कोरोना काल में ना बारात…ना बाजा-गाजा …घर परिवार के लोग पाबंदियों के बीच पूरी कर रहे शादियों की रस्म..

तखतपुर(टेकचंद कारड़ा)।रामनवमीं की प्रतिवर्ष शादीयों की धूम रहती है बाजे गाजे के साथ बारात निकलती है और नगर गलियों, गांवों में घुमते हुए बाराती डीजे की धुन में थिरकते हुए जाते है लेकिन कोरोना ने सभी पर विराम लगा दिया है सादे समारोह और सीमित संख्या में वैवाहिक रस्मे सम्पन्न की जा रही है।रामनवमीं का दिन हिंदू तिथियों में सबसे पवित्र और अच्छा मुहूर्त माना जाता है इस दिन लोग बिना मुहूर्त दिखाए वैवाहिक सहित गृह प्रवेश, नलकूप खनन, भूमिपूजन जैसे कार्य होता है। मां बाप की जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सपना होता है कि वह धूम धाम से अपने बच्चों की शादी करें इस बार कोरोना संक्रमण बढ गया जिसके कारण जिले में लाकडाउन लगा हुआ है सभी तरह की प्रतिष्ठानें बंद है।

धार्मिक आयोजन पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। विवाह कार्य में शामिल होने के लिए केवल दस लोगों को शमिल होने की अनुमति है उसमें भी शासन से अनुमति लेना है इसके बाद ही आयोजन हो सकता है। वर पक्ष की ओर से पहली बार समय पर बाराती निकासी की जा रही है और रस्मे पूरी की जा रही है बारात आने पर होने वाला धुमधडाका नही हो रहा है न ही कोई अन्य औपचारिकताएं सीधे वैवाहिक कार्य ही सम्पन्न किए जा रहा है।

रामनवमीं के दिन टिकरीपारा निवासी नरेंद्र सिंह ठाकुर अपने पुत्री पूर्णिमा ठाकुर का विवाह झेलियापुर निवासी राजा ठाकुर के पुत्र घनश्याम ठाकुर के साथ सादे समारोह में कन्यादान किया। इस दौरान परिजन भी सीमित संख्या में थे।

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