हमार छ्त्तीसगढ़

बस्तर सांसद दीपक बैज को हड़तालियों ने सौपा ज्ञापन,DA-HRA को लेकर 22 अगस्त से मोर्चा खोल रखा है कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ

लोहंडीगुड़ा।सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता और गृह भाड़ा भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।आंदोलन की वजह से स्कूलों में पढ़ाई, न्यायालयीन कामकाज ,राजस्व निपटारा से लेकर सामान्य सरकारी कामकाज ठप हो गए हैं। जिले में हड़ताल से आम जनता की परेशानी बढ़ गई है। ब्लॉक मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक हड़ताल से कामकाज ठप हो गया है।बता दें कि राज्य सरकार ने 6 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने का आदेश जारी किया। लेकिन इस आदेश को लेकर कर्मचारी और अधिकारियों में भारी नाराजगी है।

हड़ताल में बैठे कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई भत्ता 12 प्रतिशत बढ़ाए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। केंद्र के समान मंगाई भत्ता की मांग हुई थी लेकिन सरकार ने सिर्फ 6 फ़ीसदी मंगाई भत्ता बढ़ाया।शनिवार को शासकीय कर्मचारियों अधिकारियों के महंगाई भत्ते और गृह भाड़ा भत्ता के संबंध में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ब्लॉक शाखा लोहंडीगुड़ा जिला बस्तर ने बस्तर सांसद दीपक बैज को पत्र लिखा है।

फेडरेशन ने कहा कि कमरतोड़ महंगाई और उससे राहत के लिए केंद्र के अनुसार शासकीय कर्मचारियों अधिकारियों को 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता और सातवें वेतन के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता दिया जाना है। लेकिन प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी केवल 22 फीसदी महंगाई भत्ते पर अटके हैं और HRA भी छठे वेतन आयोग के अनुसार दिया जा रहा है। जो आधा भी नहीं है। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्राप्त हो रहा है।

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कांग्रेस शासित राजस्थान में 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने दो-दो बार सरकार को पत्र लिखा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है और चर्चा भी नहीं हुई। वर्तमान में 25 जुलाई से 29 जुलाई तक सांकेतिक आंदोलन हुआ। फेडरेशन ने कहा कि पूरे प्रदेश के सभी कार्यालय पूर्ण रुप से बंद रहे और सरकारी काम बुरी तरह प्रभावित हुए। संवेदनशील सरकार को कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए अग्रसर होना था लेकिन इसके ठीक विपरीत दमनात्मक कार्रवाई करते हुए प्रदेश के कर्मचारियों के 5 दिन की तनख्वाह काटने और सर्विस ब्रेक करने का आदेश जारी कर दिया गया।

परिणाम स्वरूप प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों में भारी आक्रोश है। इसलिए सरकारी सेवकों ने 22 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया। प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारी अधिकारियों का मार्मिक अनुरोध है कि हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप सभी दायित्वों का निर्वहन करते हैं। सरकार की नीतियों और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने तथा जमीनी पर उतारने का दायित्व सरकारी कर्मचारियों का होता है जिसे हमने पूरी निष्ठा लगन और मेहनत से किया है और फलता छत्तीसगढ़ सरकार की कई योजनाओं के क्रियान्वयन को केंद्र एवं नीति आयोग द्वारा न केवल सराहा गया बल्कि पुरस्कृत भी किया गया।

यही कारण है कि छत्तीसगढ़ राज्य को मॉडल राज्य के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। कोरोना काल में तो सरकारी कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश के कर्मचारियों को पुरस्कृत करने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने बस्तर सांसद दीपक बैज से निवेदन किया कि आप अपने जनप्रतिनिधि होने का दायित्व और अपने प्रभाव का उपयोग करने की कृपा करें ताकि अप्रिय स्थिति को टाला जा सके और सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच सामंजस्य बरकरार रखा जा सके।

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