निगाहें वली में वो तासीर देखी- बदलते हजारों की तकदीर देखी….लुतरा शरीफ के उर्स में पहुच रही अकीदतमंदों की भीड़

सीपत ( रियाज़ अशरफ़ी ) । लुतरा शरीफ में हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के 63 वां सालाना उर्स के दूसरे दिन मंगलवार को दरगाह में अकीदतमंदों की भारी भीड़ रही । बाबा सरकार के प्रति गहरी आस्था के साथ मजार में देर रात तक चादर चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा है । इससे पूर्व दोपहर 12:40 बजे दरगाह के खादिमों ने मज़ारे पाक ग़ुस्ल दिया ।इसके बाद सलातो सलाम और शिजरा पढ़ी गई । किछौछा शरीफ (उप्र) से आये अल्लामा हजरत सैय्यद हसन अशरफ ने मुल्के हिंदुस्तान से कोरोना जैसी बीमारी से निजात व देश की उन्नति और विकास के लिए हाथ उठाकर दुआ मांगी।
उर्स में प्रशासन के अलावा स्थानीय ग्राम पंचायत सरपंच प्रतिनिधि संतोष गन्धर्व व जनपद सदस्य प्रतिनिधि लक्ष्मी साहू तथा मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शेख सज्जाद सचिव रोशन खान,खजांची हाजी मोहम्मद अनवारुल हक़ भी अपनी टीम के साथ व्यवस्था को व्यवस्थित व बेहतर बनाने में लगे हैं । उनका कहना है कि दूर दराज से लुतरा शरीफ दरगाह पहुचने वाले दर्शनार्थी हमारे मेहमान है। इन सभी लोगो का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है । उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी ना हो इसके लिए स्थानीय प्रतिनिधि व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है। रात में हजरत अल्लामा हसन कमाल अशरफ की तकरीर हुई । उन्होंने बताया की वली औलिया खुदा के दोस्त होते है। इसीलिए उनके दरबार मे दिल से मांगी जाने वाली जायज मन्नते पूरी होती है। इस दौरान दरगाह के खादिम मोहम्मद उस्मान खान, हाजी शेर मोहम्मद, हाजी मोहम्मद साबिर, हाजी मोहम्मद जाकिर नानकी बाबा, हाजी मोहम्मद शरीफ, यासीन खान के अलावा कारी डॉ सैयद शब्बीर अहमद अशरफी, मोहम्मद इकबाल हक सहित मुस्लिम जमात एवं प्रशासन के लोग उपस्थित थे।

उर्दू की 17 तारीख है खास इसी दिन दुनिया को कहा था अलविदा

उर्स के दूसरे दिन उर्दू की 16 और 17 तारीख की दरमियानी रात में 63 वर्ष पूर्व 28 सितंबर सन 1960 दिन रविवार को हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह ने इस जाहिरी दुनिया को अलविदा कहते हुए अंतिम सांसे ली थी । बाबा के खादिमों के अनुसार वह रविवार का दिन था हजरत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह के आंखों में चमक थी। लबो पर अजीब सी मुस्कुराहट थी । नूरानी चेहरे से नूर की रहमत टपक रही थी । बाबा इंसान अली बिस्तर में लेटे हुए थे ..। कभी हँसते तो कभी मुस्कुराते थे ….तो कभी अपने आप मे मगन हो जाते ..। दिन भर लोगो की आंखे बाबा के चेहरे पर टकटकी लगाए देखती रही ।दिन ढलता गया शाम का सूरज धरती के आगोश में छुप गया और अंधेरों में अपनी बांहे फैलाना शुरू कर दिया । उपस्थित लोगों ने खामोश जुबान से रोते हुये शहंशाहे छत्तीसगढ़ को आखरी सलाम किया और बाबा इंसान अली रात 9:35 बजे अंतिम सांसे लीं। वे हमेशा के लिए हमारी आंखों से ओझल हो गए और अब अपने आस्ताने में आराम करते हुए दूर दराज से पहुँचे हुए मुसीबतजदो की परेशानी दूर कर रहे है। यही कारण है कि इस दिन का सबसे ज्यादा महत्व है।

पुराने दरबार से निकली 80 फिट लंबी चादर शाम को चढ़ाई गई

पुराने दरबार से 80 फिट संदल चादर निकाली गई । जिसे बस्ती और दरगाह से सामने गस्त कराने के बाद शाम 6 बजे बाबा इंसान अली शाह के दरगाह में चढ़ाई गई ।इससे पहले दरबारी कव्वाल याशीन शोला ने बाबा की शान में खूबसूरत कव्वाली प्रस्तुत किया । सूफी सिलसिला वालो ने भी 100 सौ से अधिक फिट की चादर चढ़ाई।

नेता प्रतिपक्ष चढ़ाई चादर मांगी दुआ

छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मंगलवार को सुबह 8 बजे बिना प्रोटोकॉल के दरबार पहुंचे और अपनी अकीदत के साथ चादर चढ़ाई । उन्होंने बाबा सरकार के आस्ताने में प्रदेश के खुशहाली की दुआ मांगी ।

बुधवार को आएंगे जिले प्रभारी मंत्री अग्रवाल और भी कई दिग्गज नेता

हजरत बाबा सैयद इंसान अली शाह के सालाना उर्स के तीसरे दिन दोपहर 12 बजे जिले के प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल लूतरा शरीफ दरबार पहुंचेंगे । इसके अलावा बिलासपुर विधायक शैलेश पांडेय, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विजय केसरवानी, मछुआ कल्याण बोर्ड उपाध्यक्ष राजेंद्र धीवर, बिलासपुर नागरिक सहकारी बैंक अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, जिला पंचायत सभापति द्वय राहुल सोनवानी – अंकित गौराहा, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सावित्री रामनारायण राठौर ,जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह ठाकुर,जनपद पंचायत सभापति नूर मोहम्मद, जनपद सदस्य अंजनी लक्ष्मी साहू ग्राम पंचायत सरपंच शुकवारा संतोष गंधर्व सहित अन्य दिग्गज शामिल होंगे ।

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