पूर्व BJP सांसद की बेटी ने JCCJ का थामा दामन

Shri Mi
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बिलासपुर।मस्तूरी क्षेत्र से भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य चांदनी भारद्वाज पार्टी से बगावत कर जेसीसीजे में शामिल हो गयी। माना जा रहा है कि यदि जेसीसीजे इस सीट से चांदनी को अपनी पार्टी से कैंडिडेट बनाता है, तो बीजेपी विधायक की मुश्किले बढ़ सकती है।

बता दे कि बीजेपी की लिस्ट आने से पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने मस्तूरी विधायक डाॅ.कृष्णमूर्ति बांधी को बदलने की मांग कर चुक है।

विधायक बदलने की बात को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव के घर का घेराव कर नारेबाजी कर दी थी। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत सदस्य व पूर्व सांसद कमला पाटले की बेटी चांदनी भारद्वाज इस सीट पर BJP से टिकट की दावेदारी कर रही थी।

चांदनी भारद्वाज का धुर्वाकारी गांव में ससुराल है। समाज में उनका अच्छा खासा हस्तक्षेप है। सतनामी समाज में भी चांदनी की गहरी पैठ बतायी जाती है। लेकिन चांदनी की दावेदारी के बाद भी पार्टी ने एक बार फिर मौजूदा विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी पर भरोसा जताते हुए उनको टिकट दे दिया।

चांदनी भारद्वाज ने मीडिया से चर्चा में बताया कि मस्तूरी विधानसभा से उनकी दावेदारी थी। लेकिन पार्टी से उन्हे टिकट नही मिला। उन्होने बताया कि पूर्व सीएम स्व. अजीत जोगी की पार्टी क्षेत्रीय पार्टी है। उनके सिद्धांतों से प्रभावित होकर उन्होने जेसीसीजे ज्वाइन किया है।

चांदनी ने बताया कि मैंने मस्तूरी विधानसभा से टिकट देने की मांग की है। लेकिन टिकट पर अंतिम मुहर लगाना पार्टी के हाथ में है। अभी इसकी घोषणा नहीं हुई है। चांदनी भारद्वाज के जेसीसीजे में शामिल होने के बाद अब माना जा रहा है कि जोगी कांग्रेस उन्हे अपना उम्मींदवार बना सकती है। ऐसे में यदि चांदनी जोगी कांग्रेस से चुनावी दंगल में ताल ठोकती है, तो इससे बीजेपी प्रत्याशी डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का समीकरण बिगड़ने की उम्मींद जतायी जा रही है।

मस्तूरी विधानसभा से बसपा ने दाऊराम रत्नाकर को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं आम आदमी पार्टी से मोहतरा के सरपंच धरम भार्गव मैदान में है। जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक दिलीप लहिरया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि लहरिया को इस क्षेत्र में लोकप्रिय होने के साथ ही सहज और सरल व्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचाना जाता है।

लेकिन साल 2018 के विधानसभा चुनाव में जोगी कांग्रेस की एंट्री और बसपा से गठबंधन के कारण उन्हें दिलीप लहरिया को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन मौजूदा राजनीति में चुनावी समीकरण बदल गई है और चांदनी भारद्वाज के जेसीसीजे में आने के बाद मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।

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