जगदलपुर तहसीलदार की नोटिस पर हाईकोर्ट की रोक..एकलपीठ ने कहा..तोड़फोड़,बेदखली आदेश गलत..कहा..याचिकाकर्ता को अपील का अधिकार

 
बिलासपुर— जगदलपुर स्थित आदिवासी विश्रामगृह परिसर में बनाए गए दुकानों को बेदखली और तोड़फोड़ को लेकर स्थानीय प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दिया है। बताते चलें कि जगदलपरु स्थित आदिवासी विश्रामगृह परिसर में दुकानों को  तोड़फोड़ से बचाने याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को कोर्ट ने अगामी आदेश तक बेदखली, तोड़फोड़ से राहत देते तहसीलदार के आदेश पर रोक लगा दिया है।
 
         जानकारी देते चलें कि याचिकाकर्ता पार्थसारथी बिस्वास, किशोर वासवानी, अमित सोनी, सारिका मेश्राम और कुलदीप दीवान जगदलपुर स्थित आदिवासी विश्राम भवन परिसर में स्थित दुकानों के किराएदार हैं। कलेक्टर जगदलपुर के आदेश से  परिसर की देखरेख और किराया प्राप्त करने का अधिकार छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज नामक पंजीकृत सोसायटी को दिया गया है। एक अन्य सोसायटी सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग ने आदिवासी विश्राम भवन हथियाने की नीयत से खुद को स्वामी बताते हुए एसडीएम के सामने आवेदन पेश किया। एसडीएम को बताया कि  याचिकाकर्ता किराया नहीं दे रहे  हैं। आदिवासी भवन तोड़कर नया बना रहे हैं।
 
           मामले में एसडीएम ने याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर किराया रसीद पेश करने को कहा । साथ ही बिना जांच प़ड़ताल बेदखली आदेश थमा दिया। याचिकाकर्ता ने स्थानीय प्रशासन के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका पेश किए जाने के दौरान ही 7 जनवरी को तहसीलदार नजूल ने याचिकाकर्ताओं को बेदखली नोटिस भेज दिया। 
 
              मंगलवार को याचिकाकर्ता के वकील वरूण शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि तहसीलदार की बेदखली नोटिस विधि सम्मत नहीं है। यह जानते हुए भी अपील की समयसीमा अभी खत्म नहीं हुई है। बावजूद इसके तहसीलदार ने बेदखली नोटिस जारी कर दुकानदारों के अधिकारों को प्रभावित किया है। बेदखली नोटिस को अवैध किया जाए।
 
                        दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति पीसैम कोशी की एकलपीठ ने  याचिकाकर्ता दुकानदारों को राहत दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि तहसील कार्यालय से जारी बेदखली आदेश और  नोटिस के अनुसरण में अधिकारी किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करेंगे।

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