मेरा बिलासपुर

डीईओ ने कहा..आप क्या चाहते हैं, रजाई कम्बल बांटे…अभिभावक परेशान नहीं तो…आप क्यों बेचैन हैं..

school 1बिलासपुर(मनीष की रिपोर्ट)– ठंड कड़ाके की शुरू हो गयी है। रिमोट क्षेत्र में पारा 10 डिग्री के नीचे चला गया है। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों की हालत पस्त है। फिर भी जिला शिक्षाअधिकारियों का मानना है कि ठंड इतनी भी नहीं है कि स्कूल समय में परिवर्तन किया जाए। शहर में ठंड ने अभी तक दस्तक भी नहीं दिया है। जिस दिन ऐसा लगेगा शासन के निर्देश पर स्कूल समय में परिवर्तन कर दिया जाएगा। जिला शिक्षाधिकारियों की माने तो हड़ताल के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई है। इसलिए स्कूल समय में एक घंटे बढ़ा दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी है…। रही बात ठंड की तो…अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है..होगी तो विचार किया जाएगा।

              कड़ाके की ठंड शुरू हो गयी है। गौरेला,मरवाही,पेन्ड्रा क्षेत्रों में पारा 10 डिग्री के नीचे चला गया है। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों की हालत खराब है। लेकिन शिक्षाअधिकारियों तक अभी ठंड नहीं पहुंची है। इसके विपरीत जिला प्रशासन ने स्कूल खुलने और बंद होने के समय को बढ़ा दिया है। जिसके कारण शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की सजा बच्चों को मिल रही है।

शासन के निर्देश का इंतजार

         सीजी वाल को जांजगीर चांपा जिला शिक्षाअधिकारी ने बताया कि अभी बहुत ज्यादा ठंड नहीं है। ठंड को लेकर अभिभावकों की शिकायत भी नहीं आयी है। स्कूली समय में परिवर्तन का अधिकार हमारे पास नहीं है। शासन के निर्देश पर ही स्कूली समय में परिवर्तन किया जाएगा। चूंकि शिक्षाकर्मी हड़ताल पर थे …बच्चों की पढा़ई पर प्रभाव पड़ा। कोर्स और पढ़ाई को देखते हुए स्कूलों के समय में परिवर्तन किया गया है। जांजगीर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि मैं भी पत्रकार रहा हूं..मुझे भी नियम और कानून मालूम है। लेकिन शासन के निर्देश और आदेश में बंधे हुए हैं।

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तो क्या हम कंबल स्वेटर बांटे

                     रिमोट क्षेत्रों के सरकारी स्कूली बच्चे ठंड से परेशान हैं के सवाल पर नाराज जांजगीर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि हम कर भी क्या सकते हैं। क्या आप यह चाहते है कि शिक्षा अधिकारी बच्चों को स्वेटर,कम्बल,शाल या रजाई बांटे। यह काम हमारा नहीं है। जब अभिभावक परेशान नहीं हैं तो आप क्यों बेचैन हैं।

बीईओ से मगाएंगे रिपोर्ट

बिलासपुर जिला शिक्षाअधिकारी हेमन्त उपाध्याय ने बताया कि ठंड अभी ज्यादा नहीं है। हो सकता है कि वनांचल क्षेत्रों में ठंड बढ गयी हो। सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मगाएंगे। इसके बाद स्कूल समय को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। मामले को कलेक्टर के सामने भी रखेंगे। विषय को हम गंभीरता से लेंगे। यह सच है कि इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड ज्यादा होती है। रिपोर्ट के अनुसार फैसला लिया जाएगा।

वनांचल और जंगल क्षेत्रो में शीतलहर..बच्चों की हालत खराब

              पिछले एक सप्ताह से ठंड बढ़ गयी है। वनांचल और रिमोट जंगल क्षेत्रो में पारा 10 डिग्री के नीचे चला गया है। बावजूद इसके स्कूली समय में कटौती के वजाय बढ़ा दिया गया है। शिक्षाकर्मी हड़ताल के बाद स्कूल का समय सुबह और शाम आधे-आधे घंटे के लिए बढ़ाया गया है। जिसके चलते बच्चे ठंड से परेशान है। गौरेला,मरवाही,पेन्ड्रा, अकलतरा,शिवरीनारायण क्षेत्र के जंगल और मैदानी क्षेत्रों में भयंकर ठंड पड़ रही है। लेकिन अधिकारियों तक नहीं पहुंची है। जबकि गांव के गरीब और आदिवासी बच्चे भयंकर ठंड में स्कूल जाने को मजबूर हैं। मतलब सीधा है कि बच्चों को शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की सजा मिल रही है। लेकिन सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के गरीब अभिभावक कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है।

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                                दो पालियों में संचालित स्कूली बच्चों को सुबह और शाम दोनों तरफ से ठंड की मार झेलने को मजबूर हैं। देखना है कि शासन किसी हादसे के बाद स्कूल समय में परिवर्तन का आदेश जारी करता है या फिर शिक्षाकर्मियों की हड़ताल की सजा बच्चों को भी मिलती रहेगी।

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