने मामलों का निराकरण किया गया।
 
             छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, कार्यपालक अध्यक्ष, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा  के निर्देश पर लोक अदालत के लिये प्रत्येक जिले में मजिस्ट्रेट की स्पेशल सीटिंग दी गयी थी। छोटे-छोटे मामले पक्षकारों की स्वीकृति के आधार पर निराकृत किये गये। विशेष प्रकरणों जैसे धारा 321 सीआरपीसी, 258 सीआरपीसी एवं मामूली अपराध के प्रकरणों तथा कोरोना काल में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अतर्गत दर्ज प्रकरणों का भी निराकरण किया गया। ऐसे मामले जो न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हुए हैं, उन्हें भी प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के रूप में पक्षकारों की आपसी समझौते के आधार पर निराकृत किया गया।
 
                      लोकअदालत में कुल 10 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। एक हजार मामले कोरोना काल में उल्लंघन से संबंधित धाराओं से जुड़े मामलों को  शासन की पहल पर वापस लिया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 4 खण्डपीठों में कुल 123 प्रकरणों का निराकरण किया गया। मोटर दुर्घटना के 103 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 2 करोड़ 39 लाख 90 हजार 840 रुपये का अवार्ड पारित किया गया ।
 
देश की पहली मोबाइल लोक अदालत
 
         देश की पहली मोबाइल लोक अदालत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और महासमुंद में जिला न्यायालय में लंबित 7 प्रकरणों को मोबाइल लोक अदालत (वैन) के माध्यम से निराकरण किया गया। पक्षकारों के घर पहुंचकर प्रकरणों को आपसी सुलह समझौता कराया गया। 
 
19 लाख 20 हजार  शुल्क की वापसी का आदेश
 
                जिला न्यायाधीश दुर्ग राजेश श्रीवास्तव के न्यायालय में लंबित व्यवहार वाद संविदा के विशिष्ट पालन हेतु 6 करोड 20 लाख रुपये की अस्थायी निषेधाज्ञा हेतु मामला 20  जुलाई 2020 पेश किया गया था। जिसमें 19 लाख 20 हजार का न्याय शुल्क चस्पा किया गया था।  प्रकरण में प्रतिवादीगण 2 करोड़ 18 लाख रुपये प्रदान करने हेतु सहमत हुए।
 
रायपुर जिले में न्याय पक्षकारों के द्वार
 
             रोड एक्सीडेंट के एक मामले में 78 वर्ष के बुजुर्ग पक्षकार अली असगर अजीज को न्यायालय आने में परेशानी थी,। इसलिए प्राधिकरण के दो पैरालीगल वालिंटियर्स रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेन्द्र कुमार वासनीकर की खंडपीठ में वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से निःशक्त पक्षकार  को उपस्थित कराया। न्यायालय द्वारा वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से ही अली असगर को समझाइश दी गई और राजीनामा के संबंध में चर्चा की गई। थाना कोतवाली, रायपुर में राजीनामा के उपरांत मामला समाप्त किया।
 
 सरगुजा में 40 साल पुराने मामले का निराकरण
 
   भूमि संबंधी विवाद को लेकर रामदुलार चौधरी वगैरह, के पिता शिबोधी चौधरी और शिवमंगल सिंह के बीच चालिस साल पुराने मामले का निराकरण किया गया। समझौता प्रकरण 40 वर्ष पुराना होने के कारण संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के समझाईश और सहयोग से हुआ। 

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