हमार छ्त्तीसगढ़

कई कार्यक्रमों में बैठने का मिला मौका…बोले पूर्व गृहमंत्री…विद्वानों के बीच बैठने का मजा ही अलग..पद्मश्री सुरेन्द्र ने क्या कहा..पढ़ें खबर

कवि सम्मेलन का मजा ही अलग..खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं..रामविचार नेताम

कवि सम्मेलन में विद्वानों के बीच उनका ज्ञान का आनंद मिलता हैं बड़े सौभाग्य से- रामविचार नेताम
रामानुजगंज(पृथ्वीलाल केशरी)–नगर के स्थानीय लरंगसाय कम्युनिटी टाउन हॉल में संस्कार भारती के बैनर तले कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में अंतराष्ट्रीय कवि पद्मश्री डॉ.सुरेंद्र दुबे,कवित्री सुधा देवांगन,शुचि गुलशन खम्हरी,दिलीप अग्रवाल,बालमुकुंद श्रीवास, राजेश कुमार सोनार,मुकेश चतुर्वेदी समेत आधा दर्जन से अधिक कवियो ने माहौल को चार चांद लगाया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री रामविचार नेताम ने भी हिस्सा लिया।  अध्यक्षता की जिम्मेदारी को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक कमलेश कुंदन निर्वहन किया। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार और झारखंड प्रदेश के पूर्व मंत्री गिरिनाथ सिंह जिला संघ संचालक सुभाष जायसवाल पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पुष्पा नेताम पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष गोपाल प्रसाद गुप्ता भाजपा जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश जयसवाल जिला भाजपा कोषाध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल नगर पंचायत उपाध्यक्ष बजरंग गुप्ता धीरज सिंह देव भाजपा मंडल अध्यक्ष  प्रमिला गुप्ता की विशेष उपस्थिति रही।
  कार्यक्रम के पहले अतिथियों ने विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती और भारत माता के तैल चित्र पर फूल माला अर्पण कर आशीर्वाद मांगा। कार्यक्रम का शुभारंभ धूप दीप प्रज्वलित के साथ ही हुआ। संस्कार भारती के पदाधिकारियों ने अतिथियों का पुष्पमाला और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
     मेरा भारत महान पुस्तक विमोचन के बाद पूर्व गृहमंत्री राविचार नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित किया। नेताम ने कहा कि संस्कार भारती के सभी पदाधिकारी और सदस्यों को बधाई देता हूं। उन्होने कवि सम्मेलन का बीड़ा उठाकर समाज को स्वस्थ्य मनोरंजन का संदेश दिया है। खासकर कविता का रसपान करने पहुंचे दर्शकों को भी साधुवाद देता हूं।
नेताम ने बताया कि कई प्रकार के क्रायक्रमों में शिरकत करने का मौका मिलता है । किन कवि सम्मेलन में विद्वानों के बीच बैठकर ज्ञान का आनंद लेने का मजा ही अलग होता है। इसके लिए यहां आकर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। डॉ.सुरेंद्र दुबे ने अपने चुटकुले अंदाज में उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होने आयोजकों से कहा कि अब जब आप लोग कवि सम्मेलन कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करें तो समय का जरूर ध्यान रखे। कहने का अर्थ है कि कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम के लिए समय थोड़ा अधिक रखें। ताकि कवियों को सुनने पहुंचे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो सके।
          इस दौरान सुरेन्द्र दुबे ने एक से बढ़कर एक कविता का पाठ किया। उन्होने उपस्थित दर्शकों को जमकर गुदगुदाया। उपस्थित अ्य कवियों ने भी अपने  चिर परिचित अंदाज में श्रोताओं को प्रभावित किया।  लगभग 4 से 5 घंटे चले कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने स्वनस्थ्य और प्रेरक मनोरंजन का भरपूर लाभ उठाया।

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