कुत्तों ने किया 3 दिन में 2 चीतल का शिकार..वन अमला मदमस्त..घर से कर रहे जंगल की रखवाली. ..गलतियों को छिपाने पेश कर रहे गलत आंकड़ा

बिलासपुर—-सीपत स्थित भरूवाडीह के बंधिया में पानी पीने पहुचें फिर एक चीतल को कुत्तों ने नोंचा खसोटा और फिर जान से मार डाला। यह जानते हुए भी कि दो दिन पहले ही कुत्तों ने ऐसे ही एक चीतल को मौत के घाट उतार दिया था। बावजूद इसके वन अपला हाथ पर हाथ रखकर बैठा है। और तीन दिन बाद कुत्तों ने दूसरे चीतल को मार गिराया है।
 
              सीपत क्षेत्र के जंगलों वन्य जीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। तीन दिन के अन्दर कुत्तों ने दो चीतल के मौत के घाट उतार दिया है। दरअसल किस्सा वही पुराना है। हमेशा की तरह एक बार फिर प्यासी मादा चीतल भटक्कर प्यास बुझाने गांव से लगे बंधिया तालाब में पानी पीने पहुँची। इसके पहले मादा चीतल गले का प्यास बुझाती । आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। और भागते चीतल को नोचा खसोटा और अन्त में मार गिराया।
 
            जानकारी देते चलें कि सीपत क्षेत्र में तीन दिन में बेजुबान के मारे जाने की दूसरी बड़ी घटना है। जंगल से प्यासे पशु पानी पीने बस्ती के करीब तालाब, नहर में पहुच रहे है। अपनी जान गंवाकर वन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता की भरपाई भी कर रहे है। यदि जंगल के अंदर पर्याप्त मात्रा में पानी की व्यवस्था होती तो शायद  तीन दिन में दो चीतल आज जंगल में कुलांचे भरते नजर आते। लेकिन ऐसा होना नहीं था। क्योंकि हर साल की तरह इस बार जंगल विभाग कुछ जंगली अंदाज में नजर आता दिख रहा है।
 
          जानकारी देते चलें कि सीपत क्षेत्र के भरूवाडीह बीट कक्ष क्रमांक 4 आरएफ के जंगल से डेढ़ वर्षीय मादा चीतल मंगलवार को दोपहर करीब एक से दो बजे के बीच भरूवाडीह बस्ती के पास तालाब पहुंची। पानी पीने के दौरान  कुत्तों ने हमला कर दिया। जिसके चलते मादा चीतल घायल हो गयी। ग्रामीणों ने वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष प्यारेलाल बिंझवार को जानकारी दी। प्यारेलाल ने मौके पर जाकर कुत्तों को भगाया । गम्भीर रूप से घायल चीतल को पानी पिलाने का प्रयास किया। घटना की जानकारी वन विभाग तक पहुंची। मादा चीतल को मेटाडोर से इलाज  के लिए कानन पेंडारी लाया गया। जहां  मादा चीतल ने इलाज से पहले ही दम तोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने पंचनामा कर पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराया। फदहाखार में मृत चीतल का दाह संस्कार किया गया।
                 
तीन दिनों में दो चीतलों की मौत
 
गर्मी का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। हर वर्ष की तरह प्यास बुझाने जानवर जंगलों से बस्ती पहुंच रहे हैं। इस दौरान पहले से घात लगाकर बैठे शिकारी और कुत्तों के चंगुल में जानवर फंस जाते हैं। शिकारियों को शिकार करते पकड़े जाने पर मामला को मौके पर ही रफा-दफा कर दिया जाता है। लेकिन कुत्तों के हमलों से घटना को वन विभाग आसानी से छिपा लेता है। बहरहाल भरुवाडीह की इस घटना से मात्र तीन दिन पहले ठरकपुर के नहर में पानी पीने पहुचे चीतल की भी मौत कुत्तों के काटने से हुई थी। देखना है की इन दोनों घटना के बाद वन विभाग क्या कदम उठाती है।
 
 बोर के 9 पॉइंट.. लेकिन सब बेकार
 
जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के लिए पूर्व में वन विभाग ने सीपत सर्किल के रोपण क्षेत्र ठरकपुर में 1 बोर कैमाडीह में 2 बोर,आरएफ 6 में 3 बोर एवं आरएफ 8 में 3 बोर का खनन कराया  था । विडंबना यह कि मौसम का पारा 40 के करीब पहुच रहा है । बावजूद इसके इनमें से किसी भी बोर पॉइंट को चालू नही किया गया है। सर्किल के डिप्टी रेंजर अजय बेन का कहना है कि 9 में से 5 बोर में पम्प लगा दिया गया है। लेकिन कनेक्शन वायर नही होने के कारण बोर अभी चालू नही हुआ है।
 
               
घर से हो रही जंगल और जानवारों की रखवाली
 
भरूवाडीह बीट के वन संरक्षक कान्हा वर्मा होली के दिन से अपने ड्यूटी क्षेत्र को भगवान के भरोसे छोड़ गए है। बीट गार्ड कान्हा अगर गायब नही रहते तो शायद घटना नही होती। बताते चलें कि वर्तमान में लकड़ी तस्करों को विभाग ने चरने खाने की खुली छूट दिया है। विभाग के छोटे से बड़े अधिकारी कर्मचारी मुख्यालय से नदारद रहते है। जानकारी के अनुसार सभी कर्मचारी घरों से ही जंगल की निगरानी करते है।
               
रेंजर ने कहा कुछ..ग्रामीणों ने बताया कुछ
 
बिलासपुर रेंजर एएस नाथ ने बताया कि सभी 9 बोर पॉइंट में मोटर पम्प लगा दिया गया है। चालू करने के लिए केबल वायर की खरीदी की जाएगी। एक सप्ताह के अंदर सभी बोर चालू हो जाएंगे। जमीन को खोदकर कोटना लगाया जाएगा। जानवरो के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। ताकि जंगल से जानवर बाहर ना निकल सकें। प्टी रेंजर ने बताया कि 9 बोर में से 5 बोर में पम्प लगा दिया गया है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ दो में पम्प लगे है।

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