मेरा बिलासपुर

अतिक्रमण हटाने के दौरान जमकर हंगामा… कानाफूसी..पहले..हरी चटनी ही क्यों..? कमिश्नर ने कहा-खाली कराएंगे सरकारी जमीन..27 लोगों को नोटिस जारी

बिलासपुर—मंगला चौक- उस्लापुर ओव्हरब्रिज के बीच निगम के तोड़ू दस्ता ने अतिक्रमण जेसीबी चलाया। सरकारी जमीन पर बनाए गए अवैध निर्माण को तोड़ू दस्ता ने जमीनदोज कर दिया। इस दौरान निगम के खिलाफ अतिक्रमणकारियों ने जमकर हंगामा किया। प्रभावितों ने आरोप लगाया कि सड़क किनारे सभी लोगों ने सालों से अवैध निर्माण कर जमीन पर कब्जा किया है। सब कुछ जानते हुए भी किसी रसूखदार के इशारे पर उनके निर्माण को तोड़ा जा रहा है। मामलें में निगम कमिश्नर वासु जैन ने बताया कि सरकारी जमीन पर किसी भी कब्जे को नही रहने दिया जाएगा। सभी को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का निर्देश देंगे। अतिक्रमण नहीं हटाए जाने की सूरत में जेसीबी का प्रयोग कर सरकारी जमीन को छुड़ाया जाएगा।

अतिक्रमण हटाने के दौरान जमकर हंगामा

                       मंगलवार को उस्लापुर ब्रिज के पास सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के खिलाफ निगम ने अभियान चलाया। मात्र तीन दिन की नोटिस पर निगम ने हरी चटनी दुकान को जमीदोज कर दिया। इस बात को लेकर प्रभावित लोगों ने निगम के खिलाफ जमकर हंगामा मचाया। निगम की कार्रवाई को  लोगों ने एकतरफा बताया। नाम नहीं बताने की सूरत में एक व्यक्ति ने बताया कि निर्माणाधीन हरी चटनी दुकान को रसूखदार के इशारे पर तोड़ा गया है। जबकि उसके अगल बगल सड़क किनारे सालो से बनाए गए दुकान पूरी तरह से सरकारी जमीन पर है। बावजूद इसके उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। यदि अन्य लोगों को छूट है तो उन्हें छूट क्यों नहीं दिया जाए। जरूरत पड़ी तो हम निगम की शिकायत लेकर कोर्ट जाएंगे। हालांकि, नगर निगम आयुक्त वासु जैन ने भरोसा दिलाया  कि सरकारी जमीन पर काबिज किसी भी दुकान को नहीं छोड़ा जाएगा। नोटिस देकर दुकानों और मकानों को खाली कराया जाएगा।

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एकड़ों जमीन किसकी..अब तकर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

               बताते चले कि साल 1932 से 1935 में पुराना बस स्टैण्ड से उस्लापुर और मुंगेली के लिए रेलवे लाइन का सर्वे किया गया। पटरी बिछाने के लिए तत्कालीनर ब्रिटिश सरकार ने जमीन आवंटित किया गया। इसमें खसरा नंबर 1552 समेत और कई जमीन शामिल है। किन्ही कारणों से रेलवे लाइन बिछाने की योजना को निरस्त कर दिया गया। बाद में जमीन को राज्यशासन के मार्फत निगम प्रशासन के हवाले कर दिया गया। राज्य गठन के बाद अवसर वादियों ने फर्जी पट्टा या फिर जबरदस्ती कर सरकारी जमीन पर कब्जा कर दिया। कब्जा की कार्रवाई अभी तक जा रही है। करीब 22 साल बाद निगम प्रशासन गहरी नींद से जागा। और चुनकर एक दुकान को निशाना बनाया। सिर्फ एक दुकान को ही निशाना क्यों बनाया गया के सवाल पर अब निगम ने सड़क के किनारे करीब 90 फिट अन्दर तक सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को हटाने का एलान किया है।

हरी चटनी पर ही पहली कार्रवाई क्यों

                        सरकारी जमीन पर काबिज करण सिंह ठाकुर ने बताया कि हमें मालूम है कि जमीन सरकारी है। लेकिन इसी सरकारी जमीन पर सैकड़ों लोग काबिज है। इसमें कोई डाक्टर, कोई बिल्डर कोई उद्योग पति तो कोई राजनेता के रिश्तेदार काबिज है। सरकारी जमीन के बहुत बड़े हिस्से में पेट्रोल पम्प कम्पनी का भी निर्माण है। लेकिन निगम ने बुलडोजर नहीं चलाया। सवाल उठना लाजिम है कि सबसे पहले हरी चटनी रेस्टोरेंट को ही क्यों निशाना बनाया गया।

अचानक खुली नींद..कोर्ट जाने की तैयारी

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                 अचानक निगम की नींद खुलती है। एक दिन पहले नोटिस जारी होता है और दूसरे दिन दुकान को तोड़ दिया जाता है। नियमानुसार उन्हें भी जवाब देने का मौका दिया जाना चाहिए। यदि निगम ने आस पास के दुकानों को नहीं हटाया तो हम कोर्ट जाएँगे। क्यों और किसके इशारे पर बुलडोजर चलाया गया। इसकी उन्हें अच्छी तरह से जानकारी है। एक तरफा कार्रवाई का मतलब सरासर अन्याय है। अन्याय क्यों और किसके इशारे पर हुआ इसकी जानकारी हमें है।

27 कब्जाधारियों को नोटिस

   मामले में निगम अधिकारी सुरेश शर्मा ने बताया कि सरकारी जमीन पर 27 कब्जाधारियों को नोटिस भेजा गया है। कुछ लोग को अभी नोटिस भेजा जाना है। सालों पुरानी रेलवे की सड़क के समानान्तर खाली 90  फीट सरकारी जमीन पर स्मार्ट सड़क निर्माण की योजना है। लोगों का आरोप बेबुनियाद है…सच्चाई सबके सामने आ ही जाएगी। अतिक्रमणकारी कोई भी हो..अतिक्रमण के खिलाफ अभियान को नहीं रोका जाएगा।

निगम कमिश्नर ने कहा..खाली कराएंगे जमीन

                  निगम कमिश्नर वासु जैन ने बताया कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माम की जानकारी मिली। हमने नोटिस जारी किया। एक दिन पहले मौजूद होकर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। 12 बजे समय सीमा पूरी होने पर अतिक्रमण दस्ता ने तोड़फोड़ अभियान चलाकर सरकारी जमीन को खाली कराया है। वासू जैन ने बताया कि आस पास के सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किया जा रहा है। समय खत्म होने पर सभी अतिक्रमण को हटाया जाएगा। वासू जैन ने इंकार किया कि हम निर्माण होने के बाद कार्रवाई करते है। उन्होने बताया कि एक प्रक्रिया होती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। 

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पहले हरी चटनी ही क्यों

  बहरहाल इस बात को लेकर जमकर चर्चा है कि निगम ने हरी चटनी के खिलाफ किसी रसूखदार के इशारे पर ही तोड़फोड़ किया है। दो दिन पहले नोटिस देकर आनन फानन में निर्माण को जमीदोज किया गया। जबकि साफ दिखाई देता है कि रसूखदार सालों साल से घर बनाकर सरकारी जमीन पर काबिज हैं। लोगों को इंतजार है कि क्या निगम प्रशासन इन रसूखदारों पर कोई कार्रवाई करता है।  

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