साइंस कॉलेज बचाओ आंदोलन के समर्थन में उतरे अमर अग्रवाल,कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सरकार

बिलासपुर में 1972 से संचालित विज्ञान महाविद्यालय जिसे ई राघवेंद्र स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय के नाम से जाना जाता है, राज्य सरकार के द्वारा इसे आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय में परिवर्तित करने की घोषणा से विद्यार्थीगण सड़कों पर आ गए हैं। बिलासपुर में साइंस कॉलेज बचाओ आंदोलन के समर्थन करते हुए पूर्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गुणवत्तापूर्ण रोजगार परक शिक्षा, स्थानीय भाषा, मातृभाषा में देने के लिए निर्देश जारी किए गए इसके विपरीत बेतरतीब ढंग से आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की गुणवत्ता विहीन श्रृंखला के बाद महाविद्यालय छात्र छात्राओं के भविष्य का कबाड़ा करने के लिए सरकार आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय बिना किसी योजना के खोलने जा रही हैं।

पूर्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने कहा शहर के विज्ञान महाविद्यालय सहित प्रदेश के 10 कॉलेजों को इस कारण इस योजना के अंतर्गत चुना गया है एवम हर जिला मुख्यालय में ऐसे महाविद्यालय खोलने की योजना है।श्री अग्रवाल ने कहा 15 अगस्त के मौके पर राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय शुरू करने का एलान किया ।घोषणावीर मुख्यमंत्री ने इसके लिए मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जबकि कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है।

वास्तव में आत्मानंद स्कूलों एवं कॉलेजों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में बिना किसी कार्य योजना के मुख्यमंत्री शिक्षा क्रांति लाने का ढोल पीट रहे है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सामाजिक न्याय योजना का ड्रामा दिखाकर आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल एवं कॉलेजों को खोलकर सरकार के द्वारा अंग्रेजी माध्यम में युवाओं को शिक्षा देने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। स्कूलों में जारी इस योजना के लिए कोई पृथक से बजट जारी नहीं है। प्रदेश के 172 से ज्यादा ऐसे संस्थानों में डीएमएफ से जिला कलेक्टरों की पॉकेट मनी का जरिया बनाकर इन संस्थानों का मनमाने संचालन में दुरुपयोग किया जा रहा है।

देखने में आया है कि शिक्षकों की भर्ती ,प्रतिनियुक्ति एवं कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने के लिए प्रवेश प्रक्रिया एवं संसाधनों की की व्यवस्था में करोड़ों रुपए के वारे न्यारे कर दिए गए और अब स्कूल शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय का राग सरकार अलाप रही है। चयनित महाविद्यालयों में पढ़ने वाले हिंदी माध्यम के हजारों युवाओं के भविष्य के संदर्भ में सरकार के द्वारा कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की गई है।

विद्यार्थियों में इस बात की चिंता है कि अंग्रेजी माध्यम के लिए आत्मानंद महाविद्यालय घोषित कर दिए जाने के बाद सालों से पुराने जारी कॉलेजों का क्या होगा? सरकार को चाहिए था कि घोषणाओं के पहले पहले से संचालित संस्थान में विद्यार्थियों के भविष्य के संदर्भ में चिंता करती, नए आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालयों के लिए पृथक से बजट की व्यवस्था करती एवं सेटअप के अनुसार गुणवत्तापूर्ण रोजगार परक महाविद्यालय शिक्षा के लिए प्राध्यापकों की व्यवस्था की व्यवस्था की जाती। नए भर्ती व पुराने स्टूडेंट्स को महाविद्यालय में पढ़ाई करने में किसी तरह की परेशानी ना हो, इसलिए उच्च शिक्षा विभाग को पृथक से कॉलेज बिल्डिंग, खेल परिसर,लैब, लाइब्रेरी एवं छात्रावास की व्यवस्था करनी थी किंतु आपाधापी में पुराने संचालित महाविद्यालयों में ही बिना किसी नवीन अधोसंरचना विकास के नई व्यवस्था शुरू की जा रही है, जोकि पूर्णतया अप्रासंगिक एवं केवल दिखावे बाजी है।

श्री अग्रवाल ने कहा तो शहर के विज्ञान महाविद्यालय सहित चयनित अन्य महाविद्यालय प्रदेश में ख्यातिलब्ध है,सालों से हजारों युवा चयनित इन कॉलेजों से युवा देश और प्रदेश के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, रायपुर और बिलासपुर के विज्ञान महाविद्यालय की पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान है, किंतु शासन की श्रेय लेने की होड़ की नीति के कारण इन संस्थानों की परंपरागत अस्मिता और पहचान संकट उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने कहा सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य तो यह है कि जारी सत्र हेतु विज्ञान महाविद्यालय बिलासपुर में 775 विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया हो चुकी है जिसमें सात सौ हिंदी माध्यम के विद्यार्थी हैं, जो प्रदेश के कोने-कोने से पढ़ने के लिए यहां एडमिशन लिए हैं।जो विद्यार्थी फर्स्ट ईयर में प्रवेश ले चुके हैं, उनसे सहमति लेकर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने में इच्छा जाहिर नहीं करेंगे, तो उनको हिंदी माध्यम वाले दूसरे काॅलेज में बिना किसी तकनीकी दिक्कत के प्रवेश का दिलाया जाएगा,शासन द्वारा आदेश जारी होने के बाद प्रवेशित छात्रों में संशय की स्थिति बन गई है।

पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा हिंदी मीडियम वालो को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित करने का हवाला देकर आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय का नया शिगूफा लागु किया जा रहा है जिससे न सिर्फ युवा छात्र छात्राएं अध्ययनरत छात्र-छात्राएं और उनके पालक गढ़ हतप्रभ बल्कि अकादमिक स्टाफ को भी दोहरे कार्य का बोझ झेलने मजबूर होना पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग को चाहिए कि आपाधापी में क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की बजाय प्रभावित हो रहे पूर्व संचालित संस्थानों की अस्मिता से खिलवाड़ किए बिना युवा वर्ग के भविष्य की चिंता करते हुए योजनाबद्ध ढंग से आवश्यक मानवीय एवं भौतिक संसाधनों संसाधनों की व्यवस्था करके किसी योजना पर अमल करते। अमर अग्रवाल ने कहा शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग को इस संबंध में युवा हितों में आवश्यक निर्णय लेना चाहिए ताकि उद्घाटन की श्रृंखला में हीं ऐसे संस्थान न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझ कर ना रह जाएं।

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