शिक्षक (LB) संवर्ग को क्रमोन्नति देने की घोषणा पर अमल करने की मांग

सूरजपुर(मनीष जायवाल)-छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रेस की प्रांतीय महासचिव कमलेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व स्वास्थ्य मंत्री  टी एस सिंहदेव को पत्र लिखकर राज्य में कांग्रेस सरकार की ढाई वर्ष पूर्ण होने बधाई देते हुए चुनावी घोषणा पत्र का स्मरण कराते  हुए मांग की है कि शिक्षक (एल बी)संवर्ग यथा  सहायक शिक्षक ,शिक्षक एवम् व्याख्याता को प्रथम नियुक्ति /कार्यभार ग्रहण तिथि से  10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण तिथि से समयमान /क्रमोन्नति वेतनमान के आधार पर पुनरीक्षित वेतनमान में उच्चतर वेतनमान का वेतन बैंड एवम् ग्रेड पे दिए जाने का आदेश प्रसारित करने का अनुरोध किया है।प्रेस नोट के माध्यम से जानकारी देते हुए कालेश्वर सिंह ने बताया कि  वर्तमान में शिक्षक (एल बी) संवर्ग को एक ही पद पर  10 और 20 वर्ष से अधिक अवधि तक कार्यरत होने के बावजूद पदोन्नति नहीं दी गई है और ना क्रमोन्नति दी गई है।

कांग्रेस सरकार ने घोषणा पत्र में वादा किया था कि हमारी सरकार आयेगी तो शिक्षा कर्मियों को प्रथम नियुक्ति तिथि से एक ही पद पर 10 वर्ष या उससे अधिक अवधि में कार्यरत शिक्षक (एल बी) संवर्ग को क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जायेगा परन्तु आज पर्यन्त तक सरकार की ओर से कोई आदेश जारी नहीं होने के कारण यह सवर्ग निराश और हताश महसुज कर रहे है जिसका प्रभाव स्कूल शिक्षा विभाग के अध्ययन अध्यापन एवम् शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है ।कोई भी शिक्षक सरकार की योजनाओं को भरे मन ने नहीं कर रहा है ।शिक्षक नेता कमलेश्वर बताते है कि  शिक्षा कर्मी की नियुक्ति तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार के समय किया गया था जिसका समय समय पर नाम परिवर्तित किया गया और वेतनमानों में भी संशोधन किए गए परंतु शासकीय सेवकों को मिलने वाले लाभ से वंचित रखा गया ।  

   कमलेश्वर का कहना है कि छत्तीसगढ़  मध्यप्रदेश का हिस्सा रहा है जब वहां की सरकार  द्वारा शिक्षा कर्मी (अध्यापक संवर्ग) का शासकीय करण करते हुए पंचायत /नगरीय निकाय में की गई सेवा को जोड़ते हुए पदोन्नति एवम् प्रथम द्वितीय एवम् तृतीय क्रमोन्नति वेतनमान में उच्चतर वेतनमान दिया जा रहा है जबकि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा यह कहकर टाला जा रहा है कि शिक्षक (एल बी) को स्कूल शिक्षा विभाग में साविलियन तिथि से शासकीय शिक्षकों का लाभ मिलेगा ।जो कि न्यायायिक दृष्टि से गलत है ।शिक्षा कर्मी एक ही पेड़ की जड़े है। एक के हिस्से में आम आया एक के हिस्से में ईमली आ रही है।एक साथ एक ही नाम से नियुक्ति शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है  अलग  अलग राज्यो में अलग अलग कानून कैसे हो सकता है ।

शिक्षक नेता ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने एक ही पद में 8वर्ष या उससे अधिक की सेवा अवधि पूर्ण करने वालों को 8 वर्ष पूर्ण तिथि में छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के तहत शासकीय शिक्षकों के समान अनुसूची एक में अंकित सहायक शिक्षक ,शिक्षक एवम् व्याख्याता पद का वेतन बैंड एवम् ग्रेड पे देने का आदेश दिया परन्तु वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के नियम 7(क) के तहत शिक्षक (प/न नि) के पद पर कार्यरत रहते हुए 8वर्ष की पूर्ण तिथि में प्राप्त कर रहे विद्यमान मूल वेतन के आधार पर 1.86से गुणा कर वेतन निर्धारण नहीं किया गया जिसके कारण वेतन विसंगति उतपन्न हो गई ।

शिक्षा कर्मियों के साथ हुई नाइंसाफी को सरल शब्दों में बताते हुए शिक्षक नेता का कहना है कि एक ओर  अधिकारियों द्वारा सहायक शिक्षक से शिक्षक बने,और शिक्षक से व्याख्यता बने साथियों का  पदोन्नति पद के मूल वेतनमान के आधार पर अपग्रेड वेतनमान में पुनरीक्षित कर दिया वहीं समयमान /क्रमोन्नत वेतनमान में अपग्रेड वेतन प्राप्त कर रहे शिक्षकों का वेतन नियम 8 के तहत  पद के न्यूनतम वेतन में वेतन निर्धारण कर विसंगति उत्पन्न कर दिए ।जो नव नियुक्ति कर्मचारियों का किया जाता है ।

कमलेश्वर सिंह का कहना है कि हर शिक्षक इस बात को भी जाने की स्कूल शिक्षा विभाग में सविलियान के पश्चात शिक्षक (एल बी संवर्ग को 2013 में उत्पन्न वेतन विसंगति को दूर  कर राहत पहुंचाने का काम करने का भरोसा वर्तमान सरकार पर था ।इस बीच सभी संगठनो ने समयमान /क्रमोन्नति का लाभ देने हेतु सरकार से पत्र व्यवहार करते रहे है परन्तु स्कूल शिक्षा विभाग के   के  अधिकारियों द्वारा उल्टे स्कूल शिक्षा विभाग में सविलीयन तिथि से पदोन्नति/क्रमोन्नति का लाभ देने का तुगलकी आदेश दे रहे है ।ये अधिकारीगण न्यायालयीन आदेश का भी जवाब तोड़ मरोड़ कर दे रहे ताकि अवमानना से बचे जा सके ।कई अधिकारी अवमानना आदेश का भी पालन नहीं कर रहे है ।इससे शिक्षकों का मनोबल एवम् विश्वास घट रहा है ।

कमलेश्वर सिंह बताते है कि राज्य सरकार स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नई नई नवाचार गतिविधियों ,गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से शिक्षकों पर थोप रहे है परन्तु शिक्षकों की समस्यायों के निराकरण करने मै कोई रुचि नहीं ले रहे है इससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रभाव पड़ सकता है ।एक ओर शिक्षकों से विशेष कर शिक्षक (एल बी)संवर्ग जिसकी संख्या  विभाग में 90% से अधिक है  उनसे अधिक से अधिक परिणाम की आशा की जाती है और वही उनकी मांगो को अनदेखी कर दिया जाता है ।शिक्षक नेता का कहना है कि 5 मार्च 2019 को छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवम् प्रशासनिक) भर्ती एवम् पदोन्नति नियम का प्रकाशन किया गया जिसके क्रियान्यवयन हेतु आदेश जारी करते  हुए यह स्पष्ट किया गया था कि शिक्षक (ई/टी)वर्ग एवम् शिक्षक (एल बी)संवर्ग को क्रमोन्नति एवम् पदोन्नति देने की कार्यवाही की जाए परंतु शिक्षा विभाग ने केवल शिक्षक ( ई एवम् टी) वर्ग पर ही लागू कर रहा है ।जबकि नियमानुसार प्राचार्य,प्रधान पाठक ,शिक्षक एवम् व्याख्यता की पदोन्नति हेतु 30%-30% प्रतिशत शिक्षक  (एल बी, ) संवर्ग  के लिए आरक्षित किया है।

छत्तीसगढ़ शिक्षक कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष  अनिल शुक्ला ,महासचिव कमलेश्वर सिंह ,प्रांतीय महामंत्री  निगार अंजुम ,जिलाध्यक्ष  सुरेश जैन ,प्रदेश सचिव सुनील कुमार गुनी ,संयुक्त सचिव  कमलेश पटेल ,संभागीय पदाधिकारी पवन श्रीवास्तव रायपुर अनिल बिलासपुर  ,संजय सिंह ,शशिभूषण शर्मा ,शैली सिंह , बंशबिहारी बनाफर ,आदि ने राज्य सरकार के ढाई वर्ष पूर्ण होने की बधाई दी एवम् शिक्षक (एल बी)संवर्ग को पूर्व विभाग कि सेवा अवधि को जोड़कर प्रथम द्वितीय एवम् तृतीय उच्चतर वेतनमान का  वेतन बैंड एवम् ग्रेड पे देने की प्रशासकीय आदेश जारी करने की मांग की ।

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  1. By MANOJ KUMAR PANDA

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