किसानों ने किया प्रदर्शन..मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को दिया मांग पत्र..धीरेन्द्र ने कहा..अब करेंगे दिल्ली घेराव

बिलासपुर—भारतीय किसान संघ ने बिलासपुर समेत प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय मांग पत्र दिया। बिलासपुर में भारतीय किसान संघ के जिला ईकाई प्रमुख धीरेन्द्र दुबे ने बताया कि किसानों की वाजिब मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की बात कही। धीरेन्द्र दुबे ने बताया कि जल्द ही दिल्ली में केन्द्र सरकार का घेराव कर किसानों की मांग को प्रमुखता के साथ रखा जाएगा।
 
           भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने बताया कि  प्रदेश सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। सरकार यदि किसान हितैषी है तो किसानों की मांगों को तत्काल पूर्ण करें।  पिछले वर्षों में धान खरीदी को लेकर किसानों को बहुत सी परेशानियों का समाना करना पड़ा है। लगातार शिकायत के बाद भी सरकार ने किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से नहीं लिया है। 
 
               धीरेन्द्र ने बताया कि सरकार ने किसानों को घोषणा पत्र में वादा किया है कि भाजपा शासनकाल का दो वर्ष का बोनस दिया जाएगा। बावजूद इसके सरकार ने चार साल बाद भी वादा निभाया है। एक तरफ सरकार कहती है जो कहते हैं वह करते हैं । लेकिन यहां कथनी और करनी भारी भेद है। हम किसान हैं..नेतागिरी नहीं जानते। हमारी मांग है कि घोषणा पत्र में किए गए वादों को सरकार जल्द से जल्द पूरा करे। घोषित सिंचाई योजनाएं अभी तक अधूरी है।  प्रदेश के पानी पर आज भी उद्योगों का अधिक अधिकार है। यदि सरकार ने मांग को गंभीरता से नहीं लिया तो किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 
 
               किसान नेता ने बताया कि खाद की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। नामांतरण, फौतनामा और राजस्व के छोटे से छोटे काम के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकारी के हाथों किसान शोषण के लिए मजबूर हैं। 
 
           मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को दिए मांग पत्र में बताया कि लंबित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र प्रारंभ किया जाए। घोषणा पत्र में किए गए दो साल का बोनस दिया जाए।  धान खरीदी बढ़ाकर प्रति 20 क्विंटल की जाए। गौवंश को सुरक्षित रखने गोठानों को व्यवस्थित किया जाए। पैरादान के समय किसानों को मजदूरी भुगतान के साथ भाड़ा मनरेगा से जोड़कर दिया जाए।
 
                  धीरेन्द्र नेर बताया कि गौवंश को सुरक्षित करने पूरे प्रदेश में लंपी वायरस का टिकाकरण कराया जाए। नामांतरण और आपसी बंटवारे पर रजिस्ट्री शुल्क माफ किया जाए। जैविक खेती से प्राप्त उपज की जांच के लिए प्रत्येक विकासखण्ड में लैब स्थापित की जाए। जैविक फसलों की खरीदी के लिए सभी जिलों में अलग मंडी की व्यवस्था की जाए। धान खरीदी में धान की किस्मों को चार श्रेणी में बांटा जाए।  मोटा, पतला, एच एम टी, सुगंधित।
 
              किसान नेता ने कहा कि रबी में बोई जाने वाली फसलों की भी राज्य सरकार खरीदी करे। गिरदावरी के बाद रकबा कृषि विस्तार अधिकारी और कम्प्यूटर ऑपरेटर के माध्यम से पंजीयन कराया जाए। ताकि किसान कार्यालयों के चक्कर लगाने से बच सके। मुआवजे के लिए पुराने कानूनों में बदलाव किया जाए।

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